Explore

Search

04/02/2026 11:07 am

[the_ad id="14531"]
लेटेस्ट न्यूज़
[the_ad_group id="32"]

ज्वार की रोटी: डायबिटीज और मोटापे में फायदेमंद

भारत में पारंपरिक खानपान में मोटे अनाजों का विशेष स्थान रहा है। इन्हीं में से एक है ज्वार — जिसे कई जगह बाजरा या मक्का परिवार का अनाज माना जाता है। जहाँ सर्दियों में बाजरा शरीर को गर्मी देने के लिए उपयुक्त माना जाता है, वहीं ज्वार को गर्मियों का सुपरफूड कहा गया है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में ज्वार की रोटी घर-घर में बनाई जाती है। यह सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि शरीर को हल्का, ठंडक देने वाला और ऊर्जावान बनाए रखने वाला भोजन है।

ज्वार का वैज्ञानिक और पोषणीय महत्व

ज्वार में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, और विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स पाया जाता है। इसमें ग्लूटेन नहीं होता, इसलिए यह सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए उत्तम विकल्प है। इसके अलावा, ज्वार का लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जिससे यह धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करता है और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है।

डायबिटीज और मोटापे में फायदेमंद

आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती डायबिटीज और मोटापा एक गंभीर समस्या बन चुकी है। ज्वार में मौजूद कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता। यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी सुधारता है।
इसके फाइबर की मात्रा वजन नियंत्रित करने में मदद करती है क्योंकि यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और अनावश्यक भूख को कम करती है। इस कारण से ज्वार की रोटी मोटापे और डायबिटीज दोनों के लिए एक प्राकृतिक इलाज के समान है।

हृदय और कोलेस्ट्रॉल के लिए रामबाण

ज्वार में फाइटोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बनाए रखते हैं। यह हृदय की धमनियों में जमी वसा को घटाकर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है।
नियमित रूप से ज्वार की रोटी खाने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और हृदय रोगों का खतरा घटता है।

पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है

ज्वार में मौजूद फाइबर आँतों की सफाई करता है और कब्ज की समस्या को खत्म करता है। यह पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है और एसिडिटी व गैस की समस्या को दूर करता है।
आयुर्वेद के अनुसार, ज्वार त्रिदोषनाशक अनाज है यानी यह शरीर के वात, पित्त और कफ — तीनों दोषों को संतुलित रखता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर में ठंडक बनाए रखता है।

त्वचा और बालों के लिए उपयोगी

ज्वार में जिंक, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करते हैं। नियमित सेवन से त्वचा पर निखार आता है और झुर्रियों की समस्या कम होती है।
इसी प्रकार, इसमें मौजूद प्रोटीन और मिनरल्स बालों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं और बाल झड़ने की समस्या को कम करते हैं।

दिमाग और हड्डियों को देता है मजबूती

ज्वार में मौजूद मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटेशियम दिमाग की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
साथ ही, इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों और जोड़ों को मजबूत बनाते हैं। यह बुजुर्गों और बच्चों दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

गर्मियों में ज्वार का सेवन क्यों करें?

गर्मियों में शरीर का तापमान अधिक रहता है और इस समय हल्का, ठंडक देने वाला भोजन जरूरी होता है। ज्वार शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता है, पसीने से हुए खनिज ह्रास (mineral loss) की भरपाई करता है और शरीर को ऊर्जा देता है।
ज्वार की रोटी या ज्वार का दलिया गर्मियों में पसीने से होने वाले डिहाइड्रेशन और थकावट से बचाने में कारगर है।

आयुर्वेद में ज्वार का महत्व

आयुर्वेद में कहा गया है — “ऋतु अनुसार भोजन ही औषध है।”
अर्थात् हर मौसम में शरीर की प्रकृति के अनुसार अन्न बदलना चाहिए। ज्वार को गर्मियों में और बाजरे को सर्दियों में खाने की सलाह दी गई है।
ज्वार पित्त दोष को संतुलित करता है और शरीर को आंतरिक ठंडक प्रदान करता है। इसलिए इसे “गर्मी का नैसर्गिक उपाय” कहा गया है।

 ज्वार की रोटी: परंपरा में छुपा विज्ञान

ज्वार भारतीय संस्कृति का ऐसा अन्न है जिसमें परंपरा और विज्ञान दोनों का संगम है। यह अनाज सस्ता, पौष्टिक और हर मौसम में शरीर के लिए लाभदायक है।
आज जब हम “सुपरफूड” की तलाश में विदेशी चीज़ों की ओर देखते हैं, तो ज्वार जैसी देशी अनाज की रोटी हमें याद दिलाती है कि हमारे पूर्वजों ने ही सबसे पहले “सस्टेनेबल हेल्थ फूड” की परंपरा बनाई थी।
गर्मियों में ज्वार की रोटी न केवल स्वादिष्ट भोजन है बल्कि यह शरीर को ठंडक, ताकत और संतुलन देने वाला प्राकृतिक औषधीय भोजन भी है।

Leave a Comment