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21/05/2026 9:59 pm

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जनगणना 2026 में शत-प्रतिशत शिक्षकों की ड्यूटी पर संयुक्त शिक्षक मोर्चा का विरोध

देश में जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य माना जाता है, जो सरकार की नीतियों, योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के निर्माण में आधार का कार्य करता है। राष्ट्रीय जनगणना 2026 को लेकर देशभर में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और विभिन्न राज्यों में कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। इसी क्रम में झारखंड सरकार द्वारा राज्य के सरकारी विद्यालयों के लगभग शत-प्रतिशत शिक्षकों को जनगणना कार्य में प्रतिनियोजित किए जाने का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। इस फैसले पर झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से पुनर्विचार की अपील की है। मोर्चा का मानना है कि शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के बीच संतुलन बनाए बिना लिया गया ऐसा निर्णय विद्यालयों की व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने जताई गंभीर आपत्ति

झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि राज्य के लगभग सभी शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाना व्यावहारिक नहीं है। मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद, विजय बहादुर सिंह और प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य में शिक्षकों की भागीदारी आवश्यक हो सकती है, लेकिन विद्यालयों को पूरी तरह खाली कर देना उचित नहीं कहा जा सकता। उनका कहना है कि कम से कम 25 प्रतिशत शिक्षकों को जनगणना कार्य से मुक्त रखा जाना चाहिए ताकि विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

संयुक्त शिक्षक मोर्चा का यह भी कहना है कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में शिक्षक विद्यालयों से बाहर चले जाएंगे तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और विद्यालयी गतिविधियों पर पड़ेगा।

शिक्षण कार्य के साथ रिपोर्टिंग और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी असर

सरकारी विद्यालयों में केवल पढ़ाई ही नहीं होती, बल्कि कई प्रशासनिक और रिपोर्टिंग कार्य भी नियमित रूप से किए जाते हैं। विद्यालयों में उपस्थिति, विभिन्न योजनाओं का संचालन, छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रक्रिया, मिड-डे मील की निगरानी और विभागीय रिपोर्टिंग जैसे अनेक कार्य शिक्षकों के जिम्मे होते हैं।

यदि अधिकांश शिक्षक जनगणना कार्य में व्यस्त हो जाएंगे तो विद्यालयों में इन कार्यों को संचालित करने में गंभीर कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। मोर्चा ने इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि कई विद्यालय ऐसे हैं जो केवल एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि उन शिक्षकों को भी जनगणना कार्य में लगा दिया जाएगा तो विद्यालय संचालन प्रभावित होना स्वाभाविक है।

गर्मी की छुट्टियों को लेकर शिक्षकों की बढ़ी चिंता

शिक्षक संगठनों ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा गर्मी की छुट्टियों से भी जोड़ा है। मोर्चा का कहना है कि शिक्षकों को मिलने वाली गर्मी की छुट्टियां सामान्य अवकाश नहीं होतीं, बल्कि यह उनके द्वारा अर्जित अवकाश का ही एक स्वरूप है। वर्षभर विद्यालयों में निरंतर कार्य करने के बाद शिक्षक इस अवधि का उपयोग व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए करते हैं।

इस दौरान कई शिक्षक अपने स्वास्थ्य संबंधी कार्य, पारिवारिक जिम्मेदारियां, बच्चों की पढ़ाई या अन्य जरूरी कार्य पूरे करते हैं। लेकिन जनगणना प्रशिक्षण और प्रतिनियुक्ति के कारण उनकी पूरी छुट्टी प्रभावित हो रही है। शिक्षकों का मानना है कि राष्ट्रीय कार्यों की जिम्मेदारी निभाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए समय और व्यवस्था का संतुलन भी आवश्यक है।

मूल विद्यालय से अत्यधिक दूरी पर प्रतिनियुक्ति बनी परेशानी

शिक्षकों द्वारा उठाई गई सबसे बड़ी व्यावहारिक समस्या प्रतिनियुक्ति के स्थान को लेकर सामने आई है। संयुक्त शिक्षक मोर्चा का कहना है कि कई शिक्षकों को उनके मूल विद्यालय से 50 से 60 किलोमीटर दूर क्षेत्रों में भेजा गया है। इससे आने-जाने में अत्यधिक समय और आर्थिक संसाधन खर्च हो रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाएं सीमित होती हैं और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचना आसान नहीं होता। ऐसे में शिक्षकों को प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है, जिससे उनके स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है। मोर्चा ने इसे एक अव्यावहारिक व्यवस्था बताते हुए कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर प्रतिनियुक्ति की जाती तो यह अधिक प्रभावी और सुविधाजनक साबित हो सकती थी।

बेरोजगार युवाओं और अन्य विभागों को भी अवसर देने की मांग

संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने सरकार के समक्ष एक वैकल्पिक सुझाव भी रखा है। मोर्चा का मानना है कि जनगणना जैसे बड़े कार्य में केवल शिक्षकों पर निर्भर रहने के बजाय अन्य विभागों, स्वयंसेवी संगठनों और राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी अवसर दिया जाना चाहिए।

मोर्चा ने कहा कि आउटसोर्सिंग मॉडल के आधार पर प्रशिक्षित युवाओं को इस कार्य में जोड़ा जा सकता है। इससे एक ओर जहां शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं होगा, वहीं दूसरी ओर राज्य के युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। इससे प्रशासनिक कार्यों का भार भी विभाजित किया जा सकेगा।

शिक्षा और राष्ट्रीय दायित्व के बीच संतुलन की जरूरत

यह सच है कि जनगणना देश के विकास की आधारभूत प्रक्रिया है और इसमें सभी विभागों का सहयोग आवश्यक होता है। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी एक व्यवस्था पर आवश्यकता से अधिक बोझ न डाला जाए। शिक्षा एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होने का असर सीधे बच्चों के भविष्य पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि शिक्षा और प्रशासनिक दायित्वों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। यदि जनगणना कार्य की योजना इस प्रकार बनाई जाए कि विद्यालयों का संचालन भी प्रभावित न हो और राष्ट्रीय कार्य भी समय पर पूरा हो, तो यह सभी पक्षों के लिए बेहतर होगा।

सरकार से समाधान और सुधार की उम्मीद

झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने विभागीय सचिव से आग्रह किया है कि प्रतिनियुक्ति से जुड़ी अनियमितताओं को दूर किया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे जनगणना कार्य भी त्रुटिरहित ढंग से संपन्न हो तथा विद्यालयों की गुणवत्ता भी बनी रहे। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मांग पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है।

यदि इस मामले में व्यावहारिक समाधान निकाला जाता है तो इससे न केवल शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था और जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यों के बीच बेहतर तालमेल भी स्थापित हो सकेगा।

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