डिजिटल इंडिया के इस दौर में सरकारी व्यवस्थाओं को तकनीक के माध्यम से सरल और पारदर्शी बनाने की कोशिश लगातार जारी है। इसी दिशा में झारखंड सरकार द्वारा ई-विद्यावाहिनी पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई थी।
हालांकि, इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था कई तकनीकी खामियों के कारण शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए सरकार से सुधार की मांग की है।
ई-विद्यावाहिनी पोर्टल की तकनीकी समस्याएं
शिक्षकों का कहना है कि ई-विद्यावाहिनी पोर्टल में कई प्रकार की तकनीकी त्रुटियां मौजूद हैं, जिसके कारण बायोमेट्रिक अटेंडेंस सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाती है।
ज्ञानोदय योजना के तहत पहले भी टैबलेट और फिंगरप्रिंट डिवाइस उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन इन उपकरणों में तकनीकी खराबी के कारण वे प्रभावी साबित नहीं हो सके। परिणामस्वरूप, शिक्षकों को बार-बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
निजी मोबाइल पर निर्भरता: मजबूरी या विकल्प
वर्तमान स्थिति यह है कि विभागीय आदेश के अनुसार शिक्षकों को अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए निजी मोबाइल फोन का उपयोग करना पड़ रहा है। यह न केवल असुविधाजनक है, बल्कि कई बार नेटवर्क या तकनीकी समस्या के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।
इसका सीधा असर शिक्षकों के वेतन पर पड़ता है, क्योंकि बायोमेट्रिक अटेंडेंस की प्रतिलिपि के आधार पर ही वेतन भुगतान किया जाता है। इस कारण शिक्षकों में असंतोष और तनाव की स्थिति बनी हुई है।
बायोमेट्रिक डिवाइस की मांग और प्रस्ताव
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा राज्य में 32,582 नए फिंगरप्रिंट डिवाइस खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके लिए लगभग 16 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
संयुक्त शिक्षक मोर्चा का कहना है कि पहले से उपलब्ध उपकरणों में सुधार किए बिना नए उपकरण खरीदना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनका मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले आधार आधारित बायोमेट्रिक डिवाइस उपलब्ध कराए जाएं, ताकि सभी शिक्षक आसानी से अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकें।
नियमावली और न्यायालय के निर्देश
शिक्षकों ने यह भी मुद्दा उठाया है कि आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस नियमावली 2015 के अनुसार सभी सरकारी कर्मचारियों को समान सुविधा मिलनी चाहिए।
इसके बावजूद, शिक्षकों को अलग प्रणाली के तहत उपस्थिति दर्ज करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इस विषय पर उच्च न्यायालय में भी मामला दायर किया गया था, लेकिन इसके बावजूद विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
शिक्षकों पर मानसिक दबाव
ई-विद्यावाहिनी पोर्टल की खामियों का सीधा असर शिक्षकों के कार्य और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। बार-बार तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें विभागीय अधिकारियों के सामने जवाबदेही निभानी पड़ती है, जिससे तनाव बढ़ता है।
इसके अलावा, इस व्यवस्था के कारण शिक्षकों का ध्यान पढ़ाई से हटकर तकनीकी समस्याओं पर केंद्रित हो जाता है, जिसका असर छात्रों की शिक्षा गुणवत्ता पर भी पड़ता है।
आम लोगों और छात्रों के लिए प्रभाव
यह समस्या केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव छात्रों और पूरे शिक्षा तंत्र पर पड़ता है। जब शिक्षक तकनीकी समस्याओं में उलझे रहते हैं, तो उनका पूरा ध्यान पढ़ाई पर नहीं लग पाता।
इससे छात्रों की सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आती है। इसलिए यह जरूरी है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।
समाधान की दिशा: क्या होना चाहिए बदलाव
संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने सरकार से अपील की है कि उच्च गुणवत्ता वाले बायोमेट्रिक डिवाइस सभी विद्यालयों को उपलब्ध कराए जाएं।
इसके अलावा, ई-विद्यावाहिनी पोर्टल में मौजूद तकनीकी खामियों को दूर किया जाए और एक सरल एवं विश्वसनीय प्रणाली विकसित की जाए। यदि यह सुधार किए जाते हैं, तो शिक्षकों को राहत मिलेगी और शिक्षा व्यवस्था भी बेहतर होगी।
सुधार की आवश्यकता और भविष्य की उम्मीद
झारखंड में ई-विद्यावाहिनी पोर्टल की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि तकनीक का सही उपयोग तभी संभव है, जब उसे सही तरीके से लागू किया जाए।
यदि सरकार समय रहते इस समस्या का समाधान करती है, तो यह न केवल शिक्षकों के लिए बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए लाभकारी साबित होगा। एक मजबूत और प्रभावी डिजिटल प्रणाली ही भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बना सकती है।





