एक पिता का सबसे स्याह दिन और देश का गहरा शोक
71 वर्षीय बिहार के लाल और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल अपने जीवन के सबसे बड़े निजी दुख से गुजर रहे हैं। उन्होंने इस क्षण को अपने जीवन का सबसे स्याह दिन बताया, जब उनका इकलौता बेटा इस दुनिया से असमय चला गया। 49 वर्षीय अग्निवेश अग्रवाल, जो वेदांता ग्रुप के वारिस और तलवंडी साबो पावर के चेयरमैन थे, एक दुखद स्कीइंग हादसे का शिकार हो गए। अमेरिका में डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी, जिसके बाद पूरे उद्योग जगत और समाज में शोक की लहर दौड़ गई।
हादसे के बाद उठा बड़ा सवाल
अग्निवेश अग्रवाल के निधन के बाद एक सवाल बार-बार सामने आ रहा है कि आखिर स्कीइंग इतना खतरनाक खेल क्यों माना जाता है। यह खेल बाहर से जितना रोमांचक और आकर्षक दिखता है, अंदर से उतना ही जानलेवा भी हो सकता है। बर्फ से ढकी ढलानों पर तेज रफ्तार से फिसलना देखने में भले ही साहसिक लगे, लेकिन इसमें छिपे खतरे अक्सर जानलेवा साबित होते हैं। यही कारण है कि दुनिया भर में स्कीइंग से जुड़े हादसे समय-समय पर सुर्खियां बनते रहे हैं।
स्कीइंग क्या है और क्यों खींचता है लोगों को
स्कीइंग एक विंटर स्पोर्ट्स है, जो बर्फ से ढकी पहाड़ी ढलानों पर खेला जाता है। खिलाड़ी लकड़ी, प्लास्टिक या धातु से बने लंबे और चपटे बोर्ड्स, जिन्हें स्की कहा जाता है, उन पर खड़े होकर ढलान से नीचे फिसलता है। इस खेल में रोमांच, गति और प्रकृति के करीब होने का अनुभव लोगों को आकर्षित करता है। यही रोमांच कई बार खिलाड़ियों को जोखिम की सीमा पार करने के लिए भी उकसाता है, जो घातक साबित हो सकता है।
मशहूर हस्तियां भी नहीं बच पाईं इस खतरे से
स्कीइंग के खतरों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह खेल कई मशहूर हस्तियों की जान ले चुका है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे माइकल केनेडी, अभिनेत्री नताशा रिचर्डसन और फ्रांस के प्रसिद्ध अभिनेता गैस्पर्ड उलिच भी स्कीइंग के दौरान हुए हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रमंडल कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार 2012 से 2016 के बीच यूरोपीय स्की रिसॉर्ट्स में स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग के दौरान दर्जनों लोगों की मौत हुई, जिससे इस खेल की गंभीरता समझी जा सकती है।
अत्यधिक गति बन जाती है मौत की वजह
स्कीइंग के दौरान सबसे बड़ा खतरा अत्यधिक गति का होता है। पहाड़ी ढलानों से नीचे उतरते समय स्कीयर की रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ जाती है। बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और अनुभव के इस गति को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में स्कीयर की स्पीड 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाती है, जबकि पेशेवर खिलाड़ी इससे भी कहीं अधिक गति से फिसलते हैं। इस रफ्तार पर नियंत्रण खोना किसी तेज रफ्तार कार दुर्घटना जैसा प्रभाव डाल सकता है, जिसमें शरीर को गंभीर आंतरिक चोट लगने की आशंका रहती है।
उबड़-खाबड़ ढलान छिपा देती है खतरा
पहाड़ी इलाकों की ढलान कभी एक जैसी नहीं होती। कहीं बर्फ ज्यादा जमी होती है तो कहीं पिघली हुई रहती है, और कई बार चट्टानें बर्फ के नीचे छिपी होती हैं। स्कीइंग करते समय खिलाड़ी को हर पल ढलान और गहराई का सही अंदाजा नहीं लग पाता। तेज रफ्तार में किसी छिपी हुई चट्टान या गड्ढे से टकराना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे टकराव में हेलमेट भी कई बार सिर को बचाने में नाकाम साबित होता है।
हिमस्खलन बन सकता है सबसे बड़ा जानलेवा खतरा
स्कीइंग के दौरान हिमस्खलन यानी एवलांच का खतरा सबसे भयावह माना जाता है। कई बार खिलाड़ी की हल्की सी मूवमेंट या वजन से बर्फ की ऊपरी परत खिसक जाती है और देखते ही देखते बर्फ का पहाड़ नीचे आ गिरता है। ऐसे मामलों में स्कीयर बर्फ के नीचे दब जाता है, जहां दम घुटने और समय पर मदद न मिलने से मौत की आशंका बहुत ज्यादा होती है। दुनिया के कई स्की रिसॉर्ट्स में इस तरह के हादसे दर्ज किए जा चुके हैं।
घुटनों और जोड़ों पर पड़ता है भारी दबाव
स्कीइंग के दौरान पैरों को स्की बोर्ड से मजबूती से बांधा जाता है। गिरने की स्थिति में यदि बोर्ड समय पर नहीं खुलता, तो पूरा झटका घुटनों और जोड़ों पर पड़ता है। इससे लिगामेंट फटने, फ्रैक्चर होने और स्थायी चोट का खतरा रहता है। कई स्कीयर इस तरह की चोटों के बाद जीवन भर ठीक से चलने-फिरने में परेशानी झेलते हैं।
ऊंचाई और बदलता मौसम भी बढ़ाता है जोखिम
स्कीइंग आमतौर पर बहुत अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में की जाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी से एल्टीट्यूड सिकनेस हो सकती है। इससे चक्कर आना, शरीर का संतुलन बिगड़ना और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसके अलावा पहाड़ों का मौसम बेहद अनिश्चित होता है। अचानक बर्फीली हवाएं, तूफान या अत्यधिक ठंड हाइपोथर्मिया का कारण बन सकती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा हो सकता है।
स्कीइंग इंजरी और मेडिकल रिस्क
हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार स्कीइंग हादसों में ब्रेन इंजरी, घुटनों के फ्रैक्चर और लिगामेंट डैमेज के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। कंधे और रीढ़ की हड्डी की चोटें भी आम हैं। ऐसे इलाकों में तुरंत मेडिकल सहायता मिल पाना हमेशा संभव नहीं होता, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। यही कारण है कि स्कीइंग को दुनिया के सबसे खतरनाक खेलों में गिना जाता है।
रोमांच के साथ सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
स्कीइंग पूरी तरह से खतरनाक नहीं है, लेकिन इसमें जोखिम बेहद ज्यादा है। सही प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और मौसम की सटीक जानकारी के बिना यह खेल जानलेवा साबित हो सकता है। अग्निवेश अग्रवाल की दुखद मृत्यु ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि रोमांच के साथ सावधानी न बरती जाए, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है।






