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04/02/2026 3:28 pm

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40 की उम्र के बाद सेहत बनाए रखने के लिए 8 असरदार टिप्स

जब जीवन का चालीसवाँ पड़ाव आता है, शरीर में धीरे-धीरे बदलाव शुरू हो जाते हैं। मेटाबॉलिज्म (पाचन क्रिया की गति) धीमी होती है, अंगों पर ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है, साथ ही मानसिक तनाव, नींद की कमी या हार्मोनल परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ गहरी छाप छोड़ सकती हैं। इस अवस्था में अगर हम अपने रोज़मर्रा की आदतों, खानपान और मानसिक दृष्टिकोण में सुधार करें, तो हम न सिर्फ बीमारियों को रोक सकते हैं, बल्कि एक सक्रिय, प्रसन्न और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। नीचे दिए गए आठ सुझाव इस दिशा में बड़ी मदद कर सकते हैं।

1. मानसिक स्वास्थ्य — संतुलन बनाये रखें

चालीस की उम्र के बाद छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, चिंता तथा तनाव बढ़ना स्वाभाविक हो सकता है। इसके लिए योग, हल्की प्रतिदिन की व्यायाम (जैसे पैदल चलना, ताड़ासन, सूर्य नमस्कार), ध्यान (मेडिटेशन) और संगीत जैसे सुखद गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना ज़रूरी है। इन गतिविधियों से न केवल मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि हार्मोन संतुलन भी बेहतर रहता है। साथ ही, वह काम करें जिसमें आपका मन लगे — चाहे पेंटिंग हो, बागवानी हो या थोड़ा-बहुत लेखन. ऐसी हाबी तय करें जो आपको खुशी दे और दिमाग को ताज़ा रखे।

2. पोषक तत्वों की पूर्ति — विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट

बढ़ती उम्र के साथ विटामिन B, D, कैल्शियम, आयरन, ज़िंक, सेलेनियम जैसे पोषक तत्वों की कमी आम हो सकती है। इसके बदले, अपने भोजन में उन सब्जियों, फल, अनाज, नट्स, बीज और हुडीयुक्त पदार्थों को शामिल करें जो इन पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हों। जैसे कि हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, हरी सरसों आदि), गाजर, शिमला मिर्च, मौसमी फल, दाल-चने, मूँग, राजमा आदि। इसके अलावा, रंगीन सब्जियाँ (बैंगन, शकरकंद, लाल शिमला मिर्च) एंटीऑक्सीडेंट गुणों को बढ़ाती हैं। दैनिक आहार में विविधता रखें ताकि शरीर को हर प्रकार के पोषक तत्व मिल सकें।

3. आहार का संयम — संतुलन बनाए रखें

इस उम्र में अंगों और मांसपेशियों पर काम अधिक होता है क्योंकि समय के साथ विघटन और पुनर्निर्माण की गति धीमी हो जाती है। इसलिए, भोजन में संतुलन रखना अनिवार्य हो जाता है — ओवर ईटिंग से बचें, सर्विंग साइज नियंत्रित करें। प्रोटीन (दाल, पनीर, अंडे, दही, मूंगफली आदि), फाइबर (साबुत अनाज, सब्जियाँ, फल), स्वस्थ वसा (ओमेगा-3 और ओमेगा-6 स्रोत) को उचित अनुपात में शामिल करें। भोजन के बीच-बीच में हल्के नाश्ते जैसे मेवों, फल, दही आदि लेना बेहतर है ताकि रक्त शर्करा स्थिर रहे और अंगों पर दबाव न बढ़े।

4. तेल, मसाले और पाचन को संतुलित रखें

बढ़ती उम्र के अनुसार भोजन में अत्यधिक तेल व भारी मसालों का सेवन कम कर देना चाहिए। यह न सिर्फ पाचन प्रणाली को राहत देता है बल्कि लिवर, गुर्दे और आंतों पर दबाव को भी घटाता है। जब भी संभव हो, हल्का खाना बनाएं — भाप, उबाल, हल्की सब्जी तैयार करने की पद्धति अपनाएं। घी / तेल का प्रयोग सीमित मात्रा में करें और हृदय-हित (Heart-healthy) तेल जैसे ऑलिव ऑयल, मूंगफली का तेल, अलसी तेल आदि चुनें। मसाले भी चुनिंदा मात्रा में उपयोग करें ताकि भोजन स्वादिष्ट और पाचन अनुकूल हो।

5. एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार

चालीस के बाद शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ता है — यानी की कोशिकाओं पर नुकसान पहुँचाने वाले “मुक्त कण” अधिक सक्रिय होते हैं। ऐसे में एंटीऑक्सीडेंट (प्रतिआक्रामकों) से युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बेहद ज़रूरी हो जाता है। इसके लिए हरी सब्जियाँ (ब्रोकली, हरी बीन्स, पालक), रंगीन फल (नारंगी, बेरी, अंगूर, सेब), वेजिटेबल जूस (कम नमक व शुगर वाला), सलाद (मिक्स वेज), ग्रीन टी (अप्रकाशित पत्ती) आदि शामिल करें। ये पदार्थ न केवल शरीर को शुद्ध रखते हैं बल्कि तंत्रिका स्वास्थ्य, हृदय स्वास्थ्य और त्वचा स्वास्थ्य में भी सहायक होते हैं।

6. गुस्सा, चिंता और संतुलित श्रम 

इस उम्र में अगर अत्यधिक गुस्सा, चिंता या तनाव हो जाएँ, तो इससे शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है — ब्लड प्रेशर, हृदय संबंधी रोग, पाचन समस्या आदि बढ़ सकते हैं। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना ज़रूरी है। प्रतिदिन हल्की फुर्तीली गतिविधि करें — पैदल जाना, हल्की योग मुद्रा, स्ट्रेचिंग आदि। लेकिन अत्यधिक परिश्रम करने से बचें — अधिक वजन उठाना, निरंतर कठोर काम आदि से मांसपेशियों व जोड़ों पर दबाव बढ़ सकता है। कार्य–आराम का संतुलन बनाए रखें.

7. साबुत अनाज और फलों को प्राथमिकता दें

सफेद चावल, मैदा आधारित उत्पाद जितना हो सके कम करें। इसके बजाय साबुत अनाज (गेहूँ, ज्वार, बाजरा, दलिया, ब्राउन राइस आदि) को अपने भोजन में शामिल करें। ये धीरे पचने वाले कार्बोहाइड्रेट हैं, जिनसे ऊर्जा स्थिर रहती है और ग्लूकोज नियंत्रण भी बेहतर रहता है। फलों का भरपूर सेवन करें — जैसे सेब, पपीता, आम, निम्बू, अनार आदि — जो फाइबर, विटामिन व आवश्यक खनिज देते हैं। फल व अनाज मिलाकर यदि नाश्ता तैयार करें — जैसे ओट्स + फल, मिक्स फ्रूट सलाद आदि — तो बेहतर पोषण मिलेगा।

8. ओमेगा-3 / ओमेगा-6

चालीस के बाद कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स आदि का स्तर बढ़ने का ख़तरा अधिक हो जाता है। इसलिए, अपने भोजन में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड वाले स्रोतों को शामिल करना ज़रूरी है। इसके लिए विकल्प हैं — अलसी (flaxseed), चिया बीज, तिल, मूंगफली, अखरोट, सूरजमुखी बीज आदि। साथ ही खाना बनाते समय हृदय-हित तेल (जैसे ओलिव ऑयल, मूंगफली तेल) का उपयोग करें। इन वसायुक्त स्रोतों से न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में मदद मिल सकती है, बल्कि दिमागी कार्यक्षमता और याददाश्त पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

एक नई शुरुआत

चालीस की उम्र एक नई शुरुआत की तरह होती है — न कि गिरावट की। यदि हम अपने जीवनशैली, खपत और मानसिक दृष्टिकोण में थोड़ी सी सजगता दिखाएँ, तो हम आने वाले दशक को भी ऊर्जावान और स्वस्थ बना सकते हैं। ऊपर दिए गए आठ सुझावों को धीरे-धीरे अपने दैनिक जीवन में लागू करें — शुरुआत छोटी शुरुआत करें और क्रमशः उन्हें बढ़ाएँ।
प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है — यदि आप किसी पुरानी बीमारी, दवाई सेवन या अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हों, तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर्स या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह अवश्य लें।

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