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19/02/2026 5:21 am

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बार-बार एसिडिटी क्यों होती है? तुरंत राहत नहीं, जड़ से इलाज समझिए

आज के समय में acidity remedy और instant acidity relief  की जानकारी पाने के लिए लोग नेट पर सर्च करते है. इसका कारण साफ है, एसिडिटी अब कभी-कभार होने वाली समस्या नहीं रही, बल्कि लाखों लोगों की रोज़मर्रा की परेशानी बन चुकी है। जैसे ही सीने में जलन होती है, लोग तुरंत एंटासिड गोली, सोडा या पाउडर पी लेते हैं। कुछ मिनट में राहत मिलती है और लगता है समस्या खत्म हो गई। लेकिन सच यह है कि यह राहत केवल सतही है। एसिड दब जाता है, लेकिन कारण वहीं बना रहता है। यही वजह है कि कुछ घंटों या अगले दिन वही जलन, खट्टा डकार और भारीपन फिर लौट आता है। आधुनिक जीवनशैली में जल्दी-जल्दी खाना, तनाव, देर रात जागना और प्रोसेस्ड फूड इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं।

आयुर्वेद की नजर से एसिडिटी: सिर्फ एसिड नहीं, पाचन की कमजोरी

आयुर्वेद एसिडिटी को केवल ज्यादा एसिड बनने की बीमारी नहीं मानता। इसे अम्लपित्त कहा जाता है, जो मंदाग्नि, कफ और पित्त के असंतुलन से पैदा होता है। जब पाचन अग्नि कमजोर होती है, तो खाना पूरी तरह नहीं पचता। अधपचा भोजन “आम” बनाता है, जो शरीर में विष जैसा व्यवहार करता है। यह आम और बढ़ा हुआ द्रव तत्व मिलकर अम्लता पैदा करते हैं। सीने के ऊपर का भाग कफ प्रधान क्षेत्र माना गया है, इसलिए अतिरिक्त द्रव ऊपर की ओर आकर जलन और खट्टे पानी का एहसास देता है। पित्त अग्नि से जुड़ा है, इसलिए अग्नि बिगड़ी तो पित्त भी असंतुलित हो जाता है। इस तरह एसिडिटी एक संकेत है कि पाचन तंत्र संतुलन खो चुका है।

एंटासिड और सोडा: राहत या भ्रम

जब हम एंटासिड लेते हैं, तो वे पेट के एसिड को अस्थायी रूप से न्यूट्रल कर देते हैं। इससे तुरंत आराम मिलता है, लेकिन पाचन अग्नि और कमजोर हो सकती है। बार-बार एंटासिड लेने से शरीर रिबाउंड एसिडिटी पैदा कर सकता है, यानी दवा का असर खत्म होते ही ज्यादा एसिड बनने लगता है। धीरे-धीरे व्यक्ति गोली पर निर्भर हो जाता है। कई लोग सालों तक एंटासिड लेते रहते हैं और उन्हें लगता है कि यही इलाज है। जबकि अंदर ही अंदर पाचन शक्ति घटती जाती है। लंबे समय में यह गैस्ट्राइटिस या अल्सर जैसी जटिलताओं में बदल सकता है। इसलिए instant acidity relief हमेशा real acidity treatment नहीं होता।

सोंठ: जड़ पर काम करने वाला घरेलू उपाय

सूखी अदरक यानी सोंठ आयुर्वेद में अग्नि को प्रज्वलित करने वाली औषधि मानी गई है। इसका काम केवल जलन दबाना नहीं, बल्कि पाचन सुधारना है। सोंठ अतिरिक्त द्रव को कम करती है, कफ को संतुलित करती है और पाचन को सक्रिय करती है। जब एसिडिटी का कारण मंदाग्नि और कफ है, तो सोंठ सीधे जड़ पर काम करती है। खट्टा पानी आना, डकार और उल्टी जैसा भाव इसमें सहायक रूप से कम हो सकता है। अगर एसिडिटी तीखे भोजन से हुई हो, तो सोंठ के साथ आंवला लेना संतुलित उपाय माना जाता है। आंवला पित्त को शांत करता है और सोंठ अग्नि बढ़ाती है। यह संयोजन शरीर को बिना नुकसान पहुंचाए राहत देता है।

भोजन से पहले अदरक का महत्व

ताजी अदरक का प्रयोग आयुर्वेद में पाचन सुधारने के लिए प्राचीन समय से किया जाता रहा है। भोजन से पहले थोड़ा अदरक सेंधा नमक के साथ लेने से अग्नि सक्रिय होती है। इससे खाना बेहतर पचता है और एसिडिटी की संभावना कम हो जाती है। यह उपचार नहीं, बल्कि निवारक उपाय है। जिन लोगों को बार-बार acidity problem होती है, उनके लिए यह सरल आदत बड़ा फर्क ला सकती है। आधुनिक रिसर्च भी बताती है कि अदरक गैस्ट्रिक मोटिलिटी सुधारती है और पाचन एंजाइम को सक्रिय करती है।

जीवनशैली: असली इलाज यहीं छिपा है

एसिडिटी केवल दवा से नहीं, आदतों से जुड़ी बीमारी है। देर रात भारी भोजन, बहुत ज्यादा चाय-कॉफी, तला हुआ खाना, तनाव और अनियमित नींद पाचन को कमजोर करते हैं। हल्का, गर्म और ताजा भोजन अग्नि के लिए बेहतर माना जाता है। लंबे समय तक खाली पेट रहना भी अम्लता बढ़ाता है। धीरे-धीरे खाना, अच्छे से चबाना और भोजन के तुरंत बाद न लेटना बेहद जरूरी है। नियमित समय पर सोना और उठना शरीर की जैविक घड़ी को संतुलित करता है। योग, प्राणायाम और हल्की वॉक पाचन और तनाव दोनों पर सकारात्मक असर डालते हैं।

आयुर्वेदिक औषधियां: कब और कैसे

अविपत्तिकर चूर्ण, कामदुधा रस, गिलोय सत्व और यष्टिमधु जैसी औषधियां अम्लपित्त में पारंपरिक रूप से उपयोग की जाती रही हैं। ये जलन शांत करने के साथ पाचन संतुलन में मदद करती हैं। लेकिन हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, इसलिए दवा चिकित्सक की सलाह से ही लेनी चाहिए। खासकर अगर अल्सर, किडनी रोग या गर्भावस्था हो, तो खुद से दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है। आयुर्वेद व्यक्तिगत चिकित्सा पर जोर देता है, इसलिए सही मार्गदर्शन जरूरी है।

असली सवाल: दबाना है या ठीक करना है

हर बार एसिडिटी होने पर गोली लेना आसान है, लेकिन यह समाधान नहीं। असली राहत तब मिलती है जब पाचन शक्ति सुधरती है। एसिडिटी शरीर का संकेत है कि कुछ गड़बड़ है। अगर हम उस संकेत को दबाते रहेंगे, तो समस्या गहरी होती जाएगी। लेकिन अगर हम अग्नि को मजबूत करने पर ध्यान देंगे, तो शरीर खुद संतुलन में लौट सकता है। यही आयुर्वेद का मूल संदेश है: बीमारी को चुप मत कराइए, शरीर को समझिए।

सोच बदलें, पेट बदल जाएगा

बार-बार होने वाली एसिडिटी कोई छोटी समस्या नहीं, बल्कि जीवनशैली का आईना है। तुरंत राहत देने वाले उपाय आकर्षक लगते हैं, लेकिन स्थायी समाधान पाचन सुधार में है। सोंठ, अदरक, आंवला, सही भोजन और नियमित दिनचर्या मिलकर शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं। अगली बार जब सीने में जलन हो, तो खुद से पूछिए कि आप बीमारी दबा रहे हैं या उसे समझकर ठीक कर रहे हैं। यही सवाल आपकी सेहत का भविष्य तय करेगा।

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