आज के समय में कब्ज की समस्या लगभग हर दूसरे व्यक्ति को परेशान कर रही है। बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और तनाव के कारण लोग जल्दी राहत पाने के लिए ईसबगोल को सबसे सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय मान लेते हैं। अक्सर लोग बिना किसी सलाह के इसे रोज़मर्रा की आदत बना लेते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार हर प्राकृतिक चीज़ हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होती। ईसबगोल भी एक औषधि है, कोई सामान्य आहार नहीं, और इसका गलत उपयोग फायदे की जगह नुकसान कर सकता है।
आयुर्वेद में ईसबगोल को कैसे देखा जाता है
आयुर्वेद ईसबगोल को केवल फाइबर नहीं बल्कि एक औषधीय द्रव्य मानता है। इसके दो प्रमुख गुण बताए गए हैं। पहला गुरु यानी भारी और दूसरा पिच्छिल यानी चिपचिपा। इसका कार्य आंतों में जाकर चिकनाई और भारीपन प्रदान करना है ताकि मल आसानी से बाहर निकल सके। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब किसी व्यक्ति की पाचन अग्नि कमजोर होती है। कमजोर पाचन में यह भारी और चिपचिपा पदार्थ पचने के बजाय आंतों में जमने लगता है और आम यानी टॉक्सिन्स पैदा करता है, जिससे कब्ज और ज्यादा बिगड़ सकती है।
मंद पाचन अग्नि वालों के लिए क्यों खतरनाक है ईसबगोल
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार गैस बनती है, भूख कम लगती है, थोड़ा खाने पर ही पेट भारी हो जाता है या खाना देर से पचता है, तो यह मंद अग्नि का संकेत है। आयुर्वेद कहता है कि मंद अग्नि में गुरु पदार्थ ज़हर की तरह काम करते हैं। ऐसे में ईसबगोल आंतों को साफ करने के बजाय उन्हें और ज्यादा जाम कर सकता है। कई बार ऐसे लोगों को ईसबगोल लेने के बाद पेट दर्द, सूजन और भारीपन की शिकायत बढ़ जाती है।
साम वात की स्थिति में ईसबगोल क्यों बिगाड़ सकता है कब्ज
अगर आपकी जीभ पर सफेद परत जमी रहती है, मुंह से बदबू आती है और मल चिपचिपा होता है, तो यह साम वात की स्थिति मानी जाती है। इसका मतलब शरीर में आम यानी विषैले तत्व जमा हो चुके हैं। ऐसी अवस्था में पिच्छिल यानी चिपचिपा ईसबगोल लेना ऐसा ही है जैसे पहले से भरी नाली में और कीचड़ डाल दिया जाए। इससे आंतों में ब्लॉकेज और ज्यादा बढ़ जाता है और कब्ज ठीक होने की बजाय और गंभीर हो सकती है।
आंतों में रुकावट या सूजन की हिस्ट्री वालों के लिए खतरा
जिन लोगों को पहले कभी आंतों में सिकुड़न, सूजन, पाइल्स, फिशर या किसी तरह की रुकावट की समस्या रही हो, उनके लिए ईसबगोल खतरनाक साबित हो सकता है। ईसबगोल पानी सोखकर फूलता है और अगर आंतों में पहले से रास्ता संकरा हो, तो यह स्थिति गंभीर दर्द और रुकावट का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर या वैद्य की सलाह के बिना ईसबगोल लेना बिल्कुल नहीं चाहिए।
बुजुर्गों और निगलने में दिक्कत वाले लोगों के लिए सावधानी
बुजुर्ग लोग या जिन्हें निगलने में परेशानी होती है, उन्हें ईसबगोल से खास सावधान रहना चाहिए। ईसबगोल गले में ही फूल सकता है और सांस की नली में फंसने का खतरा बन सकता है। कई मामलों में यह चोकिंग जैसी स्थिति भी पैदा कर सकता है, इसलिए इस वर्ग के लोगों के लिए यह सुरक्षित नहीं माना जाता।
ईसबगोल लेने का सही तरीका जो आयुर्वेद बताता है
अगर कोई व्यक्ति ईसबगोल ले रहा है, तो उसका अनुपान यानी साथ में लिया जाने वाला द्रव्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। आयुर्वेद में यह व्यक्ति की प्रकृति और कब्ज के प्रकार पर निर्भर करता है। सूखी और सख्त कब्ज में ईसबगोल को गर्म दूध या गर्म पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है ताकि आंतों में नमी आए। जिन लोगों को जलन या एसिडिटी के साथ कब्ज होती है, उनके लिए ठंडा दूध या गुलाब जल मिला पानी बेहतर माना जाता है। वहीं जिनका मल चिपचिपा है या वजन अधिक है, उन्हें दूध के साथ ईसबगोल लेने से बचना चाहिए क्योंकि यह कफ बढ़ा सकता है।
दस्त में ईसबगोल और कब्ज में दही क्यों वर्जित है
बहुत कम लोग जानते हैं कि ईसबगोल का उपयोग दस्त में भी किया जाता है, लेकिन वह दही के साथ दिया जाता है क्योंकि दही मल को बांधने का काम करता है। लेकिन यही संयोजन अगर कब्ज में किया जाए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए कब्ज वाले व्यक्ति को ईसबगोल कभी भी दही के साथ नहीं लेना चाहिए।
सबसे बड़ी गलती: ईसबगोल के बाद पानी न पीना
ईसबगोल जल-शोषक होता है यानी यह शरीर से पानी खींचता है। अगर इसे लेने के बाद पर्याप्त पानी नहीं पिया गया, तो यह आंतों की नमी सोख लेता है और मल को और ज्यादा सख्त बना देता है। आयुर्वेद इसे रुक्षता की स्थिति कहता है। यही वजह है कि कई लोगों की कब्ज ईसबगोल खाने के बाद और ज्यादा खराब हो जाती है। नियम यह है कि ईसबगोल लेने के तुरंत बाद कम से कम एक से दो गिलास पानी ज़रूर पिया जाए।
लंबे समय तक ईसबगोल लेने का छुपा हुआ नुकसान
ईसबगोल को रोज़ की आदत बना लेना सबसे बड़ी भूल मानी जाती है। लंबे समय तक इसके सेवन से आंतें सुस्त हो जाती हैं और अपने आप काम करना बंद कर देती हैं। फिर बिना ईसबगोल के मल त्याग संभव नहीं हो पाता। आयुर्वेद इसे निर्भरता की स्थिति मानता है, जो भविष्य में और बड़ी पाचन समस्याओं का कारण बन सकती है।
ईसबगोल का बेहतर आयुर्वेदिक विकल्प क्या है
अगर आपकी पाचन शक्ति कमजोर है, तो आयुर्वेद ईसबगोल की जगह त्रिफला चूर्ण या हरड़ को बेहतर विकल्प मानता है। त्रिफला केवल मल को बाहर नहीं निकालता बल्कि पाचन अग्नि को भी मजबूत करता है। इससे कब्ज जड़ से ठीक होने में मदद मिलती है, जबकि ईसबगोल केवल अस्थायी राहत देता है।
ईसबगोल दवा है, आदत नहीं
ईसबगोल अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसे बिना समझे रोज़मर्रा की आदत बना लेना नुकसानदायक हो सकता है। आयुर्वेद साफ कहता है कि हर औषधि व्यक्ति की प्रकृति और अवस्था देखकर ही लेनी चाहिए। अगर सही तरीके और सही व्यक्ति द्वारा लिया जाए तो ईसबगोल फायदेमंद हो सकता है, लेकिन गलत उपयोग से यह कब्ज को और गंभीर बना सकता है। इसलिए कब्ज की समस्या में स्थायी समाधान के लिए पाचन सुधारना सबसे जरूरी है।





