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06/05/2026 10:02 pm

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सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, हमारी प्राथमिकता: जिला शिक्षा अधीक्षक

रांची जिले में सरकारी विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता को लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना उनका सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। उनका मानना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र भी योग्य, प्रतिभाशाली और भविष्य गढ़ने में सक्षम हैं, और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार योजनाओं पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो जाए तो किसी भी बच्चे को दूसरे विकल्प की तलाश नहीं करनी पड़ेगी।

शिक्षक प्रतिनिधिमंडल से सार्थक और सकारात्मक चर्चा

झारखण्ड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल जिला शिक्षा अधीक्षक से मिलकर शिक्षा के वर्तमान स्वरूप, नई चुनौतियों एवं समाधान पर विस्तृत चर्चा की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश संयोजक विजय बहादुर सिंह तथा अमीन अहमद द्वारा किया गया। मुलाकात के दौरान स्कूलों में शिक्षकों की कमी, छात्र संख्या में वृद्धि और आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल रहे।

सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ना सफलता का प्रतीक

जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज ने बताया कि केवल रांची जिले में नए नामांकन में लगभग 25,000 बच्चों की वृद्धि दर्ज की गई है। यह संख्या किसी साधारण उपलब्धि का संकेत नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि सरकारी विद्यालयों में भरोसा बढ़ा है। यह परिणाम शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासनिक टीम की संयुक्त मेहनत और समर्पण का दर्पण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आने वाले समय में जिले के शैक्षणिक स्तर को मजबूत आधार देगी।

शिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा

जिला शिक्षा अधीक्षक ने प्रतिनिधिमंडल के सामने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी भूमिका स्वयं शिक्षकों की है। उन्होंने उनकी प्रतिबद्धता, परिश्रम और विद्यार्थियों के उत्थान हेतु किए गए प्रयासों के लिए विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता तभी बदलती है जब शिक्षक अपने दायित्व को सेवा भाव से निभाएँ।

झारखंड स्थापना दिवस—पहली बार स्कूल स्तर पर भव्य आयोजन

इस वर्ष झारखंड स्थापना दिवस की रजत जयंती पहली बार इतनी भव्यता के साथ स्कूल स्तर पर आयोजित की गई। रांची जिले के लगभग सभी विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड, प्रतियोगिताएँ एवं सम्मान समारोह आयोजित किए गए। इसकी सफलता पर शिक्षक मोर्चा ने भी जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया। यह आयोजन विद्यार्थियों में राज्य गौरव, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामूहिक एकता का संदेश लेकर सामने आया।

आगामी 8वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर रणनीति

बैठक के दौरान आगामी 8वीं बोर्ड परीक्षा में रांची जिले के बेहतर प्रदर्शन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। जिला शिक्षा अधीक्षक ने बताया कि इस वर्ष लक्ष्य है कि रांची जिला राज्य में सर्वोच्च अंक प्रतिशत हासिल करे। इसके लिए टीचिंग प्लान, विशेष कक्षाएँ, मूल्यांकन और मॉडल टेस्ट जैसी योजनाएँ लागू की जा रही हैं।

एकल शिक्षक विद्यालय—समस्या और समाधान

संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या अधिक है जबकि शिक्षकों की संख्या अत्यंत कम है। इस परिस्थिति में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मोर्चा ने मांग की कि ऐसे एकल शिक्षक विद्यालयों में तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति या स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए। जिला शिक्षा अधीक्षक ने इस पर सहमति जताते हुए आश्वासन दिया कि शिक्षक–छात्र अनुपात को संतुलित करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

उर्दू विद्यालयों की मांगों पर सकारात्मक रुख

प्रतिनिधिमंडल ने उर्दू माध्यम विद्यालयों हेतु एक दिन के स्थानीय अवकाश की पुनर्स्थापना का आग्रह किया। इस मांग को जिला शिक्षा अधीक्षक ने स्वीकार किया और जल्द ही इसे लागू करने का आश्वासन दिया। इससे उर्दू विद्यालयों में शिक्षा संचालन और सांस्कृतिक गतिविधियों में सामंजस्य और सहजता आएगी।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सहभागिता

बैठक में शामिल प्रमुख सदस्य थे—
विजय बहादुर सिंह, अमीन अहमद, सुमेश कुमार मिश्रा, अजय कुमार, मोहम्मद फखरुद्दीन, पंकज दुबे, राकेश श्रीवास्तव और ओमप्रकाश मिश्रा।
ये सभी वर्षों से शिक्षा सुधार आंदोलन से जुड़े हुए हैं और सतत रूप से स्कूल सिस्टम में सकारात्मक बदलाव हेतु प्रयासरत हैं।

सकारात्मक आश्वासन

यह बैठक न केवल चर्चा तक सीमित रही, बल्कि इसमें ठोस समाधान और सकारात्मक आश्वासन प्राप्त हुआ। आने वाले समय में इससे रांची जिले की शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने की उम्मीद है। सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना अब केवल सपना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और सामूहिक लक्ष्य बन चुका है।

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