रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री कृष्णा में सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय श्रीमद् भागवत कृष्ण कथा का शुभारंभ अत्यंत भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। कथा के प्रथम दिन मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और उत्साह से सराबोर नजर आया। सुबह से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया था और पूरा परिसर हरि नाम संकीर्तन तथा जयकारों से गूंज उठा।
मंगलाचरण के साथ कथा का विधिवत शुभारंभ
इस पावन अवसर पर विख्यात भागवत कथावाचक श्री श्री 108 परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज ने श्रीमद् भागवत महापुराण का मंगलाचरण कर कथा का विधिवत शुभारंभ किया। जैसे ही महाराज श्री ने श्लोक उच्चारण और वाणी के माध्यम से भागवत का आह्वान किया, पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। श्रद्धालु एकाग्रचित्त होकर कथा श्रवण में लीन हो गए और मन, वचन व कर्म से भगवान श्रीकृष्ण के स्मरण में डूब गए।
भागवत कथा का मानव जीवन में महत्व
प्रथम दिवस की कथा में महाराज श्री ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। उन्होंने सरल और सरस भाषा में समझाया कि भागवत कथा व्यक्ति के भीतर ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का संतुलन स्थापित करती है और जीवन के कष्टों से उबरने की शक्ति प्रदान करती है।
गोकर्ण कथा से भागवत श्रवण की महिमा
कथा के प्रारंभिक प्रसंग में गोकर्ण की कथा का विस्तृत वर्णन किया गया, जिसके माध्यम से भागवत श्रवण के महात्म्य को सहज रूप में समझाया गया। महाराज श्री ने बताया कि जब मनुष्य श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत कथा का श्रवण करता है, तो उसके जीवन के समस्त पाप, दुख और भ्रम धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। यह प्रसंग श्रद्धालुओं के हृदय को भीतर तक स्पर्श कर गया।
विदुर प्रसंग से प्रेम और भक्ति का संदेश
कथा क्रम में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा विदुर जी के घर पधारने का प्रसंग सुनाया गया, जिसने भक्तों को भावविभोर कर दिया। महाराज श्री ने इस प्रसंग के माध्यम से बताया कि भगवान वैभव, ऐश्वर्य या भोग के नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम और निष्कलुष भक्ति के भूखे होते हैं। विदुर की सादगी और प्रेम ने यह सिद्ध कर दिया कि ईश्वर को पाने के लिए केवल सच्चा हृदय पर्याप्त है।
ध्रुव और प्रह्लाद की कथाओं से अटूट श्रद्धा का संदेश
प्रथम दिवस की कथा में ध्रुव प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने तपस्या, धैर्य और लक्ष्य के प्रति अडिग रहने का महत्व बताया। इसके पश्चात प्रह्लाद जी की कथा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विपरीत परिस्थितियों में भी यदि भक्ति और विश्वास अडिग हो, तो स्वयं भगवान अपने भक्त की रक्षा करते हैं। इन प्रसंगों ने श्रोताओं को आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास से भर दिया।
गंगा अवतरण और श्रीराम चरित्र का आदर्श
कथा के दौरान गंगा अवतरण की दिव्य कथा के साथ-साथ भगवान श्रीराम के चरित्र और आदर्श जीवन मूल्यों पर भी प्रकाश डाला गया। महाराज श्री ने बताया कि श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग और कर्तव्य का जीवंत उदाहरण है, जिसे अपनाकर आज का मानव भी अपने जीवन को संतुलित और सफल बना सकता है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में उमड़ा उल्लास
जैसे ही कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आया और “नंद घर आनंद भयो” की भावधारा बही, पूरा मंदिर परिसर भजनों और जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भावावेश में झूम उठे और वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया। महाराज श्री द्वारा प्रस्तुत भजन और वाणी चर्चा ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और हर चेहरे पर भक्ति की चमक दिखाई देने लगी।
भव्य सजावट और विधिवत पूजा-अर्चना
इस अवसर पर मंदिर को अत्यंत भव्य और आकर्षक ढंग से सजाया गया था। विधिवत पूजा-अर्चना पुजारी अरविंद पांडे द्वारा संपन्न हुई, जबकि आज के मुख्य यजमान विशाल अग्रवाल सपत्नीक रहे। कथा उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें सभी भक्तों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।
गणमान्य लोगों की उपस्थिति से बढ़ी शोभा
इस आयोजन में क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति, श्रद्धालु एवं भक्तजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि गुरूजी द्वारा आगामी दो दिनों में भी श्रीमद् भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का रसपान भक्तों को कराया जाएगा, जिससे यह आध्यात्मिक यात्रा और भी दिव्य एवं प्रेरणादायक बनेगी।






