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04/11/2026 7:17 pm

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Setu Bandhasana- यह कमर-कूल्हों और पैरों के साथ पेट के लिए भी है फायदेमंद

Setu Bandhasana

सुबह की योग दिनचर्या में आज का नया आसन है सेतु बंधासन (Setu Bandhasana), जिसे सामान्य रूप से Bridge Pose कहा जाता है। इसमें पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ा जाता है और पैरों व कंधों को जमीन पर रखते हुए कूल्हों को ऊपर उठाया जाता है। देखने में यह सरल लगता है, लेकिन सही तकनीक न होने पर पूरा दबाव कमर या गर्दन पर जा सकता है। इसलिए इस आसन में ऊंचा उठना लक्ष्य नहीं, बल्कि पैरों, कूल्हों, धड़ और सांस के बीच नियंत्रित तालमेल ज्यादा महत्वपूर्ण है।

लंबे समय तक बैठने वालों के लिए क्यों खास हो सकता है सेतु बंधासन

आज लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना बहुत आम है। ऐसी दिनचर्या में कूल्हों और जांघों के आसपास की मांसपेशियां कम सक्रिय रह सकती हैं। सेतु बंधासन(Setu Bandhasana) में कूल्हों को ऊपर उठाने के दौरान gluteal muscles, hamstrings और शरीर के पीछे की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। साथ ही छाती के सामने का हिस्सा खुलता है।

सेतु बंधासन शरीर में किस तरह की स्थिति बनाता है

इस आसन में रीढ़ सामान्य सीधी स्थिति से हल्की extension में जाती है। पैरों के तलवे जमीन पर दबे रहते हैं और घुटने मुड़े होते हैं। कूल्हे ऊपर उठते हैं जबकि सिर, गर्दन और कंधे जमीन पर टिके रहते हैं।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कूल्हों को जितना ऊंचा उठाया जाए, उतना ही अच्छा आसन होगा—ऐसा नहीं है। यदि ऊंचा उठाते समय कमर में दबाव, गर्दन में तनाव या घुटनों के बाहर की ओर फैलने की समस्या पैदा हो रही है, तो ऊंचाई कम करना अधिक सुरक्षित है।

आसन शुरू करने की सही तैयारी

योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों के तलवों को जमीन पर रखें। पैरों को लगभग कूल्हों की चौड़ाई पर रखें। हाथ शरीर के दोनों ओर रहें और हथेलियां जमीन की तरफ रखी जा सकती हैं।

पैरों को शरीर से इतना पास रखें कि कूल्हे उठाते समय घुटनों के नीचे पैर का नियंत्रण बना रहे। Bridge Pose में पैरों को जमीन पर रखते हुए घुटनों को मोड़ने और हाथों को शरीर के पास रखा जाए.

सांस अंदर लेते हुए कूल्हों को ऊपर उठाएं

अब धीरे-धीरे सांस अंदर लें और पैरों को जमीन में दबाते हुए कूल्हों को ऊपर उठाना शुरू करें। पहले बहुत ज्यादा ऊंचाई हासिल करने की कोशिश न करें। कल्पना करें कि जांघें आगे की दिशा में और कूल्हे ऊपर की दिशा में जा रहे हैं।

कंधे और सिर जमीन पर बने रहें। गर्दन को मोड़कर अपने पैरों या शरीर को देखने की कोशिश न करें। यह सावधानी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आसन के दौरान गर्दन को अनावश्यक रूप से घुमाने पर उसका भार बदल सकता है। “Setu Bandhasana”

घुटने किस दिशा में रहने चाहिए

सेतु बंधासन (Setu Bandhasana) में घुटनों को पैरों की दिशा में रखना महत्वपूर्ण है। घुटनों के बाहर की ओर गिरने या अंदर की ओर एक-दूसरे से टकराने से बचें। दोनों पैरों पर लगभग समान दबाव रखें।

अगर किसी व्यक्ति को घुटनों की स्थिति नियंत्रित करने में परेशानी होती है तो कूल्हों को कम ऊंचाई तक उठाना बेहतर है। आसन में स्थिरता आने के बाद ही hold का समय बढ़ाना चाहिए।

कमर से नहीं, पैरों और कूल्हों से उठने की कोशिश करें

शुरुआती लोगों में एक आम गलती यह होती है कि वे कूल्हों को उठाने के बजाय कमर को ज्यादा मोड़ने लगते हैं। इससे आसन देखने में ऊंचा जरूर दिखाई दे सकता है, लेकिन कमर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

पैरों के तलवों को जमीन में दबाने और कूल्हों को नियंत्रित तरीके से उठाने पर शरीर के पीछे की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। अगर आपको महसूस हो कि सारा भार कमर के निचले हिस्से में आ रहा है, तो तुरंत ऊंचाई कम करें और पैरों की स्थिति दोबारा ठीक करें।

सांस छोड़ते हुए आसन से बाहर आएं

आसन में कुछ सहज सांसों तक बने रहने के बाद सांस छोड़ते हुए कूल्हों को धीरे-धीरे नीचे लाएं। रीढ़ को अचानक जमीन पर न पटकें। पहले ऊपरी पीठ, फिर मध्य भाग और अंत में कूल्हों को आराम से नीचे आने दें। अगर आप इस आसन को होल्ड करते है तो श्वांस रोके नहीं यानि श्वांस की गति को सामान्य रखिए.

शुरुआत कितनी देर और कितनी बार करें

अगर आपने पहले इस आसन का अभ्यास नहीं किया है तो 10 से 15 सेकंड के दो या तीन चक्र पर्याप्त शुरुआत हो सकते हैं। यदि शरीर आराम से इसे स्वीकार करता है तो धीरे-धीरे 20 से 30 सेकंड तक बढ़ाया जा सकता है। जब इसमे आपको कमांड हो जाए तो 10 से 15 बार दुहरा सकते है.

सेतु बंधासन (Setu Bandhasana) में श्वास कैसी होनी चाहिए

इस आसन में सांस रोकना आवश्यक नहीं है। कूल्हे उठाते समय सांस अंदर लेना और सामान्य रूप से सांस लेते रहना व्यावहारिक तरीका है। हर सांस के साथ पेट और पसलियों की सहज गति को महसूस करें।

यदि लंबे समय तक सांस रोकने पर ही आप आसन में टिक पा रहे हैं तो hold बहुत कठिन है। ऐसी स्थिति में ऊंचाई या अवधि कम करना चाहिए। खासकर रक्तचाप या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए सांस रोककर जोर लगाने से बचना महत्वपूर्ण है।

इस आसन में कौन सी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं

कूल्हों को ऊपर उठाने के दौरान मुख्य रूप से gluteal muscles और hamstrings काम करते हैं। जांघों तथा धड़ को स्थिर रखने वाली मांसपेशियां भी सक्रिय रहती हैं। यही कारण है कि यह आसन केवल stretching नहीं है; इसमें हल्का strength component भी मौजूद है।

छाती और कंधों के लिए इसका क्या अर्थ है

कूल्हों के ऊपर उठने और शरीर के सामने वाले हिस्से के खुलने से छाती तथा कंधों के आसपास खिंचाव महसूस हो सकता है। लंबे समय तक आगे झुककर काम करने वाले व्यक्ति को यह स्थिति अलग तरह का movement दे सकती है।

क्या यह आसन कमर की जकड़न में मदद कर सकता है

यदि जकड़न हल्की है और किसी चोट या गंभीर बीमारी से संबंधित नहीं है, तो controlled movement कुछ लोगों को आरामदायक लग सकता है। सेतु बंधासन में कूल्हों और रीढ़ को ऐसी स्थिति मिलती है जो लंबे समय तक बैठे रहने से अलग है।

लेकिन यदि कमर दर्द आसन करते समय बढ़ता है, पैर में दर्द फैलता है, सुन्नपन या कमजोरी होती है, तो इसे ‘जकड़न निकालने’ के नाम पर जारी नहीं रखना चाहिए। ऐसे लक्षण चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत का संकेत हो सकते हैं।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य संस्थानों की सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी

योग के जानने वालों का कहना है कि योग स्वस्थ लोगों में उचित तरीके से और प्रशिक्षित मार्गदर्शन में सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अन्य physical activity की तरह इसमें भी चोट हो सकती है। मोच और muscle strain सामान्य चोटों में शामिल हैं। उम्रदराज लोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी की जरूरत हो सकती है।

गर्दन की समस्या वाले लोग विशेष सावधानी रखें

सेतु बंधासन (Setu Bandhasana) में गर्दन और सिर जमीन पर रहते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि गर्दन पर कोई भार नहीं आता। अगर व्यक्ति कंधों को गलत तरीके से position करता है या गर्दन को आसन के दौरान घुमाता है तो असुविधा पैदा हो सकती है।

जिन लोगों को हाल में गर्दन की चोट, cervical spine की समस्या या surgery हुई है, उन्हें बिना चिकित्सकीय और प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन नहीं करना चाहिए। योग संस्थानों की सलाह भी neck या back injury की स्थिति में इस आसन से बचने या चिकित्सकीय सलाह लेने की ओर संकेत करती है।

हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को क्या ध्यान रखना चाहिए

सेतु बंधासन को कुछ योग स्रोत high blood pressure वाले लोगों के लिए भी बताते हैं, लेकिन यह कोई सार्वभौमिक चिकित्सकीय अनुमति नहीं है।

गर्भावस्था और हाल की सर्जरी में सावधानी क्यों जरूरी है

गर्भावस्था में शरीर का गुरुत्व केंद्र बदलता है और कुछ समय बाद पीठ के बल लंबे समय तक लेटना भी असुविधाजनक हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान सेतु बंधासन का अभ्यास व्यक्ति की pregnancy stage और medical condition के अनुसार modify किया जाना चाहिए।

इसी तरह पेट, कूल्हे, पीठ या गर्दन की हाल की surgery के बाद यह आसन स्वयं से शुरू करना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में डॉक्टर या physiotherapist की अनुमति और प्रशिक्षित prenatal/therapeutic yoga instructor का मार्गदर्शन अधिक सुरक्षित है।

osteoporosis में इसे लेकर क्यों सावधानी जरूरी है

यहां एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक nuance है। सेतु बंधासन में रीढ़ मुख्यतः extension की दिशा में जाती है, इसलिए इसे उन spinal-flexion poses के समान नहीं माना जाना चाहिए जिनके संबंध में osteoporosis में fracture risk पर चिंता जताई गई है। फिर भी osteoporosis वाले व्यक्ति को कोई भी नया spinal exercise व्यक्तिगत assessment के बाद ही शुरू करना बेहतर है। Setu Bandhasana

शुरुआती लोगों के लिए supported bridge ज्यादा समझदार विकल्प हो सकता है

आज की तस्वीर में दिखाया गया supported bridge एक उपयोगी modification है। इसमें कूल्हों के नीचे योग ब्लॉक या मजबूत सहारा रखा जाता है, ताकि व्यक्ति को कूल्हे सक्रिय रूप से बहुत ऊंचे रखने की जरूरत न पड़े।

लेकिन block को रीढ़ के निचले हिस्से या कमर पर गलत जगह रखना उचित नहीं है। सहारा pelvis/sacrum के नीचे स्थिर तरीके से होना चाहिए और शरीर को दर्द या दबाव महसूस नहीं होना चाहिए। यदि सहारे के बावजूद असुविधा हो तो अभ्यास रोक देना बेहतर है।

सेतु बंधासन में होने वाली सबसे आम गलतियां

सबसे आम गलती है कूल्हों को अधिकतम ऊंचाई तक उठाने की कोशिश करना। इसके साथ दूसरी गलती होती है—घुटनों का बाहर फैलना या अंदर गिरना। तीसरी गलती है गर्दन को घुमाकर आसन को देखना। चौथी गलती है कमर में तीखा मोड़ बनाकर यह महसूस करना कि pose ‘ज्यादा गहरा’ हो गया है।

एक और समस्या है सांस रोकना। यदि शरीर को स्थिर रखने के लिए सांस रोकनी पड़ रही है तो व्यक्ति अपनी वर्तमान क्षमता से आगे जा रहा है। Setu Bandhasana

क्या आसन के दौरान कंधे पीछे ले जाने चाहिए

उन्नत अभ्यास में कुछ योग परंपराएं कंधों को हल्का अंदर की ओर लाकर हाथों को पीछे जोड़ने का निर्देश देती हैं। लेकिन शुरुआती व्यक्ति को इसकी आवश्यकता नहीं है। हाथ शरीर के बगल में रखकर भी सेतु बंधासन पर्याप्त रूप से किया जा सकता है। Setu Bandhasana

सुबह के पांच मिनट में इसे कैसे शामिल करें

सुबह इसे करने के लिए पहले कुछ सामान्य movement के बाद पीठ के बल लेटें। एक बार बिना उठाए घुटनों को मोड़कर पैरों की position जांचें। फिर सांस अंदर लेते हुए कूल्हों को धीरे से उठाएं, 10 से 15 सेकंड सहज सांसों के साथ रुकें और सांस छोड़ते हुए नीचे आएं। कुछ क्षण आराम करें और फिर दूसरा चक्र करें।

अगर शरीर सहज महसूस करे तो तीसरे चक्र में hold थोड़ा बढ़ाया जा सकता है। शुरुआत में तीन छोटे, नियंत्रित चक्र पांच मिनट तक जबरदस्ती एक लंबे hold से अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं।

क्या रात में भी किया जा सकता है

हां, यदि व्यक्ति को यह आरामदायक लगता है तो शाम के समय भी इसे हल्के योग routine का हिस्सा बनाया जा सकता है। लेकिन यदि इसे रात में किया जाए तो बहुत लंबे या बहुत कठिन hold के बजाय धीमी सांस और हल्की intensity रखना बेहतर है।

कब तुरंत रुक जाना चाहिए

आसन करते समय हल्का muscular effort सामान्य हो सकता है, लेकिन तेज या चुभता हुआ दर्द सामान्य नहीं है। गर्दन में दर्द, सीने में असहजता, चक्कर, असामान्य सांस फूलना, पैर में सुन्नपन या कमर का दर्द बढ़ना महसूस हो तो आसन छोड़ दें। Setu Bandhasana

आज की वैज्ञानिक सीख

सेतु बंधासन का सबसे व्यावहारिक मूल्य यह है कि एक ही सरल स्थिति में कूल्हे, पैर, धड़ और रीढ़ को सक्रिय movement मिलता है। नियमित योग कार्यक्रमों पर उपलब्ध शोध कमर दर्द, physical function और कुछ मानसिक स्वास्थ्य परिणामों में लाभ की संभावना दिखाता है। Setu Bandhasana

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