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04/02/2026 5:51 pm

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दिवाली पर सूरन (जिमीकंद) खाने की परंपरा- सेहत का खजाना

भारत में हर त्यौहार के पीछे केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कारण ही नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक आधार भी छिपा होता है। दिवाली के दिन सूरन या जिमीकंद की सब्जी खाने की परंपरा भी ऐसी ही एक मिसाल है। खासतौर पर उत्तर भारत में दीपावली के दिन या उसके आस-पास सूरन की सब्जी बनाना शुभ और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। आज जब विज्ञान हर बात को प्रमाणित कर रहा है, तब यह परंपरा और भी महत्वपूर्ण लगती है क्योंकि सूरन न केवल पाचन तंत्र को मजबूत करता है बल्कि शरीर को महीनों तक ऊर्जा से भर देता है।

1. सूरन (जिमीकंद) क्या है और क्यों खास है

सूरन जिसे अंग्रेज़ी में Elephant Foot Yam कहा जाता है, एक भूमिगत सब्जी है जो मिट्टी में उगती है। भारत में इसे जिमीकंद, ओल, कांद जैसे कई नामों से जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें मौजूद पोषक तत्व कई आधुनिक सप्लीमेंट्स को मात दे सकते हैं। देशी सूरन का उपयोग प्राचीन काल से आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता रहा है। यह सब्जी सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि शरीर की कई गुप्त बीमारियों से बचाने में मदद करती है।

2. दिवाली पर सूरन खाने की वैज्ञानिक वजह

दिवाली के समय मौसम बदलता है — वर्षा और शरद ऋतु के बीच संक्रमण काल होता है। इस मौसम में शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, और संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। सूरन में फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स भरपूर होते हैं जो शरीर में संतुलन बनाए रखते हैं। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, एक बार सूरन खाने से शरीर में कई महीनों तक फॉस्फोरस की कमी नहीं होती। यह खून को शुद्ध करने, पाचन सुधारने और इम्यून सिस्टम मजबूत करने में मदद करता है।

3. सूरन और फॉस्फोरस का चमत्कारी संबंध

फॉस्फोरस हमारे शरीर की ऊर्जा प्रणाली का एक अहम हिस्सा है। यह हड्डियों को मजबूत करता है, दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाता है और थकान से बचाता है। मेडिकल साइंस अब यह मान चुका है कि सूरन एक नेचुरल फॉस्फोरस सप्लीमेंट की तरह काम करता है। खास बात यह है कि इसमें मौजूद तत्व शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित (absorb) हो जाते हैं, जिससे इसकी उपयोगिता कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि दिवाली पर इसे खाने की परंपरा को हमारे पूर्वजों ने बनाया — ताकि सर्दियों में शरीर मजबूत और ऊर्जावान बना रहे।

4. सूरन के आयुर्वेदिक लाभ

आयुर्वेद में सूरन को “सुरण कंद” कहा गया है, जो वात और कफ दोष को संतुलित करता है। यह कब्ज, गैस, बवासीर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाव करता है।
यह शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों (toxins) को निकालता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है। सूरन के नियमित सेवन से त्वचा में निखार आता है, जोड़ों का दर्द कम होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

5. कैंसर और पाचन रोगों से बचाव में सूरन की भूमिका

सूरन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व जैसे फेनोलिक कम्पाउंड्स और फ्लेवोनॉइड्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। यह तत्व कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में मदद करते हैं। वहीं इसका फाइबर पाचन क्रिया को संतुलित रखता है और कब्ज जैसी समस्या को दूर करता है। यही कारण है कि ग्रामीण भारत में इसे ‘देह की सफाई करने वाली सब्जी’ कहा जाता है।

6. दिवाली पर सूरन खाने का सामाजिक और धार्मिक महत्व

भारतीय परंपराओं में हर रीत-रिवाज के पीछे गहरा संदेश होता है। दिवाली के दिन सूरन खाने की परंपरा यह सिखाती है कि उत्सव केवल मिठाइयों या पटाखों का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और संतुलन का भी समय है। जब सर्दी शुरू होने से पहले शरीर को पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है, तब सूरन जैसी सब्जी हमारी थाली में शामिल की जाती है। यह परंपरा समाज को ‘स्वास्थ्य ही धन है’ का संदेश देती है।

7. सूरन खाने के कुछ जरूरी सावधानियां

हालांकि सूरन अत्यधिक फायदेमंद है, लेकिन इसे कच्चा नहीं खाना चाहिए। कच्चे सूरन में कैल्शियम ऑक्सलेट नामक तत्व होता है जो गले में जलन कर सकता है। इसे हमेशा अच्छी तरह पकाकर या तलकर खाना चाहिए। देशी सूरन, हाईब्रिड की तुलना में ज्यादा लाभदायक होता है। इसके साथ नींबू या इमली डालने से इसका स्वाद और पाचन दोनों में सुधार होता है।

8. हमारे पूर्वजों की वैज्ञानिक दृष्टि

हमारे पूर्वजों ने विज्ञान को धर्म और संस्कृति के माध्यम से समाज तक पहुंचाया। सूरन खाने की यह परंपरा इसका सजीव उदाहरण है। जब आज की साइंस इस सब्जी के लाभों को स्वीकार कर रही है, तब यह साफ हो जाता है कि भारतीय परंपराएं केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि गहन वैज्ञानिक समझ पर आधारित हैं।

परंपरा में छिपा विज्ञान, सेहत का खजाना सूरन

दिवाली पर सूरन खाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से एक अद्भुत उपाय है। यह सब्जी शरीर को पोषण देती है, रोगों से रक्षा करती है और आने वाले ठंडे मौसम में शरीर को मजबूत बनाती है। इसलिए इस दिवाली जब आप दीप जलाएं, तो अपने थाली में सूरन की सब्जी जरूर रखें — क्योंकि यही है “परंपरा में विज्ञान” का सुंदर उदाहरण।

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