आई ए जी ई एस 2026 के तहत 15 फरवरी को मुंबई के पवई में आयोजित हर्निया संबंधी प्रमुख वर्कशॉप और कॉन्फ्रेंस ने भारत को वैश्विक मेडिकल मानचित्र पर एक बार फिर मजबूत तरीके से स्थापित किया। यह कार्यक्रम हर्निया लेप्रोस्कोपी और रोबोटिक सर्जरी पर केंद्रित था, जिसमें आधुनिक तकनीक, सर्जिकल इनोवेशन और मरीजों की बेहतर रिकवरी पर गहन चर्चा हुई। इस कॉन्फ्रेंस में जापान, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भाग लिया, जिससे यह आयोजन एक अंतरराष्ट्रीय मंच में बदल गया। इस तरह के कार्यक्रम आम लोगों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनसे सर्जरी के नए तरीके विकसित होते हैं, जिससे इलाज ज्यादा सुरक्षित, कम दर्दनाक और जल्दी रिकवरी वाला बनता है।
बिहार के डॉक्टर गयासुद्दीन राई को मिला सम्मान
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिहार के मशहूर सर्जन डॉक्टर गयासुद्दीन राई की मौजूदगी खास आकर्षण का केंद्र रही। उन्हें मुंबई में सम्मानित किया गया, जो बिहार के मेडिकल समुदाय के लिए गर्व का क्षण है। डॉ. राई न सिर्फ एक कुशल सर्जन हैं बल्कि सामाजिक रूप से भी सक्रिय हैं और बिहार जमीयत राईन के बिहार सूबे के सदर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका सम्मान यह दर्शाता है कि बिहार के डॉक्टर भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। इससे युवाओं को प्रेरणा मिलती है कि छोटे शहरों से निकलकर भी मेडिकल क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

जमीयत राईन समुदाय की ओर से बधाइयों का सिलसिला
डॉ. गयासुद्दीन राई के सम्मानित होने पर बिहार जमीयत राईन के नेताओं और सदस्यों ने खुशी जाहिर की। मुंगेर से इरशाद अली राईन ने कहा कि डॉ. राई न केवल एक मशहूर डॉक्टर हैं बल्कि एक नेक इंसान भी हैं जो बिहार के लोगों की सेहत और तरक्की चाहते हैं। बिहार जमीयत के कोषाध्यक्ष राशिद राईन ने उम्मीद जताई कि वे बिहार को मेडिकल लाइन में नई दिशा देंगे। चीफ एडवाइजर रियाज राईन, हबीब राईन और पटना के रिटायर्ड डीआईजी अमजद अली ने भी बधाई देते हुए कहा कि ऐसे डॉक्टर समाज के लिए प्रेरणा होते हैं। इस तरह की सामाजिक सराहना से डॉक्टरों का मनोबल बढ़ता है और वे सेवा भावना के साथ काम करते हैं।
IGIMS पटना का एडवांस हर्निया फेलोशिप कोर्स
मुंबई सम्मेलन से पहले जनवरी 2026 में आईजीआईएमएस पटना में एडवांस लेप्रोस्कोपिक हर्निया फेलोशिप कोर्स आयोजित किया गया था, जो बिहार के स्वास्थ्य ढांचे के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। यह कार्यक्रम सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग द्वारा IAGES के सहयोग से आयोजित हुआ। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य ग्रामीण और परिधीय क्षेत्रों में सर्जिकल सुविधाओं को मजबूत करना था। जब स्थानीय डॉक्टर आधुनिक तकनीक सीखते हैं तो मरीजों को बड़े शहरों की ओर भागना नहीं पड़ता, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है।
आम लोगों के लिए हर्निया इलाज में क्या फायदा
हर्निया एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली बीमारी है, जिसमें शरीर के अंदर का हिस्सा मांसपेशियों की कमजोर दीवार से बाहर उभर आता है। पहले लोग सर्जरी से डरते थे क्योंकि इसमें बड़ा चीरा और लंबा आराम जरूरी होता था। लेकिन लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी ने तस्वीर बदल दी है। अब छोटे चीरे से ऑपरेशन होता है, दर्द कम होता है और मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य जीवन में लौट सकता है। मुंबई और पटना जैसे कार्यक्रमों का सीधा फायदा आम जनता को मिलता है क्योंकि डॉक्टर नई तकनीक सीखकर उसे अपने शहरों में लागू करते हैं।
लाइव सर्जिकल डेमो और आधुनिक प्रशिक्षण
फेलोशिप कार्यक्रम में अकादमिक सत्रों के साथ लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन भी शामिल थे। इससे डॉक्टरों को वास्तविक ऑपरेशन देखकर सीखने का मौका मिला। यह प्रशिक्षण सिर्फ तकनीकी नहीं था बल्कि मरीज की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर पर भी केंद्रित था। जब सर्जन बेहतर प्रशिक्षित होते हैं तो ऑपरेशन की सफलता दर बढ़ती है और जटिलताओं की संभावना कम होती है। इसका लाभ सीधे मरीजों को मिलता है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं।
बिहार में मेडिकल भविष्य की नई उम्मीद
डॉ. गयासुद्दीन राई जैसे डॉक्टरों की उपलब्धियां और IGIMS जैसे संस्थानों की पहल बिहार के मेडिकल भविष्य के लिए उम्मीद जगाती है। इससे राज्य में मेडिकल टूरिज्म, बेहतर अस्पताल सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ सकती है। अगर इसी तरह ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी रहा तो आने वाले वर्षों में बिहार हर्निया और मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का बड़ा केंद्र बन सकता है। आम जनता के लिए इसका मतलब है सस्ता, सुरक्षित और अपने राज्य में ही उच्च स्तरीय इलाज।





