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14/09/2026 12:06 pm

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Jharkhand Teachers-शिक्षकों के अधिकारों पर मोर्चा सख्त, आंदोलन का ऐलान

Jharkhand Teachers

झारखंड में शिक्षकों की लंबित सेवा-सुविधाओं, आर्थिक अधिकारों और विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर एक बार फिर आवाज तेज हुई है। रांची के अरगोड़ा हाउसिंग कॉलोनी स्थित शांति निवास में 28 अगस्त 2026 को झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मोर्चा के संयोजक डॉ. सुधांशु कुमार सिंह ने की। इसमें राज्य के शिक्षकों से जुड़े कई पुराने और लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सरकार से इनके समयबद्ध समाधान की मांग उठाई गई।

बैठक में मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद और प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने कहा कि शिक्षकों के आर्थिक और सेवाहितों की अनदेखी लंबे समय तक स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और यदि उनके सेवा अधिकार, वेतन संबंधी लाभ तथा कार्य परिस्थितियां ही स्पष्ट नहीं होंगी तो राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। “Jharkhand Teachers”

MACP और वेतनमान को लेकर सरकार से सीधी मांग

बैठक में MACP का लाभ सभी शिक्षकों को देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। मोर्चा का कहना है कि शिक्षकों को उनके लंबे सेवाकाल के अनुरूप मिलने वाले वित्तीय लाभ से वंचित रखना आर्थिक अन्याय है। संगठन ने दावा किया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद MACP को लेकर विभागीय स्तर पर ऐसी स्थिति बनी हुई है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मोर्चा ने छठे वेतन आयोग की 2006 की अनुशंसाओं के अनुरूप लंबित उत्क्रमित वेतनमान का लाभ देने की मांग भी दोहराई। शिक्षकों के अनुसार वेतन और सेवा से जुड़े ऐसे मामलों का सीधा असर उनके आर्थिक भविष्य पर पड़ता है। इसलिए इन विषयों को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया मानकर लंबे समय तक लंबित रखने के बजाय सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। “Jharkhand Teachers”

सीमित प्रतियोगिता परीक्षा में शिक्षकों को फिर अवसर देने की मांग

शिक्षक मोर्चा ने JPSC की सीमित उप समाहर्ता प्रतियोगिता परीक्षा में शिक्षकों को पूर्व की तरह अवसर देने की मांग भी उठाई। संगठन का तर्क है कि लंबे समय से शिक्षा विभाग में काम कर रहे अनुभवी शिक्षकों के लिए प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ने का अवसर होना चाहिए। इसके साथ ही अवर शिक्षा सेवा और राज्य शिक्षा सेवा के 50 प्रतिशत पदों को शिक्षकों के लिए आरक्षित करते हुए सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से रिक्त पदों को भरने की मांग की गई।

मोर्चा का कहना है कि यदि वर्षों से रिक्त पदों को समय पर भरा जाए तो इससे केवल शिक्षकों को पदोन्नति या करियर का अवसर ही नहीं मिलेगा, बल्कि शिक्षा प्रशासन में अनुभवी शिक्षकों की विशेषज्ञता का उपयोग भी किया जा सकेगा। संगठन ने इसे छात्र और शिक्षा हित से जोड़ते हुए जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। “Jharkhand Teachers”

स्कूलों में शिक्षक संकट को बताया बड़ी चुनौती

झारखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक उपलब्धता का सवाल इस पूरी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मोर्चा ने दावा किया कि राज्य के अनेक प्राथमिक और मध्य विद्यालय आज भी केवल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में NEP 2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की चुनौती और बढ़ जाती है।

उपलब्ध राष्ट्रीय आंकड़ों से भी झारखंड में शिक्षक उपलब्धता का प्रश्न गंभीर दिखाई देता है। PRS के 2026 के शिक्षा संबंधी विश्लेषण में झारखंड में 1,86,865 स्वीकृत शिक्षण पदों के मुकाबले 1,12,508 शिक्षक कार्यरत बताए गए हैं और 74,357 पद रिक्त दिखाए गए हैं, यानी करीब 40 प्रतिशत रिक्ति। इसी विश्लेषण में शिक्षक कमी को शिक्षा व्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया गया है।

झारखंड के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग के शिक्षकों की संख्या में कमी का रुझान सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 में शिक्षकों की कुल संख्या 2,24,787 थी, जो 2023-24 में घटकर 2,04,900 रह गई। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर भी शिक्षक संख्या में कमी दर्ज की गई। “Jharkhand Teachers”

घंटी आधारित शिक्षकों की नियुक्ति का सुझाव

शिक्षक मोर्चा ने कहा कि जब तक सभी रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक जरूरत के अनुसार घंटी आधारित शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है। संगठन का मानना है कि इससे एक तरफ विद्यालयों में तत्काल शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे, वहीं दूसरी ओर बेरोजगार शिक्षित युवाओं को भी रोजगार का अवसर मिलेगा।

हालांकि, मोर्चा की मांग का दीर्घकालिक समाधान नियमित और पर्याप्त शिक्षक नियुक्ति को ही माना गया है। संगठन का कहना है कि विद्यालयों में शिक्षक की कमी को किसी अस्थायी व्यवस्था के भरोसे लंबे समय तक नहीं छोड़ा जा सकता। शिक्षकों की पर्याप्त संख्या बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान देने, पाठ्यक्रम पूरा करने और नई शिक्षा नीति के अनुरूप गतिविधि आधारित शिक्षण को लागू करने के लिए जरूरी है। “Jharkhand Teachers”

TET को लेकर भी सामने आया पुराना विवाद

बैठक में 2010 से पहले नियुक्त प्राथमिक शिक्षकों को सेवा के अंतिम चरण में TET की बाध्यता से मुक्त करने की मांग की गई। मोर्चा ने तमिलनाडु सरकार के उदाहरण का हवाला देते हुए झारखंड में भी अध्यादेश जारी करने की मांग की है।

यह मुद्दा केवल झारखंड तक सीमित नहीं है। शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर देशभर में कानूनी और प्रशासनिक बहस चलती रही है। मार्च 2026 में झारखंड हाईकोर्ट के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णय का संदर्भ देते हुए कहा गया कि गैर-अल्पसंख्यक विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET न्यूनतम योग्यता से जुड़ा है। हालांकि उसी न्यायिक विमर्श में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाइयों पर भी विचार किया गया है।

झारखंड में 2026 की JTET परीक्षा के लिए भी आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की गई है, जिसमें प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति की पात्रता जांच के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रावधान बताया गया है। इसलिए TET से जुड़ी मांग को समझने के लिए कानूनी प्रावधान, न्यायालय के आदेश और राज्य की शिक्षक सेवा नियमावली—तीनों को साथ देखना जरूरी होगा। “Jharkhand Teachers”

मासिक RAIL परीक्षा और अतिरिक्त रिपोर्टिंग पर आपत्ति

मोर्चा ने JCERT की ओर से आयोजित मासिक RAIL परीक्षा के अतिरिक्त कुछ जिलों में जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि अलग-अलग स्तरों पर अतिरिक्त परीक्षा आयोजित करने और उसकी ऑनलाइन तथा ऑफलाइन रिपोर्टिंग के लिए शिक्षकों को बाध्य करने से उनके नियमित शिक्षण कार्य पर असर पड़ सकता है।

मोर्चा ने मांग की कि राज्य में शैक्षणिक गतिविधियों और मूल्यांकन की एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। उसका तर्क है कि शिक्षक का प्राथमिक दायित्व कक्षा में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है और प्रशासनिक या अतिरिक्त रिपोर्टिंग कार्यों का बोझ इस मूल उद्देश्य को प्रभावित नहीं करना चाहिए। “Jharkhand Teachers”

छुट्टियों के दौरान वेतन नहीं रोकने की मांग

शिक्षकों के सेवा अधिकारों से जुड़े मुद्दों में अर्जित अवकाश, मातृत्व अवकाश, चिकित्सा अवकाश और पितृत्व अवकाश के दौरान वेतन भुगतान का विषय भी शामिल किया गया। मोर्चा ने मांग की कि स्वीकृत अवकाश के दौरान शिक्षकों का वेतन किसी भी परिस्थिति में अनावश्यक रूप से स्थगित नहीं किया जाए और हर महीने समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियमित वेतन किसी भी सरकारी कर्मचारी का बुनियादी सेवा अधिकार है। यदि वेतन भुगतान में देरी होती है तो इसका सीधा असर शिक्षक और उनके परिवार की आर्थिक योजना पर पड़ता है। इसलिए वेतन भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने की जरूरत है। “Jharkhand Teachers”

विद्यालय विकास और मध्याह्न भोजन की राशि बढ़ाने की मांग

बैठक में विद्यालय विकास राशि और मध्याह्न भोजन की राशि के नियमित भुगतान का मुद्दा भी उठाया गया। मोर्चा ने कहा कि स्कूलों में दैनिक शैक्षणिक और बुनियादी गतिविधियों को संचालित करने के लिए समय पर राशि उपलब्ध होना जरूरी है।

संगठन ने बच्चों को दिए जाने वाले अंडे और फल की राशि को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप बढ़ाने की मांग भी की। उसका कहना है कि महंगाई बढ़ने के कारण पुराने दर पर पौष्टिक सामग्री उपलब्ध कराना कठिन हो सकता है। ऐसे में बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाओं के बजट को वास्तविक बाजार परिस्थितियों के अनुरूप समय-समय पर संशोधित करना जरूरी है। “Jharkhand Teachers”

शिक्षक नियुक्ति और रिक्त पदों का सवाल

झारखंड में शिक्षक नियुक्ति को लेकर हाल के महीनों में भी गतिविधियां हुई हैं। जून 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में 1,042 नव चयनित सहायक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे। इस दौरान राज्य की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने की बात सामने आई थी।

वहीं मई 2026 के एक सुप्रीम कोर्ट के फैसले में झारखंड के पारा शिक्षकों से जुड़े मामले में राज्य को हर शैक्षणिक वर्ष में चिह्नित रिक्तियों के 50 प्रतिशत पदों पर पारा शिक्षकों के लिए भर्ती प्रक्रिया चलाने संबंधी निर्देश दिए गए। फैसले में रिक्तियों के निर्धारण और नियमित समय-सारिणी के अनुसार भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।

इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि झारखंड में Teacher Recruitment 2026, JTET, शिक्षक रिक्तियां और सेवा शर्तें इस समय शिक्षा क्षेत्र की महत्वपूर्ण चर्चाओं में हैं। “Jharkhand Teachers”

NEP 2020 के लक्ष्य और जमीनी चुनौतियां

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाना है। इसमें बच्चों के समग्र विकास, बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान, कौशल आधारित शिक्षा तथा शिक्षण की गुणवत्ता पर जोर दिया गया है। लेकिन नीति के लक्ष्यों को जमीन पर लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षक, उचित आधारभूत संरचना और प्रभावी शैक्षणिक सहयोग व्यवस्था जरूरी है।

यही वजह है कि शिक्षक मोर्चा ने अपनी मांगों को केवल कर्मचारियों के सेवा हितों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता से जोड़कर प्रस्तुत किया। संगठन का तर्क है कि यदि विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे या शिक्षकों को लगातार अतिरिक्त प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाएगा, तो कक्षा में बच्चों को अपेक्षित समय और ध्यान देना मुश्किल हो सकता है। “Jharkhand Teachers”

सरकार से समयबद्ध समाधान की मांग

बैठक के अंत में मोर्चा में शामिल सभी घटक शिक्षक संघों ने लंबित मांगों को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। संगठन ने सरकार से तत्काल सकारात्मक पहल करने और प्रत्येक मांग पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने की मांग की। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वह केवल आश्वासन नहीं बल्कि लंबित सेवा और शिक्षा संबंधी मुद्दों के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई चाहता है।

संगठन ने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों का समाधान और स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उसके अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब शिक्षक अपने सेवा अधिकारों और कार्य परिस्थितियों को लेकर आश्वस्त हों।

मांगें नहीं मानी गईं तो चरणबद्ध आंदोलन

झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने बैठक में चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन की कार्ययोजना बनाने का निर्णय लिया। मोर्चा का कहना है कि सरकार यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक और समयबद्ध कार्रवाई नहीं करती है तो शिक्षक संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।

बैठक में प्रदेश संयोजक अमीन अहमद, विजय बहादुर सिंह, प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार दास, आशुतोष कुमार, सुमेश कुमार मिश्रा, पंकज कुमार, राकेश श्रीवास्तव और अजय कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। ऑनलाइन माध्यम से अशोक कुमार मिश्रा, मंगलेश्वर उरांव, शैलेन्द्र सुमन और मुमताज अहमद ने भी मांगों का समर्थन करते हुए आगे की कार्ययोजना पर सहमति जताई। “Jharkhand Teachers”

शिक्षक आंदोलन के केंद्र में अब सेवा अधिकार और शिक्षा व्यवस्था दोनों

झारखंड में शिक्षकों की यह लड़ाई अब केवल वेतन या सेवा लाभ तक सीमित दिखाई नहीं दे रही है। MACP, उत्क्रमित वेतनमान, JTET/TET, शिक्षक नियुक्ति, रिक्त पद, अवकाश के दौरान वेतन, स्कूलों में शिक्षक संकट और NEP 2020 जैसे मुद्दे एक साथ सामने आए हैं। एक ओर शिक्षक संगठन अपने सेवा अधिकारों के समाधान की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य की शिक्षा व्यवस्था में मौजूद शिक्षक रिक्तियों का सवाल भी लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।

आने वाले दिनों में सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है, यह महत्वपूर्ण होगा। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में शिक्षक नियुक्ति, TET और विद्यालयों में शिक्षक उपलब्धता को लेकर पहले से ही कई स्तरों पर गतिविधियां चल रही हैं। यदि सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच संवाद के जरिए लंबित मामलों का समाधान निकलता है तो इसका सीधा लाभ शिक्षकों के साथ-साथ राज्य के लाखों विद्यार्थियों को भी मिल सकता है। वहीं मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में प्रस्तावित चरणबद्ध आंदोलन झारखंड की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। “Jharkhand Teachers”

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