Explore

Search

20/02/2026 5:17 am

[the_ad id="14531"]
लेटेस्ट न्यूज़
[the_ad_group id="32"]

डकार बार-बार आती है? यह आदत नहीं बल्कि बीमारी का संकेत है

डकार आना सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। खाना खाते समय थोड़ी हवा निगलना और गैस बनना स्वाभाविक है, इसलिए हल्की डकार आना बीमारी नहीं है। लेकिन जब डकार दिनभर चलती रहे, आवाज़ तेज़ हो, और व्यक्ति सामाजिक रूप से असहज होने लगे, तब यह साधारण बात नहीं रहती। कई लोग इसे मज़ाक समझते हैं, कुछ इसे केवल मानसिक समस्या मान लेते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। शरीर बार-बार संकेत दे रहा होता है कि पाचन तंत्र संतुलन खो रहा है।

सामान्य डकार और असामान्य डकार में फर्क

सामान्य स्थिति में डकार दिन में कुछ ही बार आती है, आमतौर पर भोजन के बाद, और कोई खास परेशानी नहीं होती। असामान्य स्थिति में डकारों की संख्या बहुत बढ़ जाती है। कुछ लोगों को दिन में सौ-दो सौ बार तक डकार आती है, सुबह उठते ही गैस निकलने लगती है और पेट हल्का करने में समय लगता है। कई बार शरीर के किसी हिस्से पर दबाव डालने से भी डकार निकल जाती है। यह केवल हवा भरने की बात नहीं, बल्कि पाचन और वात संतुलन बिगड़ने का संकेत हो सकता है। जब यह रोज़ की परेशानी बन जाए, तब इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं।

डकार के साथ आने वाले दूसरे संकेत

बार-बार डकार अक्सर अकेली नहीं आती। इसके साथ गैस, अपच, भूख कम लगना, पेट भारी रहना, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द और शरीर में जकड़न जैसी समस्याएँ भी जुड़ सकती हैं। कुछ लोगों में फैटी लिवर, आंखों में जलन, उंगलियों में सूजन या थकान भी देखी जाती है। इसका मतलब यह है कि समस्या केवल पेट तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरा मेटाबॉलिक सिस्टम प्रभावित हो सकता है। आधुनिक चिकित्सा की भाषा में इसे digestive disorder और gut imbalance से जोड़ा जाता है, जबकि आयुर्वेद इसे दोष असंतुलन के रूप में देखता है।

आयुर्वेद की दृष्टि से आमाशय गत वात

आयुर्वेद में बार-बार डकार को अक्सर आमाशय गत वात से जोड़ा जाता है, यानी पेट और ऊपरी जठर क्षेत्र में वात का बढ़ जाना। जब नीचे की ओर जाने वाली वायु ऊपर की ओर चढ़ने लगती है, तो गैस बार-बार डकार के रूप में निकलती है। अगर इसमें पित्त और कफ भी जुड़ जाएँ, तो जलन, भारीपन और अपच बढ़ सकती है। यह स्थिति बताती है कि शरीर का प्राकृतिक प्रवाह उलट गया है। इसलिए केवल गैस की गोली लेना स्थायी समाधान नहीं देता, क्योंकि जड़ में संतुलन बिगड़ा हुआ है।

जीवनशैली और उम्र का प्रभाव

45 वर्ष के बाद, खासकर महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण वात बढ़ने की प्रवृत्ति देखी जाती है। अनियमित भोजन, बार-बार ठंडी चीजें लेना, खाली पेट कॉफी या जूस पीना, देर रात भारी भोजन और दिन में सोना पाचन को कमजोर करते हैं। आधुनिक जीवन में तनाव, स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधि की कमी भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब दिनचर्या बिगड़ती है, तो पाचन अग्नि कमजोर होती है और गैस बनने लगती है। धीरे-धीरे यही स्थिति chronic gas problem का रूप ले सकती है।

लिवर और पाचन का छिपा संबंध

अगर डकार बहुत ज्यादा आ रही है, तो लिवर की जांच करवाना समझदारी है। फैटी लिवर के शुरुआती चरण में भी गैस, भारीपन और डकार आम लक्षण हो सकते हैं। लिवर पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब उसका काम प्रभावित होता है, तो भोजन सही तरह टूटता नहीं और गैस बनने लगती है। इसलिए बार-बार डकार को केवल पेट की समस्या मानना अधूरा दृष्टिकोण हो सकता है।

घर पर किए जा सकने वाले आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेद शरीर को शांत करने पर जोर देता है, खासकर वात को। रोज़ तिल के तेल से मालिश वात संतुलन में मदद करती है। गुनगुना पानी पीना पाचन के लिए बेहतर माना जाता है। जिन लोगों को ठंड ज्यादा लगती है, उनके लिए सोंठ का हल्का उबला पानी उपयोगी हो सकता है, जबकि पित्त प्रधान लोगों के लिए नागरमोथा का पानी सहायक माना जाता है। हरड़, मुलेठी और हल्के पाचन सुधारक पदार्थ चिकित्सकीय सलाह के साथ लिए जा सकते हैं। ये उपाय तुरंत चमत्कार नहीं करते, लेकिन धीरे-धीरे जड़ पर काम करते हैं।

मानसिक तनाव और डकार का संबंध

तनाव का सीधा असर पेट पर पड़ता है। आधुनिक रिसर्च भी gut-brain connection को स्वीकार करती है। जब मन अशांत होता है, तो पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। लगातार तनाव में रहने वाले लोगों में गैस, एसिडिटी और डकार ज्यादा देखी जाती है। योग, प्राणायाम, ध्यान, पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम कम करना केवल मानसिक स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि पाचन के लिए भी जरूरी है। शांत मन वात को शांत करता है।

कब डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए

हर डकार आयुर्वेदिक वात असंतुलन नहीं होती। अगर डकार के साथ सीने में दर्द, वजन तेजी से घटना, निगलने में दिक्कत या खून की उल्टी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है। यह अल्सर, GERD या किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। घरेलू उपाय तब तक ही सुरक्षित हैं जब तक गंभीर चेतावनी संकेत न हों।

शरीर की आवाज़ को समझिए

बार-बार डकार आना छोटी बात लग सकती है, लेकिन अगर यह रोज़ की समस्या बन जाए तो यह शरीर का संदेश है कि संतुलन बिगड़ रहा है। इसे मज़ाक या शर्म की बात समझकर दबाना समाधान नहीं है। सही भोजन, नियमित दिनचर्या, मानसिक शांति और आवश्यक जांच मिलकर समस्या को जड़ से सुधार सकते हैं। शरीर हमेशा संकेत देता है, सवाल यह है कि हम सुनते कब हैं।

Leave a Comment