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04/02/2026 10:44 am

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उच्च न्यायालय के निर्णय ने शिक्षकों में जगाई नई उम्मीद

झारखंड के शिक्षकों के लिए वर्षों से लंबित पड़े उत्क्रमित वेतनमान के मुद्दे पर आखिरकार राहत मिली है। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा शिक्षकों के पक्ष में दिया गया फैसला शिक्षकों की संघर्ष यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। इस निर्णय को लेकर राज्यभर के शिक्षकों में हर्ष की लहर देखी जा रही है। इसी संदर्भ में झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा की एक राज्य स्तरीय बैठक भारतीय मजदूर संघ के कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें शिक्षकों ने इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया।

बैठक में उत्साह का माहौल, नेताओं ने रखे अपने विचार

बैठक की अध्यक्षता महासंघ के प्रांत संयोजक आशुतोष कुमार ने की, जबकि संचालन मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद द्वारा किया गया। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और उच्च न्यायालय के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सभी सदस्यों ने इस निर्णय को लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का परिणाम बताते हुए कहा कि न्यायालय ने शिक्षकों की आवाज को सही मायनों में सुना है।

छठे वेतन आयोग की विसंगति से शुरू हुई थी समस्या

मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद ने बताया कि छठे वेतन आयोग में शिक्षकों के मूल कोटि वेतनमान 4500–7000 को उत्क्रमित कर 6500–10500 किया जाना था। लेकिन राज्य सरकार ने इस संशोधित वेतनमान का लाभ शिक्षकों को नहीं दिया। इस निर्णय ने हजारों शिक्षकों को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित किया। वर्ष 2014 में अधिसूचना संख्या 2891 के माध्यम से यह लाभ शिक्षकों को दिया गया, परंतु वित्त विभाग के पत्रांक 3251 दिनांक 11 सितंबर 2014 के द्वारा इस पर रोक लगा दी गई। इससे शिक्षकों में गहरी नाराजगी फैल गई और मामला न्यायालय पहुँच गया।

न्यायालय का आदेश और राहत की समयसीमा ने बढ़ाई उम्मीदें

हाल ही में उच्च न्यायालय ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य सरकार आठ सप्ताह के भीतर शिक्षकों का वेतन निर्धारण करे और अगले चार सप्ताह में बकाया भुगतान करे। अदालत के इस निर्देश से शिक्षकों में नई ऊर्जा और विश्वास पैदा हुआ है। मोर्चा ने निर्णय को “न्याय की स्पष्ट स्थापना” बताते हुए सरकार से आदेश का त्वरित पालन करने की अपील की है।

संघर्ष जारी रखने पर दिया गया जोर, एकता ही सबसे बड़ी शक्ति

मोर्चा के प्रदेश संयोजक विजय बहादुर सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि यह अधिकार शिक्षकों का है और इसे पाने के लिए सभी को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की एकता ही इस संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत है। यदि सभी मिलकर प्रयास करें, तो सरकार को आदेश तक सीमित न रखकर, इसे जमीन पर लागू करना होगा।

सरकारी अधिकारियों से मुलाकात कर रखी जाएगी मांग

बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि मोर्चा के सभी पदाधिकारी और सदस्य जल्द ही मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, वित्त सचिव सहित विभागीय मंत्रियों से मिलकर अपनी बात विस्तार से रखेंगे। उद्देश्य यह है कि उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन समय पर सुनिश्चित हो और किसी भी प्रकार की देरी न हो। मोर्चा ने इसे शिक्षकों के हित में एक गंभीर विषय बताते हुए कहा कि अब कोई भी बाधा स्वीकार्य नहीं होगी।

लोहरदगा इकाई को बधाई, संघर्ष के योगदान की सराहना

बैठक में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ लोहरदगा इकाई के प्रयासों की विशेष सराहना की गई। सदस्यों ने कहा कि उनके निरंतर संघर्ष, जन-जागृति अभियान और कानूनी प्रयासों के कारण ही यह मुद्दा सफलता की राह तक पहुँचा। मोर्चा ने उन्हें धन्यवाद देते हुए कहा कि यह जीत सामूहिक संघर्ष की जीत है।

बैठक में बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों के शिक्षक प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उपस्थित प्रमुख सदस्यों में अमीन अहमद, विजय बहादुर सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार दास, आशुतोष कुमार, मक़सूद जफर हादी, राकेश कुमार, अजय कुमार, एनामुल हक़, अरुण कुमार, पंकज कुमार, मोहम्मद फखरुद्दीन, राघवेंद्र कुमार सहित कई वरिष्ठ शिक्षक शामिल थे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि यह समय उत्साह का है लेकिन साथ ही तैयारी और सजगता का भी। आदेश का अनुपालन तभी संभव होगा जब संगठन मजबूत और सक्रिय रहे।

अधिकार और सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

उच्च न्यायालय का यह निर्णय झारखंड के शिक्षकों के लिए सम्मान और न्याय दोनों लेकर आया है। यह संघर्ष का पड़ाव नहीं, बल्कि आगे लड़ने की प्रेरणा है ताकि शिक्षकों को वह आर्थिक और सामाजिक मान्यता मिल सके जिसके वे हकदार हैं। संयुक्त शिक्षक मोर्चा के नेतृत्व में जारी यह अभियान आने वाले दिनों में शिक्षकों के हित में नए आयाम स्थापित कर सकता है।

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