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01/04/2026 1:36 am

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लोहरदगा में ईद मिलन तकरीब का आयोजन: सौहार्द और शिक्षा सुधार पर जोर

झारखंड के लोहरदगा जिले में आयोजित ईद मिलन तकरीब इस वर्ष सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और शिक्षा सुधार के संदेश के साथ एक प्रेरणादायक आयोजन बनकर सामने आया। झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आए शिक्षक, समाजसेवी और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज में एकता, सहिष्णुता और आपसी सहयोग की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी बना।

आयोजन की भव्यता और अतिथियों का स्वागत

कार्यक्रम की अध्यक्षता जनाब एनामुल हक ने की, जबकि मंच संचालन जनाब अली रजा द्वारा किया गया। इस अवसर पर सभी अतिथियों का स्वागत पारंपरिक तरीके से रुमाल, टोपी और माला पहनाकर किया गया, जो ईद की सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है।

इस सम्मान से सभी अतिथिगण अभिभूत नजर आए और उन्होंने इस आयोजन को इंसानियत और भाईचारे का प्रतीक बताया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

अमीन अहमद का संबोधन: शिक्षा और समाज पर चिंता

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमीन अहमद ने अपने संबोधन में राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हजारों शिक्षकों की नियुक्ति के बावजूद राज्य में लगभग 7000 विद्यालय अभी भी एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के मानकों के विपरीत है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब बुनियादी ढांचे की यह स्थिति है, तो नई शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को कैसे पूरा किया जा सकता है। उनका यह बयान शिक्षा प्रणाली की वास्तविक चुनौतियों को उजागर करता है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे महत्वपूर्ण सवाल

विशिष्ट अतिथि विजय बहादुर सिंह ने शिक्षकों की सेवा शर्तों और उनके अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रोन्नति, वेतनमान, स्थानांतरण और पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव शिक्षा के प्रति विभाग की उदासीनता को दर्शाता है।

इसके साथ ही बायोमेट्रिक उपस्थिति के लिए उचित उपकरणों की कमी भी एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आई, जिससे शिक्षकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

एकजुटता का संदेश: शिक्षकों को संगठित होने की जरूरत

प्रदेश संयोजक आशुतोष कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यदि शिक्षकों को अपने अधिकार और छात्रों के हित में काम करना है, तो उन्हें एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन तभी सार्थक होंगे, जब इनके माध्यम से समाज और शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया जाए।

गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की आवश्यकता

प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शिक्षकों की प्रतिबद्धता पूरी तरह से मौजूद है, लेकिन इसके लिए सरकार और विभाग का सहयोग जरूरी है।

उन्होंने यह भी बताया कि कई विद्यालयों में न्यूनतम संसाधनों की कमी है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना कठिन हो जाता है। यह स्थिति शिक्षा सुधार की दिशा में गंभीर सोच की मांग करती है।

समाज और शिक्षा में संतुलन की आवश्यकता

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एनामुल हक ने समाज में इंसानियत और भाईचारे का संदेश फैलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में सुधार करके ही भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाया जा सकता है।

यह विचार इस बात को दर्शाता है कि सामाजिक और शैक्षणिक विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और दोनों में संतुलन बनाना आवश्यक है।

धन्यवाद और सौहार्दपूर्ण माहौल

कार्यक्रम के अंत में उर्दू शिक्षक संघ के जिला सचिव तौहीद आलम ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इसके बाद सभी लोगों ने सामूहिक रूप से भोजन का आनंद लिया, जो इस आयोजन के सौहार्दपूर्ण माहौल को और भी मजबूत करता है।

यह समापन इस बात का प्रतीक था कि ऐसे आयोजन लोगों को एक साथ लाने और समाज में सकारात्मक संबंध बनाने का कार्य करते हैं।

एकता, शिक्षा और समाज का संगम

लोहरदगा में आयोजित यह ईद मिलन तकरीब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज और शिक्षा के बीच संबंध को मजबूत करने का एक प्रयास भी था।

इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि अगर समाज के सभी वर्ग मिलकर काम करें, तो न केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है, बल्कि एक मजबूत और एकजुट समाज का निर्माण भी किया जा सकता है।

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