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04/02/2026 9:40 am

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थाईलैंड का वो मंदिर जो बना है बीयर की बोतलों से

दुनिया में कई ऐसे मंदिर हैं जिनकी वास्तुकला और निर्माण कला लोगों को आश्चर्यचकित करती है, लेकिन थाईलैंड का “वाट प महा चेदि खेव” (Wat Pa Maha Chedi Kaew) मंदिर वाकई अपनी तरह का एक अनोखा उदाहरण है। यह मंदिर पारंपरिक पत्थर या लकड़ी से नहीं, बल्कि दस लाख से भी अधिक खाली बीयर की बोतलों से बनाया गया है। पहली नज़र में इसे देखकर विश्वास करना कठिन होता है कि यह किसी धार्मिक स्थल का हिस्सा है। लेकिन यही इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है — आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम।

पर्यावरण के प्रति बौद्ध भिक्षुओं की सोच से शुरू हुई कहानी

इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1984 में बौद्ध भिक्षुओं ने किया था। उनके पास निर्माण के लिए पर्याप्त साधन नहीं थे, लेकिन उनके पास थी एक अनोखी सोच। उन्होंने आसपास फैली बीयर की खाली बोतलों को इकट्ठा किया और उन्हें ही मंदिर की दीवारों और छतों के निर्माण में इस्तेमाल किया। इससे न केवल उनका सपना साकार हुआ, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का एक संदेश भी फैला।
इन बोतलों का प्रयोग यह बताने के लिए किया गया कि दुनिया में कोई भी वस्तु बेकार नहीं होती, बस उसे सही दृष्टिकोण से देखने की ज़रूरत होती है।

 दस लाख बोतलों से बना मंदिर

वाट प महा चेदि खेव मंदिर को बनाने में करीब 10 लाख बीयर की बोतलों का इस्तेमाल किया गया। इनमें अधिकतर हरे और भूरे रंग की बोतलें थीं, जो मंदिर की बाहरी दीवारों पर सुंदर डिज़ाइन के रूप में जड़ी गईं।
मंदिर की हर ईंट, दीवार, और यहां तक कि छत भी कांच की बोतलों से बनी है। जब सूर्य की किरणें इन बोतलों पर पड़ती हैं तो पूरा परिसर चमक उठता है — मानो किसी रत्नजड़ित मंदिर में खड़े हों। इस नज़ारे को देखने दूर-दूर से पर्यटक यहां आते हैं और इस अनोखी कला की प्रशंसा करते हैं।

बाथरूम तक बना है बोतलों से

इस मंदिर की खास बात यह है कि केवल मुख्य भवन ही नहीं, बल्कि इसके बाथरूम, ध्यान कक्ष और छोटे-छोटे स्तूप भी बीयर की बोतलों से बने हैं। इन बोतलों को इस तरह सजाया गया है कि हर जगह एक पैटर्न और संतुलन दिखाई देता है।
हरे और भूरे रंग की बोतलें इस मंदिर को एक अनोखा प्राकृतिक रूप देती हैं, जिससे यह केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि कला, विज्ञान और सृजनशीलता का एक जीता-जागता उदाहरण बन गया है।

आस्था और पर्यावरण का संगम

यह मंदिर केवल पूजा या ध्यान का स्थान नहीं, बल्कि एक प्रेरणा का केंद्र भी है। यहां आने वाले लोग यह सीखते हैं कि आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं होती — आस्था का अर्थ है जिम्मेदारी, सृजनशीलता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता।
बौद्ध भिक्षुओं ने इस मंदिर के ज़रिए यह संदेश दिया कि अगर मन में निष्ठा हो तो किसी भी चीज़ को सकारात्मक रूप में बदला जा सकता है। बोतलें, जिन्हें लोग कचरा समझते थे, आज इस मंदिर की आत्मा बन चुकी हैं।

पर्यटक आकर्षण और आध्यात्मिक अनुभव का संगम

थाईलैंड के सिसाकेत प्रांत (Sisaket Province) में स्थित यह मंदिर आज एक प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं और इस मंदिर की अद्भुत कलाकारी को देखने के साथ-साथ शांति और ध्यान का अनुभव भी करते हैं।
कई यात्री इसे “Eco Temple” या “Green Temple” के नाम से भी जानते हैं क्योंकि यह रीसाइक्लिंग (Recycling) का सबसे सुंदर उदाहरण है। इस मंदिर के अंदर का वातावरण शांत, ठंडा और प्रकाश से भरा हुआ होता है — मानो ऊर्जा का प्रवाह हर दिशा में हो रहा हो।

हर कोने में छिपा है एक संदेश 

वाट प महा चेदि खेव मंदिर हमें यह सिखाता है कि रीसाइक्लिंग केवल एक प्रक्रिया नहीं बल्कि जीवन दर्शन है। हम यदि अपने आस-पास के संसाधनों का सही उपयोग करें तो न केवल पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं बल्कि कुछ सुंदर और स्थायी भी बना सकते हैं।
यह मंदिर हर इंसान को प्रेरित करता है कि “कचरे को नजरअंदाज मत करो, उसे अवसर में बदलो।” यही सोच इस मंदिर को दुनियाभर में विशेष बनाती है।

आज के दौर के लिए एक सीख

जब पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग और प्रदूषण से जूझ रही है, ऐसे में थाईलैंड का यह मंदिर आशा की एक किरण है। यह दिखाता है कि कैसे इंसान अपने विचारों से धरती को सुंदर बना सकता है।
वाट प महा चेदि खेव केवल एक मंदिर नहीं बल्कि एक प्रेरणास्थल है, जो यह संदेश देता है कि आध्यात्मिकता और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। यह सिखाता है कि सच्ची पूजा वही है जो धरती और जीवन दोनों को संतुलन में रखे।

आस्था का सबसे सुंदर रूप

थाईलैंड का बीयर बोतल मंदिर इस बात का प्रमाण है कि इंसान जब प्रकृति के साथ मिलकर सोचता है, तो वह चमत्कार कर सकता है।
यह मंदिर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि सस्टेनेबल लाइफस्टाइल (Sustainable Lifestyle) का जीता-जागता उदाहरण है। यहां की हर बोतल, हर दीवार यह कहती है —
“अगर सोच में शुद्धता हो, तो कचरा भी कलाकृति बन सकता है।”

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