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04/02/2026 7:58 am

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एक मिनट में दिमाग को शांत करने का तरीका

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में तनाव लगभग हर इंसान की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। काम का दबाव, आर्थिक चिंता, रिश्तों की उलझन, सोशल मीडिया और भविष्य को लेकर डर हमारे दिमाग को लगातार व्यस्त रखते हैं। ऐसे में पूरी तरह तनावमुक्त जीवन जीना जैसे एक दूर का सपना लगता है। दिक्कत सिर्फ इतनी नहीं है कि हम तनाव में रहते हैं, बल्कि यह है कि हमारा दिमाग कभी भी पूरी तरह इस पल में नहीं ठहर पाता। यही बेचैनी धीरे-धीरे ओवरथिंकिंग, नींद की कमी और मानसिक थकावट में बदल जाती है।

दिमाग का टाइम ट्रैवल और ओवरथिंकिंग की जड़

मानव दिमाग की एक आदत होती है जिसे मनोवैज्ञानिक “टाइम ट्रैवल” कहते हैं। इसका मतलब है कि दिमाग बार-बार या तो अतीत की घटनाओं में उलझा रहता है या भविष्य में क्या गलत हो सकता है, इसकी कल्पनाएं करता रहता है। जब दिमाग इस तरह बार-बार भटकता है तो शरीर का नर्वस सिस्टम खतरे की स्थिति मान लेता है। इसका नतीजा होता है तेज़ दिल की धड़कन, बेचैनी, पसीना और लगातार तनाव। यही ओवरथिंकिंग की असली जड़ है।

खुद को इसी पल में वापस लाना क्यों जरूरी है

तनाव और चिंता का सबसे प्रभावी इलाज यही है कि दिमाग को बार-बार वर्तमान क्षण में लौटाया जाए। जब हम इसी पल में होते हैं तो दिमाग को यह संकेत मिलता है कि अभी कोई खतरा नहीं है। वर्तमान में मौजूद रहना ही मानसिक शांति की पहली सीढ़ी है। लेकिन सवाल यह है कि जब दिमाग तेज़ी से भाग रहा हो, तब उसे रोका कैसे जाए। इसका जवाब है एक बेहद आसान लेकिन प्रभावी तकनीक, जिसे एक्टिव नोटिसिंग कहा जाता है।

एक्टिव नोटिसिंग क्या है और यह कैसे काम करती है

एक्टिव नोटिसिंग का मतलब है इस समय जो कुछ भी आपके आसपास और आपके शरीर में हो रहा है, उस पर पूरी जागरूकता के साथ ध्यान देना। यह कोई ध्यान या लंबी मेडिटेशन तकनीक नहीं है, बल्कि एक माइक्रो एक्सरसाइज है जिसे आप एक मिनट से भी कम समय में कर सकते हैं। कैलिफोर्निया के बायोमेडिकल साइकोलॉजिस्ट के अनुसार यह तकनीक दिमाग को तुरंत वर्तमान में लाने का सबसे तेज़ तरीका है। इसमें दिमाग को सोचने से हटाकर महसूस करने की दिशा में मोड़ा जाता है।

एक मिनट में दिमाग को शांत करने की पूरी प्रक्रिया

जब भी आपको लगे कि दिमाग बहुत ज्यादा भटक रहा है या बेचैनी बढ़ रही है, सबसे पहले रुक जाएं और एक गहरी सांस लें। सांस को धीरे-धीरे अंदर भरें और फिर आराम से बाहर छोड़ें। इसके बाद अपने आसपास की दुनिया पर ध्यान केंद्रित करें। अपने सामने मौजूद तीन ऐसी चीजों को नोटिस करें जिन्हें आप देख सकते हैं या सुन सकते हैं। यह खिड़की से आती आवाज़ हो सकती है, किसी पंखे की हल्की आवाज़ या सामने रखा कोई सामान। इसके बाद अपने शरीर में मौजूद दो फिजिकल सेंसेशन पर ध्यान दें। जैसे आपके पैरों का फर्श को छूना या कुर्सी पर बैठे शरीर का वजन महसूस होना। अंत में खुद से धीरे से कहें कि अभी यहां यही हो रहा है और इस समय मैं सुरक्षित हूं। यह वाक्य दिमाग को गहरा भरोसा देता है।

यह छोटी सी एक्सरसाइज इतनी असरदार क्यों है

एक्टिव नोटिसिंग सीधे हमारे नर्वस सिस्टम पर असर डालती है। जब हम अपने आसपास की चीजों और शरीर की संवेदनाओं पर ध्यान देते हैं, तो दिमाग को यह संदेश मिलता है कि फिलहाल कोई खतरा नहीं है। इससे शरीर की फाइट-या-फ्लाइट प्रतिक्रिया शांत होने लगती है। दिमाग की रफ्तार धीमी होती है और सोच का बोझ हल्का महसूस होने लगता है। यही वजह है कि यह एक्सरसाइज कुछ ही सेकंड में मानसिक शांति देने लगती है।

साइंस और रिसर्च एक्टिव नोटिसिंग के बारे में क्या कहती है

मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने वाली संस्थाओं के अनुसार वर्तमान क्षण में ध्यान लाने वाली तकनीकें तनाव और चिंता को कम करने में बेहद कारगर होती हैं। National Center for Complementary and Integrative Health के अनुसार इस तरह के माइंडफुलनेस आधारित अभ्यास तनाव, एंग्जायटी और ओवरथिंकिंग को कम करते हैं। साथ ही यह भावनात्मक मजबूती बढ़ाने में मदद करते हैं और इंसान को तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय सोच-समझकर जवाब देने की क्षमता विकसित करते हैं।

एक्टिव नोटिसिंग को आदत कैसे बनाएं

इस एक्सरसाइज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे किसी अलग समय या जगह की जरूरत नहीं होती। इसे आप अपनी रोज़मर्रा की आदतों के साथ जोड़ सकते हैं। जैसे सुबह चाय बनाते समय, ऑफिस में काम शुरू करने से पहले, ट्रैफिक में फंसे हुए या सोने से पहले। जब आप इसे बार-बार करते हैं, तो दिमाग खुद-ब-खुद वर्तमान में लौटने लगता है। धीरे-धीरे ओवरथिंकिंग की आदत कमजोर पड़ने लगती है।

ओवरथिंकिंग करने वालों के लिए यह तरीका क्यों जरूरी है

जो लोग ज्यादा सोचते हैं, उनके लिए दिमाग कभी आराम की स्थिति में नहीं रहता। एक्टिव नोटिसिंग उन्हें यह सिखाती है कि हर विचार पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है। यह अभ्यास दिमाग और विचारों के बीच एक दूरी बनाता है। इस दूरी से इंसान अपने विचारों का गुलाम बनने के बजाय उनका साक्षी बन पाता है। यही मानसिक आज़ादी की शुरुआत है।

इस एक्सरसाइज का असर सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता

जब दिमाग शांत होता है, तो उसका असर पूरे शरीर पर दिखता है। दिल की धड़कन सामान्य होती है, मांसपेशियों का तनाव कम होता है और सांस गहरी होने लगती है। लंबे समय तक इस अभ्यास को करने से नींद बेहतर होती है, चिड़चिड़ापन कम होता है और फोकस बढ़ता है। यह छोटी सी आदत धीरे-धीरे जीवन की क्वालिटी बदलने लगती है।

एक मिनट जो आपकी पूरी मानसिक स्थिति बदल सकता है

दिमाग को शांत करने के लिए हमेशा लंबी मेडिटेशन या मुश्किल तकनीकों की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी सिर्फ एक मिनट का सही अभ्यास भी काफी होता है। एक्टिव नोटिसिंग आपको यह याद दिलाती है कि इस पल में आप सुरक्षित हैं और यही एहसास मानसिक शांति की सबसे मजबूत नींव है। अगर आप इसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल कर लेते हैं, तो तनाव और ओवरथिंकिंग का असर धीरे-धीरे कम होने लगता है।

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