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04/02/2026 11:33 am

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पाचन शक्ति को बढ़ाने और मजबूत बनाने के आयुर्वेदिक उपाय

स्वस्थ जीवन का आधार केवल अच्छा भोजन नहीं, बल्कि उसका सही पाचन है। आयुर्वेद में कहा गया है कि “रोगाḥ सर्वे अपि मन्दाग्नौ” — यानी सभी रोगों की जड़ कमजोर अग्नि (पाचन शक्ति) है। जब हमारा पाचन ठीक होता है, तो शरीर की हर कोशिका पोषण प्राप्त करती है और मन भी प्रसन्न रहता है। लेकिन आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में गलत खान-पान, देर से खाना, और बैठे-बैठे रहना पाचन शक्ति को कमजोर बना देता है। इसलिए जरूरी है कि हम कुछ आसान आयुर्वेदिक उपाय और योग-प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना

आयुर्वेद के अनुसार दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करने से अग्नि (Digestive Fire) सक्रिय होती है। यह शरीर में जमा आम (toxins) को बाहर निकालने में मदद करता है और आंतों को साफ रखता है।
सुबह खाली पेट एक या दो गिलास गुनगुना पानी पीने से न केवल कब्ज की समस्या दूर होती है बल्कि मेटाबॉलिज्म तेज होता है, जिससे वजन भी नियंत्रित रहता है। इसमें नींबू का रस या थोड़ा शहद मिलाकर लेने से परिणाम और भी बेहतर मिलते हैं। यह एक साधारण लेकिन अत्यंत प्रभावी उपाय है, जो हर व्यक्ति के लिए फायदेमंद है।

भोजन में अदरक और जीरा का प्रयोग

अदरक और जीरा दोनों ही प्राकृतिक पाचक माने जाते हैं। अदरक पेट की गैस, सूजन और भारीपन को कम करता है, जबकि जीरा पेट में बनने वाले एंजाइम को सक्रिय करता है।
भोजन से पहले थोड़ा सा ताजा अदरक नमक के साथ चबाना पाचक रसों को बढ़ाता है। वहीं, सब्ज़ी या दाल में जीरा तड़काने से भोजन अधिक सुपाच्य बनता है।
आयुर्वेद कहता है कि “अदरक भोजन का पहला मित्र है” — यह न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पाचन प्रक्रिया को भी सुचारु रखता है।

खाने के बाद सौंफ का सेवन

सौंफ पेट की गर्मी को शांत करती है और भोजन के बाद गैस या अपच की समस्या को रोकती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनॉयड्स होते हैं जो पेट की दीवारों को आराम देते हैं।
भोजन के बाद आधा चम्मच सौंफ चबाने से पेट हल्का रहता है और मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है। कई लोग इसे मिश्री के साथ लेते हैं, जिससे ठंडक और पाचन दोनों का लाभ मिलता है। यह छोटा सा उपाय पूरे परिवार के लिए लाभकारी है।

रात को सोने से पहले त्रिफला चूर्ण

त्रिफला — हरड़, बहेड़ा और आंवला — तीन फलों का चूर्ण है जिसे आयुर्वेद में सर्वश्रेष्ठ पाचक और शुद्धिकारी औषधि कहा गया है।
रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच त्रिफला लेने से आंतें साफ रहती हैं, कब्ज दूर होती है और अगली सुबह पेट हल्का महसूस होता है।
त्रिफला शरीर के विषैले तत्वों को निकालकर अग्नि को प्रज्वलित करता है और लिवर को भी स्वस्थ रखता है। नियमित सेवन से त्वचा, बाल और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

योग और प्राणायाम से पाचन सुधार

योग केवल शरीर को लचीला नहीं बनाता, बल्कि अंदरूनी अंगों — विशेषकर आंतों और जठराग्नि — को भी सक्रिय करता है। नीचे दिए गए आसन पाचन शक्ति बढ़ाने में विशेष रूप से सहायक हैं।

वज्रासन

भोजन के बाद कुछ मिनट वज्रासन में बैठना सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। यह आसन पाचन अंगों पर हल्का दबाव डालता है जिससे भोजन आसानी से पचता है और गैस या एसिडिटी नहीं होती। आयुर्वेद कहता है — “वज्रासन भोजन के बाद की औषधि है”।

पवनमुक्तासन

यह आसन गैस और कब्ज को दूर करने में कारगर है। इसे सुबह खाली पेट करने से पेट के अंगों की मालिश होती है और रक्त संचार बेहतर होता है। यह आसन पेट में फंसी हवा को बाहर निकालकर हल्कापन प्रदान करता है।

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति को “पेट की अग्नि को जगाने वाला श्वास क्रिया” कहा जाता है। इसमें तेज़ गति से श्वास छोड़ने और पेट को भीतर खींचने की प्रक्रिया होती है, जिससे पाचन ग्रंथियाँ सक्रिय होती हैं। यह प्राणायाम न केवल पाचन शक्ति बढ़ाता है बल्कि लिवर, पैंक्रियाज़ और किडनी को भी स्वस्थ रखता है।

अग्निसार क्रिया

“अग्निसार” का अर्थ है अग्नि (पाचन शक्ति) को सक्रिय करना। इसमें साँस रोककर पेट को अंदर-बाहर हिलाया जाता है, जिससे अग्नि तत्व जागृत होता है।
यह योग क्रिया उन लोगों के लिए बहुत लाभकारी है जिन्हें गैस, अपच या पेट में भारीपन की समस्या रहती है। नियमित अभ्यास से शरीर की ऊर्जा और पाचन दोनों में सुधार होता है।

मन और भोजन का संबंध

आयुर्वेद में कहा गया है — “यादृशं भावयेत् अन्नं तादृशं भवति मनः” — यानी जैसा भाव भोजन करते समय होगा, वैसा ही मन और शरीर बनेगा।
भोजन करते समय मन शांत रखें, जल्दी-जल्दी खाने से बचें और टीवी या मोबाइल का उपयोग न करें। हर निवाले को कृतज्ञता के भाव से ग्रहण करें। जब मन शांत होता है, तो पाचन शक्ति स्वतः बढ़ती है।

महंगी दवा की जरूरत नहीं

पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए किसी महंगी दवा या जटिल उपाय की जरूरत नहीं है। बस कुछ साधारण आयुर्वेदिक आदतें और योगासन अपनाकर आप अपने पाचन को मजबूत बना सकते हैं।
सुबह गुनगुना पानी, अदरक-जीरा का सेवन, त्रिफला चूर्ण और वज्रासन-कपालभाति जैसी क्रियाएँ — ये सभी प्राकृतिक उपाय आपके पाचन तंत्र को संतुलित रखते हैं।
याद रखें, जब पाचन ठीक रहेगा तो शरीर में ऊर्जा, मन में प्रसन्नता और जीवन में संतुलन स्वतः आएगा।

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