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16/03/2026 12:57 am

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रांची में मानवता की मिसाल: दिव्यांग व निराश्रितों के लिए अन्नपूर्णा सेवा

समाज में जब स्वार्थ, भागदौड़ और उपेक्षा बढ़ती जा रही हो, ऐसे समय में मानव सेवा के कार्य आशा की किरण बनकर सामने आते हैं। रांची स्थित सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में किया गया अन्नपूर्णा सेवा का यह आयोजन केवल भोजन वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह उस संवेदना का प्रतीक है जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग—दिव्यांग, मंदबुद्धि और निराश्रित मानवों—के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराता है। 31 दिसंबर को आयोजित यह सेवा कार्यक्रम वर्ष के अंत में मानवता के प्रति समर्पण का एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।

सेवा का पावन केंद्र: मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम

परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के पावन सानिध्य में संचालित मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम, पुंदाग, बीते दो वर्षों से पीड़ित मानव सेवा का एक जीवंत तीर्थ स्थल बन चुका है। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित इस सेवाधाम में समाज के उपेक्षित वर्ग को न केवल आश्रय मिलता है, बल्कि उन्हें परिवार जैसा वातावरण, सम्मान और आत्मीयता भी प्राप्त होती है। यह स्थान उन लोगों के लिए आशा का घर है, जिन्हें जीवन ने सब कुछ छीन लिया।

42 दिव्यांग निराश्रित प्रभुजियों के लिए विशेष अन्नपूर्णा सेवा

31 दिसंबर को शोभा पोद्दार एवं उनके परिवार के सौजन्य से सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम, सत्य-प्रेम सभागार, रांची में रह रहे 42 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभुजियों तथा उनकी सेवा में लगे सेवादारों के लिए विधिवत अन्नपूर्णा सेवा का आयोजन किया गया। आश्रम के किचन में स्वयं भोजन बनवाकर श्रद्धा और सेवा भाव के साथ विभिन्न व्यंजनों की भोजन प्रसादी कराई गई। यह दृश्य केवल पेट भरने का नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का था।

26 दिनों में 5225 लोगों तक पहुँची सेवा की थाली

आश्रम के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 6 दिसंबर से 31 दिसंबर तक कुल 26 दिनों में 5225 निराश्रित प्रभुजियों और उनकी सेवा करने वाले सेवादारों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। यह आंकड़ा स्वयं में बताता है कि यह सेवा किसी एक दिन या औपचारिकता तक सीमित नहीं, बल्कि निरंतर समर्पण और संगठनात्मक प्रयास का परिणाम है।

सहयोग से साकार होती सेवा की भावना

इस पुनीत कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अनेक सेवा-भावी लोगों ने योगदान दिया। मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम और सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में अनिल सिन्हा, रिया पूजन, सुनील कुमार गुप्ता, रमेश वर्मा, स्नेहा श्रीवास्तव, खुशबू कुमारी, भास्कर भारती, मंजुला चौधरी, कमल खेतावत, सिमरन गुप्ता सहित अनेक दानदाताओं के सहयोग से निराश्रित प्रभुजियों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया। यह सामूहिक सहभागिता समाज में सेवा संस्कृति को मजबूत करती है।

निराश्रितों का आशीर्वाद ही सबसे बड़ा पुरस्कार

भोजन प्रसादी ग्रहण करने के बाद निराश्रित प्रभुजियों ने ट्रस्ट के सदस्यों और दानदाताओं को आशीर्वाद दिया। उनके चेहरे पर संतोष और अपनापन साफ झलक रहा था। यह आशीर्वाद किसी भी भौतिक पुरस्कार से कहीं अधिक मूल्यवान है, क्योंकि इसमें कृतज्ञता, विश्वास और मानवीय रिश्तों की गहराई समाहित होती है।

भोजन के साथ जरूरत की सामग्री का भी वितरण

प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि केवल भोजन ही नहीं, बल्कि कई सेवा-भावी लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितों, मंदबुद्धि एवं दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं भी प्रदान की गईं। यह दर्शाता है कि सेवा केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि निरंतर सहयोग की भावना है।

मानव प्रभु सेवा: सबसे बड़ा कर्म और धर्म

इस अवसर पर संजय सर्राफ ने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई कार्य नहीं है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि ऐसे सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लें और निराश्रितों के जीवन में थोड़ा सा सहारा बनें। उन्होंने यह भी कहा कि जब समाज का हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार सेवा करता है, तभी एक संवेदनशील और मजबूत समाज का निर्माण संभव होता है।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका

अन्नपूर्णा सेवा के इस आयोजन में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल सहित अनेक पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। उनकी सक्रिय भूमिका ने यह सिद्ध किया कि जब नेतृत्व स्वयं सेवा में आगे आता है, तो समाज भी प्रेरित होता है।

सेवा से ही सशक्त होगा समाज

सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में किया गया यह सेवा कार्य समाज के लिए एक संदेश है कि दिव्यांग, मंदबुद्धि और निराश्रित लोग भी हमारे अपने हैं। उन्हें सम्मान, भोजन और अपनापन देना ही सच्ची मानवता है। ऐसे आयोजन न केवल जरूरतमंदों को सहारा देते हैं, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

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