डायबिटीज़ सिर्फ एक बीमारी नहीं बल्कि लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है, और इसकी असली दवा दवाई से ज्यादा सही खाना है। आम लोग अक्सर समझते हैं कि शुगर कंट्रोल का मतलब सिर्फ मीठा बंद करना है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं बड़ी है। जो भी खाना हम रोज खाते हैं वह शरीर में जाकर ग्लूकोज़ बनता है, और अगर यह ग्लूकोज़ बार-बार ज्यादा बनता रहे तो इंसुलिन सिस्टम थक जाता है। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट डिजीज, किडनी फेलियर और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनती है। इसलिए डायबिटिक डाइट का मकसद सिर्फ शुगर कम करना नहीं बल्कि पूरे शरीर की रक्षा करना है।
खाना असल में बनता किससे है और शुगर कैसे बढ़ती है
हर खाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट से बना होता है। इनमें सबसे ज्यादा असर कार्बोहाइड्रेट का पड़ता है क्योंकि यही सीधे ग्लूकोज़ में बदलता है। गेहूं, चावल, दाल, फल, दूध, आलू, यहां तक कि हेल्दी समझी जाने वाली कई चीज़ें भी कार्ब से भरी होती हैं। जब कोई डायबिटिक व्यक्ति बिना सोचे-समझे ज्यादा कार्ब खाता है तो उसका ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है। यही कारण है कि डायबिटीज़ कंट्रोल का पहला नियम है कार्बोहाइड्रेट पर कंट्रोल। इसका मतलब खाना बंद करना नहीं बल्कि समझदारी से चुनना है ताकि शरीर को ऊर्जा मिले लेकिन शुगर का झटका न लगे।
प्रोटीन का रोल: पेट भरे, शुगर स्थिर रखे
प्रोटीन शरीर की मरम्मत और मजबूती के लिए जरूरी है और डायबिटिक मरीज के लिए यह एक सुरक्षा कवच जैसा काम करता है। सही मात्रा में प्रोटीन लेने से भूख कम लगती है, वजन नियंत्रित रहता है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। पनीर, अंडा, चिकन, मछली और अच्छी क्वालिटी का सोयाबीन बेहतरीन विकल्प हैं। एक सामान्य नियम है कि हर किलो वजन पर लगभग एक ग्राम प्रोटीन लिया जाए, हालांकि जिन लोगों को किडनी की समस्या है उन्हें डॉक्टर की सलाह से मात्रा तय करनी चाहिए। जब डाइट में प्रोटीन संतुलित रहता है तो कार्ब की जरूरत खुद कम हो जाती है।
फैट से डरना नहीं, सही फैट चुनना सीखिए
सालों से लोगों के मन में यह डर बैठा दिया गया कि घी और तेल खाने से हार्ट अटैक होता है, जबकि असली समस्या रिफाइंड और प्रोसेस्ड फैट है। पारंपरिक फैट जैसे घी, मक्खन, सरसों तेल, नारियल तेल और तिल का तेल शरीर के लिए ऊर्जा का स्थिर स्रोत हैं और ब्लड शुगर नहीं बढ़ाते। जब पेट हेल्दी फैट से भरा रहता है तो बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग रुकती है। पुराने समय में लोग प्राकृतिक फैट खाते थे और मेटाबॉलिक बीमारियां कम थीं। असली नुकसान पैकेज्ड फूड और रिफाइंड तेल ने पहुंचाया है, इसलिए फैट छोड़ना नहीं बल्कि सही फैट अपनाना जरूरी है।
ड्राय फ्रूट्स और बीज: डायबिटीज़ के साइलेंट हीरो
ड्राय फ्रूट्स और बीज छोटे दिखते हैं लेकिन पोषण के मामले में बहुत ताकतवर हैं। अखरोट, बादाम, काजू और मूंगफली शरीर को हेल्दी फैट, फाइबर और मिनरल देते हैं जो शुगर को स्थिर रखते हैं। अक्सर कहा जाता है कि काजू शुगर बढ़ाता है, जबकि असल में इसमें कार्ब बहुत कम होता है। अलसी, चिया सीड्स और कद्दू के बीज पाचन सुधारते हैं, कब्ज रोकते हैं और हार्ट को मजबूत बनाते हैं। रोज थोड़ी मात्रा में इनका सेवन डायबिटिक व्यक्ति की डाइट को संतुलित बनाता है और बार-बार भूख से बचाता है।
लो कार्ब आटा: रोज़ की रोटी का स्मार्ट विकल्प
डायबिटीज़ में सबसे मुश्किल काम रोटी कम करना होता है क्योंकि भारतीय भोजन का आधार ही अनाज है। इसका समाधान है लो कार्ब आटा। जब गेहूं या ज्वार के आटे में मूंगफली और नारियल पाउडर मिलाया जाता है तो रोटी का ग्लाइसेमिक असर कम हो जाता है। ऐसी रोटी धीरे पचती है, पेट भरा रखती है और शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाती। यह बदलाव छोटा लगता है लेकिन रोज के भोजन में बड़ा असर डालता है। कई लोग सिर्फ आटा बदलकर ही शुगर कंट्रोल में बड़ा सुधार देखते हैं।
कितना कार्ब खाना चाहिए और दिन की शुरुआत कैसे करें
आज ज्यादातर लोग जरूरत से दोगुना कार्ब खाते हैं, जबकि शरीर को सीमित मात्रा की ही जरूरत होती है। लगभग 130 ग्राम कार्ब रोज काफी है जिसमें से अनाज का हिस्सा कम होना चाहिए। दिन की शुरुआत बिना चीनी की चाय या कॉफी, फुल क्रीम दूध, ड्राय फ्रूट्स और प्रोटीन से करने पर दिनभर भूख संतुलित रहती है। जब सुबह पेट फैट और प्रोटीन से भरता है तो शरीर बार-बार कार्ब नहीं मांगता और शुगर स्थिर रहती है।
क्या बिल्कुल नहीं खाना चाहिए और टाइमिंग क्यों जरूरी है
डायबिटीज़ में सबसे ज्यादा नुकसान पैकेज्ड फूड, बिस्किट, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक, जूस और रिफाइंड तेल करते हैं। ये चीज़ें लिवर में फैट जमा करती हैं, सूजन बढ़ाती हैं और हार्ट व किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती हैं। खाने की टाइमिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बार-बार खाने से इंसुलिन लगातार बढ़ा रहता है जिससे शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ती है। सीमित बार खाना शरीर को आराम देता है और मेटाबॉलिज्म को स्थिर करता है।
फल जरूरी हैं या नहीं: सच जानिए
फल हेल्दी जरूर हैं लेकिन डायबिटिक मरीज के लिए सीमित मात्रा में। पूरे फल खाना ठीक है लेकिन जूस खतरनाक है क्योंकि उसमें फाइबर हट जाता है और शुगर तेजी से बढ़ती है। असल पोषण सब्ज़ियों से भी मिल सकता है, इसलिए फल अनिवार्य नहीं बल्कि विकल्प हैं। समझदारी यही है कि मात्रा नियंत्रित रखी जाए।
डायबिटिक डाइट का असली फॉर्मूला
डायबिटीज़ मैनेजमेंट का असली मंत्र है कार्ब कम, प्रोटीन संतुलित, फैट से डर नहीं, प्राकृतिक खाना और कम बार खाना। यह कोई फैशन डाइट नहीं बल्कि शरीर के विज्ञान पर आधारित तरीका है। जब इंसुलिन पर दबाव कम होता है तो वजन घटता है, शुगर स्थिर रहती है और हार्ट, किडनी, लिवर लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। सही डाइट दवा की जरूरत भी कम कर सकती है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाती है। यही लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का असली रास्ता है।





