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13/02/2026 3:52 am

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यूरिन में प्रोटीन लीकेज क्यों होता है? कारण, इलाज और समाधान

यूरिन में प्रोटीन आना सुनते ही ज़्यादातर लोग डर जाते हैं क्योंकि इसे सीधे किडनी फेल होने से जोड़ दिया जाता है, जबकि सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। किडनी रोज़ाना खून को फ़िल्टर करती है और इस प्रक्रिया में बहुत थोड़ी मात्रा में प्रोटीन यूरिन के रास्ते निकलना सामान्य है। सामान्य व्यक्ति में लगभग 150 मिलीग्राम तक प्रोटीन निकल सकता है और अगर किसी दिन आपने ज़्यादा एक्सरसाइज़ की हो, बुखार रहा हो या शरीर में अस्थायी तनाव रहा हो तो यह मात्रा कुछ समय के लिए बढ़ भी सकती है। समस्या तब मानी जाती है जब लगातार कई महीनों तक प्रोटीन 200 मिलीग्राम से अधिक आता रहे, जिसे मेडिकल भाषा में प्रोटीन यूरिया कहा जाता है। इसलिए हर रिपोर्ट देखकर घबराना नहीं चाहिए बल्कि ट्रेंड देखना ज़रूरी है कि यह लगातार बना हुआ है या अस्थायी है।

प्रोटीन यूरिया कब बीमारी का संकेत बनता है

जब यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बार-बार जाँच में बढ़ी हुई मिले और तीन महीने या उससे अधिक समय तक बनी रहे, तब यह संकेत हो सकता है कि किडनी के फ़िल्टर यानी ग्लोमेरुलस पर दबाव है। 200 से 1000 मिलीग्राम के बीच का लीकेज अक्सर शुरुआती स्तर माना जाता है और इसे डाइट, जीवनशैली और दवाइयों से नियंत्रित किया जा सकता है। अगर मात्रा 1 ग्राम से ऊपर पहुँच जाए तो डॉक्टर दवाइयों और गहन जाँच की सलाह देते हैं क्योंकि यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किसी विशेष किडनी बीमारी का संकेत हो सकता है। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जितनी जल्दी कारण पकड़ लिया जाए, उतना आसान इलाज होता है।

डाइट का किडनी पर सीधा असर

किडनी की सेहत पर सबसे तेज़ असर खाने का पड़ता है। नमक की अधिक मात्रा किडनी के फ़िल्टर पर दबाव बढ़ाती है और इससे प्रोटीन लीकेज भी बढ़ सकता है। रोज़ाना नमक को लगभग आधा चम्मच से कम रखना कई मरीजों में सुधार दिखाता है। हाई फैट डेयरी जैसे मलाई, घी और क्रीम सूजन को बढ़ा सकते हैं, इसलिए दूध को उबालकर मलाई हटाकर इस्तेमाल करना बेहतर है। जिन लोगों में प्रोटीन लीकेज ज्यादा है उन्हें बहुत भारी और कठिन पचने वाला प्रोटीन जैसे रेड मीट सीमित करना चाहिए और हल्का प्लांट बेस्ड प्रोटीन लेना चाहिए। मूंग दाल, हल्की सब्ज़ियाँ और संतुलित भोजन किडनी पर बोझ कम रखते हैं।

सूजन और प्रोटीन लीकेज का संबंध

क्रॉनिक किडनी समस्या में शरीर के अंदर हल्की लेकिन लगातार सूजन बनी रहती है। यही सूजन धीरे-धीरे फ़िल्टर को कमजोर करती है। ऐसी चीज़ें जो सूजन कम करती हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से प्रोटीन लीकेज भी घटाती हैं। ताज़ी सब्ज़ियाँ, फल, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन किडनी कोशिकाओं की रक्षा करते हैं। फर्मेंटेड फूड जैसे इडली, डोसा, दही और कांजी आंतों की सेहत सुधारते हैं और आधुनिक रिसर्च के अनुसार गट हेल्थ बेहतर होने से पूरे शरीर की सूजन घटती है, जिसका असर किडनी पर भी सकारात्मक पड़ता है।

डायबिटीज और ब्लड प्रेशर का नियंत्रण क्यों ज़रूरी है

सबसे अधिक मामलों में प्रोटीन लीकेज का कारण डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर होता है। अगर ब्लड शुगर लगातार बढ़ी रहे तो किडनी के फ़िल्टर धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं। इसी तरह अनियंत्रित बीपी किडनी की नाजुक नसों पर दबाव डालता है। जब शुगर और बीपी को लक्ष्य सीमा में रखा जाता है तो कई मरीजों में प्रोटीन लीकेज अपने आप कम होने लगता है। इसलिए इलाज का पहला कदम हमेशा शुगर और बीपी कंट्रोल होता है, न कि सिर्फ़ किडनी की दवा।

आधुनिक दवाइयाँ कैसे मदद करती हैं

आज की मेडिकल साइंस में ऐसी दवाइयाँ मौजूद हैं जो सीधे किडनी के अंदर दबाव कम करती हैं। ACE inhibitors और ARB दवाइयाँ ग्लोमेरुलस पर प्रेशर घटाती हैं जिससे लीकेज कम होता है। SGLT-2 inhibitors शुरू में डायबिटीज की दवाइयाँ थीं, लेकिन बाद में पाया गया कि ये किडनी को भी सुरक्षा देती हैं, इसलिए कई बार बिना डायबिटीज वाले मरीजों को भी दी जाती हैं। GLP-1 agonists सूजन कम करने और मेटाबॉलिक सुधार में मदद करते हैं। इन सभी दवाइयों का इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी में ही होना चाहिए क्योंकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है।

आयुर्वेदिक नजरिए से प्रोटीन लीकेज

आयुर्वेद में इस स्थिति को मूत्रवह स्रोतस की कमजोरी और वात-पित्त असंतुलन से जोड़ा जाता है। जब वात बढ़ता है तो शरीर में सूक्ष्म छिद्र ढीले पड़ने लगते हैं और जरूरी धातुएँ भी बाहर निकल सकती हैं। पित्त की अधिक गर्मी सूजन और जलन पैदा करती है जो लीकेज को और बढ़ा सकती है। इसलिए आयुर्वेद का लक्ष्य सिर्फ़ लक्षण दबाना नहीं बल्कि स्रोतस को मजबूत करना, सूजन कम करना और दोषों का संतुलन बनाना है। हल्का, सुपाच्य भोजन, गुनगुना पानी, आंवला और मूंग आधारित डाइट इस सिद्धांत से मेल खाती है।

उपयोगी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

पुनर्नवा को आयुर्वेद में किडनी टॉनिक माना जाता है क्योंकि यह सूजन कम करती है और मूत्रवह स्रोतस को मजबूत करती है। गोक्षुर किडनी टिश्यू को सपोर्ट करता है और बिना नुकसान पहुँचाए मूत्र प्रवाह को संतुलित करता है। वरुण सूजन और माइक्रो-ब्लॉकेज कम करने में सहायक माना गया है। आंवला शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो कोशिकाओं को बचाता है। ये सभी सपोर्टिव थेरेपी हैं और इन्हें आधुनिक इलाज के साथ संतुलित रूप से लेना चाहिए, न कि दवाइयों के विकल्प के रूप में।

घरेलू दिनचर्या जो फर्क डालती है

बहुत ठंडा या बहुत गर्म पानी किडनी पर तनाव डाल सकता है, इसलिए गुनगुना पानी बेहतर है। धनिया पानी और हल्की मूंग दाल का सूप सूजन कम करने में मददगार माना जाता है। देर रात जागना, भूख-प्यास रोकना और अनियमित दिनचर्या वात को बढ़ाते हैं जो लीकेज को खराब कर सकता है। पर्याप्त नींद, हल्की वॉक और तनाव नियंत्रण भी किडनी हेल्थ का हिस्सा हैं।

Take Home Message

हर प्रोटीन लीकेज खतरनाक नहीं होता, लेकिन लगातार बना रहना चेतावनी ज़रूर है। सही समय पर जाँच, डाइट कंट्रोल, शुगर और बीपी का संतुलन, आधुनिक दवाइयाँ और आयुर्वेदिक सपोर्ट मिलकर बेहतरीन परिणाम दे सकते हैं। डरने की बजाय समझदारी से कदम उठाना सबसे बड़ा इलाज है। किडनी बहुत सहनशील अंग है, अगर हम समय रहते उसका साथ दें तो वह लंबे समय तक हमारा साथ देती है। डॉक्टर से सलाह जरूर लें. 

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