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बिहार की बेटी शिल्पी सिंह को मिला “सुपर वुमनिया राष्ट्रीय पुरस्कार 2025

मुंबई, 10 नवंबर 2025 — बिहार की बेटी शिल्पी सिंह ने पूरे देश में गर्व का माहौल बना दिया है।
उन्हें प्रतिष्ठित “सुपर वुमनिया राष्ट्रीय पुरस्कार 2025” (Super Womania National Award 2025) से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें ग्रामीण बिहार में महिलाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
इस पुरस्कार के साथ बिहार की इस बेटी ने न केवल राज्य का बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।

सुपर वुमनिया अवार्ड — प्रेरक महिलाओं को सम्मानित करने का राष्ट्रीय मंच

“सुपर वुमनिया अवार्ड” एक राष्ट्रीय स्तर का सम्मान मंच है जिसे एफएम फीवर की आरजे स्तुति और हिंदुस्तान टाइम्स मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित किया जाता है।
इस मंच का उद्देश्य उन महिलाओं को पहचान देना है जो समाज, शिक्षा, खेल, कला, और सामाजिक परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान दे रही हैं।
वर्ष 2025 का समारोह मुंबई के आईटीसी ग्रैंड सेंट्रल होटल में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से चुनिंदा प्रेरणादायक महिलाओं को सम्मानित किया गया।

जेमिमा रोड्रिग्स बनीं समारोह की आकर्षण — विश्व कप विजेता महिला खिलाड़ी को मिला विशेष सम्मान

कार्यक्रम की सबसे बड़ी आकर्षण रहीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज़ जेमिमा रोड्रिग्स, जिन्होंने हाल ही में महिला विश्व कप 2025 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई।
उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें “एंड्योरिंग पायनियरिंग अवार्ड (Enduring Pioneering Award)” से सम्मानित किया गया।
जेमिमा के शब्दों में — “हर महिला जो अपने सपनों के लिए संघर्ष करती है, वह एक ‘सुपर वुमनिया’ है।”

फिल्मी सितारों की मौजूदगी ने बढ़ाया समारोह का आकर्षण

इस पुरस्कार समारोह में बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियाँ शामिल हुईं।
शबाना आज़मी, अदिति राव हैदरी, सान्या मल्होत्रा, टिस्का चोपड़ा, जूही बब्बर, हीना खान, रसिका दुग्गल, मोना सिंह, निकिता दत्ता और गायिका लीसा मिश्रा जैसी हस्तियों ने अपनी मौजूदगी से मंच को रोशन किया।
इन सभी ने महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाते हुए कहा कि समाज के हर स्तर पर महिला शक्ति बदलाव की सबसे बड़ी प्रेरक है।

शिल्पी सिंह — ग्रामीण बिहार की आवाज़ और बदलाव की मिसाल

शिल्पी सिंह वर्तमान में महिला संगठन “भूमिका विहार” (Bhumika Vihar) की निदेशक हैं।
उनका कार्यक्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण बिहार में है, जहाँ वह महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक सशक्तिकरण पर काम करती हैं।
उन्होंने हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं — जैसे महिला शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मरक्षा से जुड़े अभियान।
उनके नेतृत्व में “भूमिका विहार” ने बाल विवाह, घरेलू हिंसा और लैंगिक असमानता जैसी समस्याओं पर लगातार आवाज़ उठाई है।

शिल्पी सिंह का वक्तव्य — ‘यह सम्मान बिहार की हर बेटी का है’

पुरस्कार ग्रहण करते हुए शिल्पी सिंह ने कहा —
“यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी ग्रामीण और वंचित महिलाओं का है जो कठिन परिस्थितियों में भी बदलाव की मशाल थामे हुए हैं।
मैं यह पुरस्कार बिहार की हर उस बेटी को समर्पित करती हूँ जो अपने अधिकारों और अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह सम्मान उन्हें और उनकी टीम को समाज में और अधिक सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देता है।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उनका योगदान

शिल्पी सिंह ने अपने काम से साबित किया है कि परिवर्तन केवल बड़े मंचों से नहीं, बल्कि गाँव की मिट्टी से भी शुरू हो सकता है।
उनके प्रोजेक्ट्स ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद की है —
किसान महिलाओं के लिए माइक्रो-फाइनेंस योजनाएँ, लड़कियों के लिए डिजिटल शिक्षा अभियान, और “बेटी बचाओ, बेटी सिखाओ” जैसे जनजागरण कार्यक्रम उनके प्रयासों का हिस्सा हैं।
उनके संगठन ने अब तक बिहार के 15 से अधिक जिलों में काम किया है और हजारों महिलाओं की ज़िंदगी में बदलाव लाया है।

बिहार के लिए गर्व का क्षण — नारी शक्ति का सम्मान

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि यह सम्मान पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है।
बिहार हमेशा से प्रतिभाशाली बेटियों की भूमि रहा है —
चाहे वह शिक्षा, खेल, राजनीति या सामाजिक सेवा का क्षेत्र हो, बिहार की महिलाएँ लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं।
शिल्पी सिंह की यह उपलब्धि उस परंपरा को और सशक्त बनाती है।

समाज में बदलाव का प्रतीक बना सुपर वुमनिया अवार्ड 2025

इस वर्ष का “सुपर वुमनिया अवार्ड” न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान था, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बन गया।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था — हर वह महिला जो अपने समाज, परिवार या पेशे में सकारात्मक बदलाव लाती है, वह एक “सुपर वुमनिया” है।
इस मंच ने देशभर की प्रेरणादायक कहानियों को एकजुट किया और नारी शक्ति के उत्सव के रूप में इतिहास रचा।

बिहार की बेटियाँ बना रही हैं नया भारत

शिल्पी सिंह की यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस नए भारत का प्रतीक है जहाँ बिहार की बेटियाँ नेतृत्व, परिश्रम और संवेदनशीलता से समाज को नई दिशा दे रही हैं।
उनका सफर यह साबित करता है कि अगर संकल्प दृढ़ हो, तो सीमाएँ केवल शब्द बनकर रह जाती हैं।
“सुपर वुमनिया” जैसी पहलें भारत की नारी शक्ति को मंच देती हैं — और शिल्पी सिंह जैसे नाम उस शक्ति की पहचान बनते जा रहे हैं।

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