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11/02/2026 4:19 am

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“योग सिर्फ प्रैक्टिस नहीं, मेडिसिन है” — PM मोदी के संदेश से नई उम्मीद

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने WHO ट्रेडिशनल मेडिसिन समिट में कहा कि “योग सिर्फ प्रैक्टिस नहीं, बल्कि मेडिसिन है”, तो यह सिर्फ एक भाषण की पंक्ति नहीं थी बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सोच में बदलाव का संकेत था। दुनिया आज लाइफस्टाइल डिजीज के बोझ से जूझ रही है। डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और डिप्रेशन तेजी से बढ़ रहे हैं। आधुनिक दवाएं इलाज देती हैं, लेकिन जड़ तक पहुंचने का काम योग करता है। योग शरीर और मन दोनों को संतुलित करता है, और यही संतुलन बीमारी से बचाव की असली कुंजी है। यह संदेश इसलिए चर्चा में है क्योंकि लोग अब इलाज से ज्यादा रोकथाम की तरफ ध्यान दे रहे हैं।

लाइफस्टाइल डिजीज: आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती

आज की जीवनशैली ने शरीर को मशीन बना दिया है लेकिन देखभाल भूल गई है। घंटों बैठना, तनाव, जंक फूड और नींद की कमी ने मेटाबॉलिज्म बिगाड़ दिया है। यही वजह है कि कम उम्र में ही लोग डायबिटीज़ और मोटापे से जूझ रहे हैं। योग इस चक्र को तोड़ता है। नियमित आसन और प्राणायाम इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारते हैं, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं और हार्मोन संतुलित करते हैं। कई रिसर्च बताती हैं कि योग करने वालों में ब्लड शुगर और BP नियंत्रित रहने की संभावना ज्यादा होती है। यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को सक्रिय करने की प्रक्रिया है।

मेंटल हेल्थ में योग की वैज्ञानिक भूमिका

मेंटल हेल्थ आज उतनी ही बड़ी समस्या है जितनी शारीरिक बीमारी। चिंता, तनाव और अवसाद धीरे-धीरे जीवन की गुणवत्ता को खत्म कर देते हैं। योग का सबसे बड़ा प्रभाव नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। जब व्यक्ति गहरी सांस लेता है और ध्यान करता है, तो शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड से बाहर निकलकर रिलैक्सेशन मोड में आता है। इससे कॉर्टिसोल कम होता है और दिमाग शांत होता है। यही कारण है कि डॉक्टर भी अब योग और मेडिटेशन को थेरेपी के रूप में सुझा रहे हैं। योग मानसिक स्थिरता देता है, और स्थिर मन ही स्वस्थ शरीर की नींव है।

योग: दवा नहीं, जीवन जीने की पद्धति

योग को सिर्फ एक्सरसाइज समझना उसकी सीमित समझ है। योग असल में जीवन जीने की कला है। इसमें भोजन, नींद, सांस, सोच और व्यवहार सब शामिल हैं। जब व्यक्ति योग को रोजमर्रा की आदत बना लेता है, तो उसका शरीर खुद बीमारी से लड़ने लगता है। यह दवा लेने से अलग है क्योंकि योग साइड इफेक्ट नहीं देता, बल्कि शरीर को मजबूत बनाता है। इसलिए इसे मेडिसिन कहना गलत नहीं बल्कि आधुनिक विज्ञान के अनुरूप है। यह एक प्रिवेंटिव मेडिसिन है, जो बीमारी आने से पहले ही रक्षा करती है।

भारत की परंपरा से वैश्विक स्वास्थ्य मॉडल तक

योग हजारों साल पुरानी भारतीय परंपरा है, लेकिन आज यह ग्लोबल हेल्थ मॉडल बन चुका है। इंटरनेशनल योग दिवस ने इसे दुनिया के हर कोने तक पहुंचाया है। WHO जैसे संगठन अब पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने की बात कर रहे हैं। यह भारत के लिए गर्व की बात है कि उसकी सांस्कृतिक विरासत वैश्विक समाधान बन रही है। योग किसी धर्म से जुड़ा नहीं बल्कि मानव शरीर की जरूरत से जुड़ा विज्ञान है।

आम लोगों के लिए योग क्यों जरूरी है

योग सिर्फ साधु-संतों के लिए नहीं बल्कि हर उम्र के व्यक्ति के लिए है। ऑफिस में बैठने वाला कर्मचारी, पढ़ाई का तनाव झेल रहा छात्र, घर संभाल रही महिला या बुजुर्ग — सबके लिए योग उपयोगी है। रोज़ सिर्फ 20–30 मिनट योग करने से ऊर्जा बढ़ती है, नींद बेहतर होती है और मूड स्थिर रहता है। यह महंगी दवा से ज्यादा सस्ता और प्रभावी उपाय है। योग व्यक्ति को अपने शरीर से जोड़ता है और यही जागरूकता बीमारी से बचाव करती है।

योग का भविष्य: हेल्थ सिस्टम में नई दिशा

आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी। दुनिया अब इंटीग्रेटिव मेडिसिन की ओर बढ़ रही है जहां आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक पद्धतियां साथ काम करेंगी। योग इस मॉडल का केंद्र बन सकता है। अगर स्कूलों, ऑफिसों और समुदायों में योग को नियमित बनाया जाए, तो बीमारी का बोझ कम हो सकता है। यह सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा है।

संतुलन ही असली दवा है

PM मोदी का संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य दवा से नहीं, संतुलन से आता है। योग शरीर, मन और सांस को एक लय में लाता है। यही लय जीवन को स्वस्थ बनाती है। जब व्यक्ति रोज़ कुछ मिनट योग को देता है, तो वह सिर्फ एक्सरसाइज नहीं कर रहा होता बल्कि अपने भविष्य में निवेश कर रहा होता है। योग सच में मेडिसिन है क्योंकि यह हमें बीमारी से पहले ही स्वस्थ बनाता है।

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