सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का नाम भारत के महान टेस्ट क्रिकेटर सैयद मुश्ताक अली के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को शुरुआती दौर में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। यह टूर्नामेंट पहली बार 2006–07 में शुरू हुआ और धीरे-धीरे भारतीय घरेलू क्रिकेट का सबसे प्रतिस्पर्धी T20 टूर्नामेंट बन गया। आज यह प्रतियोगिता उन खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच है जो सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं और आगे चलकर आईपीएल या भारतीय टीम तक पहुँचने का सपना देखते हैं।
भारतीय घरेलू T20 क्रिकेट की रीढ़
Syed Mushtaq Ali Trophy भारत में घरेलू स्तर पर खेला जाने वाला प्रमुख T20 क्रिकेट टूर्नामेंट है, जिसे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI आयोजित करता है। हर वर्ष इसमें देश के लगभग सभी राज्यों और क्षेत्रीय टीमों की भागीदारी होती है। रणजी ट्रॉफी में खेलने वाले खिलाड़ी इस टूर्नामेंट के माध्यम से अपनी T20 क्षमताओं को साबित करते हैं। यही कारण है कि इसे भारतीय T20 क्रिकेट की रीढ़ कहा जाता है, क्योंकि यहीं से भविष्य के कई अंतरराष्ट्रीय सितारे निकलते हैं।
2025–26: आयोजन और भागीदारी
2025–26 का Syed Mushtaq Ali Trophy 26 नवंबर 2025 से 18 दिसंबर 2025 तक आयोजित हुआ। इस सीज़न में कुल 38 टीमों ने हिस्सा लिया, जिससे यह टूर्नामेंट भारत के सबसे बड़े घरेलू क्रिकेट आयोजनों में शामिल हो गया। देश के विभिन्न हिस्सों में खेले गए मुकाबलों ने यह साबित किया कि भारत में क्रिकेट सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे राज्यों और उभरते क्रिकेट केंद्रों में भी जबरदस्त प्रतिभा मौजूद है।
फाइनल मुकाबला: झारखंड बनाम हरियाणा
2025–26 के Syed Mushtaq Ali Trophy का फाइनल मुकाबला झारखंड और हरियाणा के बीच खेला गया। दोनों ही टीमें शानदार फॉर्म में थीं, लेकिन झारखंड ने दबाव के क्षणों में बेहतर खेल दिखाते हुए हरियाणा को 69 रनों से पराजित कर दिया। यह जीत झारखंड क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि यह राज्य का इस टूर्नामेंट में पहला खिताब था।
ईशान किशन का ऐतिहासिक शतक
फाइनल का सबसे यादगार और निर्णायक पल झारखंड के कप्तान ईशान किशन का विस्फोटक शतक रहा। उन्होंने मात्र 49 गेंदों में 101 रन बनाकर न सिर्फ टीम को विशाल स्कोर तक पहुँचाया, बल्कि विपक्षी टीम पर मानसिक दबाव भी बना दिया। यह पारी तकनीक, आक्रामकता और आत्मविश्वास का अद्भुत संगम थी। यह प्रदर्शन ईशान किशन के लिए भी बेहद अहम माना गया, क्योंकि इससे उनके आत्मविश्वास और भारतीय टीम में वापसी की उम्मीदों को नई ऊर्जा मिली।
पुणे का फाइनल और दर्शकों का जोश
यह ऐतिहासिक फाइनल पुणे के महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला गया। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के लिए यह मुकाबला किसी उत्सव से कम नहीं था। झारखंड की जीत के बाद मैदान तालियों और जयकारों से गूंज उठा। सोशल मीडिया पर भी झारखंड टीम और ईशान किशन की जमकर तारीफ हुई, जिससे यह साफ हो गया कि घरेलू क्रिकेट भी देशभर में जबरदस्त भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है।

श्रीराम पुरी की भूमिका: पर्दे के पीछे की असली ताक़त
इस ऐतिहासिक जीत के पीछे सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि टीम मैनेजमेंट की भूमिका भी बेहद अहम रही। झारखंड टीम के एडमिन मैनेजर के रूप में श्रीराम पुरी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे जेएससीए के बोर्ड मेंबर होने के बावजूद इस भूमिका को बिना किसी आर्थिक लाभ के स्वीकार किया, क्योंकि नियमों के अनुसार बोर्ड मेंबर को एडमिन मैनेजर बनने पर कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता। इसके बावजूद उन्होंने इस जिम्मेदारी को सेवा भाव से निभाया।

आस्था और विश्वास का संयोग
एडमिन मैनेजर बनने के बाद श्रीराम पुरी तिरुपति बालाजी के दर्शन के लिए गए और झारखंड की जीत तथा ईशान किशन की भारतीय टीम में वापसी की कामना की। दिलचस्प बात यह रही कि उनकी दोनों मनोकामनाएँ पूरी हुईं। झारखंड ने ट्रॉफी जीती और ईशान किशन का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। खेल और आस्था का यह संयोग कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गया।

26 सदस्यीय टीमवर्क का कमाल
झारखंड की इस सफलता में पूरी 26 सदस्यीय टीम का योगदान रहा। खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम ने दिन-रात मेहनत कर टीम को इस मुकाम तक पहुँचाया। यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और अनुशासन का परिणाम थी। आज इस जीत को देखकर हर झारखंडवासी गर्व महसूस करता है।

जेएससीए पदाधिकारियों और दर्शकों का समर्थन
फाइनल के दिन टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए जेएससीए के सचिव सौरभ तिवारी, सह सचिव शहबाज़ नदीम और बोर्ड के अन्य सदस्य पुणे स्टेडियम में मौजूद रहे। इसके अलावा श्रीराम पुरी के प्रयास से पुणे में रह रहे बिहार और झारखंड के लगभग दो हजार बच्चों को स्टेडियम बुलाया गया। इन बच्चों की मौजूदगी और उत्साह ने खिलाड़ियों को अतिरिक्त ऊर्जा दी।

टूर्नामेंट का प्रारूप और प्रतिस्पर्धा
यह टूर्नामेंट चार Elite समूहों और एक Plate समूह में खेला गया। हर टीम ने ग्रुप चरण में अपने मुकाबले खेले और शीर्ष टीमों ने सुपर लीग में जगह बनाई। यह प्रारूप न केवल प्रतिस्पर्धा को संतुलित बनाता है, बल्कि खिलाड़ियों को लगातार प्रदर्शन करने का अवसर भी देता है। चयनकर्ताओं के लिए यह मंच खिलाड़ियों की वास्तविक क्षमता को परखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
भारतीय T20 क्रिकेट का भविष्य
Syed Mushtaq Ali Trophy 2025–26 यह साबित करता है कि यह टूर्नामेंट सिर्फ एक घरेलू प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय T20 क्रिकेट की आधारशिला है। जो खिलाड़ी यहाँ चमकता है, वह अक्सर जल्द ही आईपीएल और फिर राष्ट्रीय टीम तक पहुँचता है। झारखंड की जीत और ईशान किशन का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण हैं कि भारतीय घरेलू क्रिकेट का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।
देश को मिलते हैं नए सितारे
Syed Mushtaq Ali Trophy 2025–26 झारखंड की ऐतिहासिक जीत, ईशान किशन की कप्तानी और शतक, तथा मजबूत टीमवर्क के कारण हमेशा याद किया जाएगा। यह टूर्नामेंट भारतीय क्रिकेट की गहराई, प्रतिभा और संभावनाओं को दर्शाता है। आने वाले वर्षों में यह मंच और भी नए सितारे देश को देगा।






