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04/02/2026 9:32 am

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पुरुषों में भी बढ़ रहा है थायरॉइड का खतरा, स्ट्रेस और लाइफस्टाइल सबसे बड़ा कारण

लंबे समय तक थायरॉइड को महिलाओं से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है। आम धारणा थी कि यह समस्या हार्मोनल बदलावों के कारण सिर्फ महिलाओं में होती है। लेकिन बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित खानपान और पर्यावरण प्रदूषण ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। अब पुरुषों में भी थायरॉइड डिसऑर्डर के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। खासकर शहरी इलाकों में रहने वाले पुरुष, जो लंबे समय तक काम करते हैं, पर्याप्त नींद नहीं लेते और तनावपूर्ण जीवन जीते हैं, उनमें थायरॉइड की समस्या तेजी से बढ़ रही है।

थायरॉइड ग्लैंड क्या है और शरीर में इसकी भूमिका

थायरॉइड ग्लैंड गर्दन के सामने वाले हिस्से में स्थित एक छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथि है। यह थायरॉइड हार्मोन का निर्माण करती है, जो शरीर के मेटाबोलिज्म, एनर्जी लेवल, हार्ट रेट और वजन को नियंत्रित करता है। थायरॉइड हार्मोन सही मात्रा में न बनें तो शरीर का पूरा संतुलन बिगड़ सकता है। पुरुषों में थायरॉइड का असंतुलन धीरे-धीरे असर दिखाता है, इसलिए कई बार इसकी पहचान देर से होती है।

बदलती लाइफस्टाइल और स्ट्रेस क्यों बन रहे हैं मुख्य कारण

आज का पुरुष जीवन लगातार भागदौड़ से भरा हुआ है। ऑफिस का दबाव, बढ़ते काम के घंटे, मोबाइल और स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, नींद की कमी और भविष्य को लेकर चिंता मानसिक तनाव को बढ़ाती है। लगातार तनाव में रहने से शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है, जिसका सीधा असर थायरॉइड ग्लैंड पर पड़ता है। देर रात तक जागना, सुबह जल्दी ऑफिस जाना और शरीर को आराम न मिलना थायरॉइड हार्मोन के स्राव को प्रभावित करता है।

खानपान की गलत आदतें और थायरॉइड का संबंध

अनियमित खानपान आज की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। कई पुरुष नाश्ता छोड़ देते हैं, देर रात खाना खाते हैं या प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर रहते हैं। अत्यधिक कैफीन, जंक फूड और मीठे पेय पदार्थ हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ते हैं। जब शरीर को सही पोषण नहीं मिलता और खाने का समय तय नहीं होता, तो थायरॉइड ग्लैंड सही ढंग से काम नहीं कर पाता। इससे हाइपोथायरॉइडिज्म या हाइपरथायरॉइडिज्म जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

प्रदूषण और केमिकल्स का थायरॉइड पर असर

आज देश के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुका है। प्रदूषित हवा में मौजूद हेवी मेटल, पेस्टिसाइड और इंडस्ट्रियल केमिकल्स शरीर के हार्मोन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से थायरॉइड ग्लैंड कम या ज्यादा एक्टिव हो सकता है। खासकर इंडस्ट्रियल और शहरी इलाकों में रहने वाले पुरुषों में थायरॉइड की समस्या का जोखिम ज्यादा देखा जा रहा है।

पुरुषों में थायरॉइड के लक्षण क्यों नजरअंदाज हो जाते हैं

पुरुषों में थायरॉइड के लक्षण अक्सर दूसरी सामान्य समस्याओं जैसे थकान, तनाव या उम्र बढ़ने के प्रभाव समझ लिए जाते हैं। इसी वजह से समय पर जांच नहीं हो पाती। अचानक वजन बढ़ना या तेजी से वजन कम होना, हर समय थकान महसूस करना, काम में मन न लगना, स्टैमिना में कमी, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और बालों का झड़ना थायरॉइड के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। मांसपेशियों में कमजोरी और यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी पुरुषों में थायरॉइड की ओर इशारा करती हैं।

थायरॉइड और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध

थायरॉइड हार्मोन का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। जब यह हार्मोन असंतुलित होता है, तो व्यक्ति को डिप्रेशन, एंग्जायटी और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पुरुष अक्सर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को छिपा लेते हैं, जिससे थायरॉइड की पहचान और भी देर से होती है। लंबे समय तक अनदेखी करने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

समय पर जांच क्यों है जरूरी

थायरॉइड की समय पर पहचान न होने पर भविष्य में हार्ट डिजीज, डायबिटीज, फर्टिलिटी प्रॉब्लम और गंभीर हार्मोनल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ सकता है। साधारण ब्लड टेस्ट के जरिए थायरॉइड की जांच संभव है। जिन पुरुषों में फैमिली हिस्ट्री, ज्यादा तनाव, अनियमित जीवनशैली या लंबे समय से थकान जैसी शिकायतें हैं, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए।

थायरॉइड बैलेंस रखने के लिए क्या करें

स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर थायरॉइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित समय पर भोजन करना, संतुलित डाइट लेना, पर्याप्त नींद और रोजाना हल्की एक्सरसाइज थायरॉइड हेल्थ के लिए जरूरी है। तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान और वॉक को दिनचर्या में शामिल करना लाभकारी होता है। साथ ही, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना भी जरूरी है।

पुरुषों को भी सतर्क रहने की जरूरत

थायरॉइड अब सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं रह गई है। बदलती लाइफस्टाइल और पर्यावरणीय कारणों ने पुरुषों को भी इस बीमारी की चपेट में ला दिया है। जरूरी है कि पुरुष अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच कराएं। सही जानकारी, जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर थायरॉइड को नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

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