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06/05/2026 11:23 pm

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गोंद के औषधीय गुण: हर पेड़ का गोंद है सेहत का खजाना

आयुर्वेद में गोंद को “प्राकृतिक औषधीय रेज़िन” कहा गया है। जब किसी पेड़ के तने में हल्का चीरा लगाया जाता है तो उससे एक गाढ़ा, दूधिया रस निकलता है जो सूखकर कठोर और भूरा हो जाता है — यही गोंद कहलाता है। गोंद न सिर्फ़ शरीर को पौष्टिकता देता है बल्कि यह औषधीय रूप से कई रोगों का इलाज भी करता है। इसकी प्रकृति ठंडी और बलवर्धक होती है, इसलिए इसे दवाओं, मिठाइयों और टॉनिक में भी इस्तेमाल किया जाता है।

बबूल या कीकर का गोंद – शरीर को बल और ठंडक देने वाला

बबूल का गोंद सबसे सामान्य और लोकप्रिय गोंद है। यह शरीर को ठंडक और मजबूती प्रदान करता है। इसका उपयोग लड्डू, च्यवनप्राश और आयुर्वेदिक वटी में किया जाता है। महिलाओं के लिए प्रसव के बाद शरीर को ताकत देने के लिए गोंद के लड्डू खाने की परंपरा है। यह जोड़ों के दर्द, कमजोरी और वात रोगों में लाभदायक होता है।

नीम का गोंद – रक्तशुद्धि और रोग प्रतिरोधक शक्ति का स्रोत

नीम का गोंद जिसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते हैं, शरीर में रक्त प्रवाह को संतुलित करता है और खून की शुद्धि में मदद करता है। यह शरीर को स्फूर्ति देता है और त्वचा संबंधी रोगों से भी बचाता है। इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इसमें औषधीय तीव्रता अधिक होती है।

पलाश का गोंद – हड्डियों और वीर्य वृद्धि का रामबाण उपाय

पलाश का गोंद शक्ति और बलवर्धक माना गया है। इसे मिश्री और दूध के साथ सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है, वीर्य की वृद्धि होती है और हड्डियां मजबूत बनती हैं। दस्त या संग्रहणी जैसी पाचन संबंधी समस्याओं में यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से लाभ देता है।

आम का गोंद – फोड़े-फुंसी और चर्म रोगों में लाभकारी

आम के पेड़ से निकला गोंद रक्त को शुद्ध करता है और त्वचा संबंधी रोगों में असरदार है। इसे नींबू के रस के साथ मिलाकर लगाने से फोड़े-फुंसी और घाव जल्दी भर जाते हैं। साथ ही यह आंतरिक रूप से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

सेमल का गोंद या मोचरस – पित्तशामक और पाचन तंत्र का रक्षक

सेमल के गोंद को मोचरस कहा जाता है। यह पित्त विकारों को शांत करता है और अतिसार (डायरिया) या श्वेत प्रदर जैसी समस्याओं में लाभदायक होता है। मोचरस का चूर्ण दही या चीनी के साथ लेने से पेट संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। दंत मंजन में भी इसका प्रयोग दांतों को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

कबीट का गोंद – वर्षा के बाद मिलने वाला गुणकारी गोंद

बरसात के बाद कबीट के पेड़ से निकलने वाला गोंद बबूल की गोंद के समान गुणकारी माना जाता है। यह शरीर में ताकत बढ़ाने, पाचन सुधारने और रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। इसका उपयोग ग्रामीण आयुर्वेदिक उपचारों में व्यापक रूप से होता है।

हींग – गोंद के रूप में पाचन और संक्रमण से सुरक्षा

हींग दरअसल एक रेज़िननुमा गोंद है जो फेरूला पौधे की जड़ से प्राप्त होता है। यह भोजन में स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। खेतों में इसका उपयोग संक्रमण रोकने के लिए किया जाता है। पानी में मिलाने से पौधों की वृद्धि होती है और कीटाणु नष्ट होते हैं। घरेलू दृष्टि से, पेट दर्द, गैस, और अपच में यह औषधि समान है।

गुग्गुल – जोड़ों के दर्द का अचूक इलाज

गुग्गुल एक झाड़ीनुमा पौधा है जिसके तने से निकला गोंद सुगंधित और औषधीय होता है। यह जोड़ों के दर्द, गठिया, और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। गुग्गुल का धूप या अगरबत्ती में उपयोग घर को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए भी किया जाता है।

प्रपोलीश – मधुमक्खियों द्वारा एकत्र किया गया पौधीय गोंद

प्रपोलीश मधुमक्खियों द्वारा पेड़ों के गोंद से तैयार किया गया एक प्राकृतिक पदार्थ है। इसमें शक्तिशाली जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधनों, दांतों की सुरक्षा और संक्रमण से बचाव के लिए किया जाता है। आधुनिक चिकित्सा में भी इसे इम्यून बूस्टर माना गया है।

ग्वार का गोंद – औद्योगिक और आहारिक उपयोग वाला गोंद

ग्वार फली के बीजों में गैलक्टोमेनन नामक गोंद पाया जाता है। यह आइसक्रीम, पनीर और दूध से बने पदार्थों में गाढ़ापन लाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह न सिर्फ़ भोजन को स्वादिष्ट बनाता है बल्कि पाचन और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में भी सहायक है। ग्वार गोंद उद्योगों में भी एक महत्वपूर्ण रसायन है।

अन्य औषधीय गोंद – सहजन, बेर, अर्जुन, पीपल के फायदे

सहजन, बेर, पीपल और अर्जुन के पेड़ों के गोंद में भी विशिष्ट औषधीय गुण पाए जाते हैं। ये गोंद शरीर को रोगमुक्त रखने, रक्त संचार को संतुलित करने और मानसिक शांति प्रदान करने में मदद करते हैं। अर्जुन गोंद विशेष रूप से हृदय रोगों में लाभदायक है।

गोंद है प्रकृति की अनमोल देन

गोंद केवल एक पेड़ का स्त्राव नहीं बल्कि प्रकृति की औषधीय संपदा है। हर गोंद अपने स्रोत पेड़ के गुणों को धारण करता है और शरीर को अंदर से स्वस्थ रखता है। यदि इसे सही मात्रा और तरीके से सेवन किया जाए तो यह तन और मन दोनों को मजबूत बनाता है।

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