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01/09/2026 12:08 pm

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आदिवासी संगठनों ने कांग्रेस गठबंधन सरकार और चर्च पर लगाए गंभीर आरोप

Aadivasi Eekta Mahajutan Rally

रांची-आदिवासी संगठनों ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया है कि जिस कार्यक्रम को पहले ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ के नाम से प्रचारित किया गया था, वह बाद में चर्च और कांग्रेस गठबंधन सरकार की रैली में तब्दील हो गया। संगठनों का कहना है कि कार्यक्रम के स्वरूप में हुए बदलाव को लेकर आदिवासी समाज के बीच सवाल खड़े हुए हैं। संयुक्त बयान में दावा किया गया है कि पहले आदिवासी एकता महाजुटान रैली का नाम सामने आया, इसके बाद चर्च की भागीदारी को लेकर विरोध हुआ और 30 तारीख तक पहुंचते-पहुंचते यह कार्यक्रम कांग्रेस गठबंधन सरकार की रैली के रूप में सामने आया।

चर्च की एंट्री को लेकर आदिवासी संगठनों ने जताया विरोध

संयुक्त प्रेस बयान में आदिवासी संगठनों ने कहा कि रैली में चर्च की एंट्री को लेकर आदिवासी संगठनों की ओर से विरोध किया गया। संगठनों का आरोप है कि विरोध के बावजूद कार्यक्रम का स्वरूप बदल गया और अंततः चर्च द्वारा आयोजित बताई जा रही रैली पर कांग्रेस गठबंधन सरकार की मुहर लग गई। संगठनों ने इसी बदलाव को लेकर कार्यक्रम की प्रकृति और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं।

बंधु तिर्की को बताया चर्च का सबसे बड़ा चेहरा

आदिवासी संगठनों ने अपने संयुक्त बयान में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। बयान में कहा गया है कि बंधु तिर्की “चर्च का सबसे बड़ा चेहरा और सबसे बड़ा मास्टरमाइंड” हैं। संगठनों का आरोप है कि बंधु तिर्की की मंशा आदिवासी समाज के नेतृत्व और अगुवाई को अपने तथा चर्च के हाथों में रखने की है। यह आरोप आदिवासी संगठनों द्वारा जारी संयुक्त प्रेस बयान में लगाया गया है।

‘आदिवासी समाज चाल को समझ नहीं पा रहा’

संयुक्त बयान में आदिवासी संगठनों ने कहा कि बंधु तिर्की की कथित मंशा को लेकर उनका मानना है कि “हमारे भोले-भाले आदिवासी समाज इनका चाल को समझ नहीं पा रहे हैं।” संगठनों ने इसी आधार पर आदिवासी समाज से जुड़े आंदोलनों और उनके नेतृत्व को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि, ये सभी आरोप संबंधित आदिवासी संगठनों के संयुक्त प्रेस बयान में लगाए गए हैं।

ईसाई और मसीही नाम से आंदोलन पर आपत्ति नहीं

आदिवासी संगठनों ने अपने बयान में कहा कि यदि चर्च या ईसाई समुदाय ईसाई, मसीही, क्रिस्तान, विश्वासी या ख्रीस्तीय के नाम से अपना आंदोलन करता है, तो उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है। संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति उस स्थिति से है, जब किसी आंदोलन या कार्यक्रम के लिए आदिवासी समाज के नाम का इस्तेमाल किया जाता है और उसमें चर्च की भूमिका होने का आरोप लगाया जाता है।

‘आदिवासियों के नाम से आंदोलन हुआ तो पुरजोर विरोध’

संयुक्त प्रेस बयान में आदिवासी संगठनों ने कहा कि भविष्य में यदि चर्च अपने धार्मिक या सामुदायिक नाम से आंदोलन करता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन यदि आदिवासियों के नाम से कोई आंदोलन किया जाता है तो उसका “पुरजोर विरोध” किया जाएगा। संगठनों ने इसे आदिवासी पहचान और नेतृत्व से जुड़ा मुद्दा बताया है।

रैली को पूरी तरह विफल बताया

विभिन्न आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से चर्च द्वारा आयोजित बताई गई कांग्रेस रैली को पूरी तरह विफल बताया है। प्रेस बयान में संगठनों ने कहा कि जिस कार्यक्रम को आदिवासी एकता महाजुटान रैली के तौर पर सामने लाया गया था, उसका बाद में स्वरूप बदलकर कांग्रेस गठबंधन सरकार की रैली के रूप में सामने आना उनके विरोध का प्रमुख कारण है।

संयुक्त प्रेस बयान में कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल

इस संयुक्त प्रेस बयान में मुख्य पाहन जगलाल पाहन, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव, झारखंड आदिवासी विकास समिति धुर्वा के अध्यक्ष मेघा उरांव, मुखिया संघ के अध्यक्ष सोमा उरांव और सन्नी टोप्पो के नाम शामिल हैं। बयान के अंत में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा और प्रधान महासचिव अशोक मुंडा के नाम दिए गए हैं।

आदिवासी नेतृत्व को लेकर संगठनों ने रखी अपनी स्थिति

संयुक्त बयान के माध्यम से आदिवासी संगठनों ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि आदिवासी समाज के नाम पर होने वाले किसी भी आंदोलन या कार्यक्रम में नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर उनकी अपनी स्पष्ट आपत्ति है। संगठनों ने चर्च और आदिवासी संगठनों की गतिविधियों को अलग-अलग रखने की मांग करते हुए कहा है कि धार्मिक पहचान के नाम पर आंदोलन करने की स्वतंत्रता से उन्हें कोई समस्या नहीं है, लेकिन आदिवासी पहचान के नाम पर होने वाले आंदोलन का वे विरोध करेंगे।

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