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20/09/2026 5:23 pm

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केंद्रीय सरना समिति की प्रेस वार्ता, आदिवासी पर्व-त्योहारों को लेकर ईसाई संस्थानों पर आरोप

Sarna Samiti

रांची, 18 सितंबर 2026: केंद्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी/जनजाति सामाजिक संगठनों की ओर से प्रेस क्लब रांची में संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता का मुख्य विषय ईसाइयों द्वारा चर्च/गिरजाघरों में करम देवता को गाड़कर कथित रूप से अपमानित और खिलवाड़ किए जाने के संबंध में था। इस दौरान केंद्रीय सरना समिति और विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस विषय को लेकर अपनी आपत्ति और विरोध दर्ज कराया।

‘खड़िया धर्म और संस्कृति’ पुस्तक का किया उल्लेख

प्रेस वार्ता में ईसाइयों द्वारा लिखित बताई गई ‘खड़िया धर्म और संस्कृति’ पुस्तक तथा ‘आदिवासी मिस्सा संग्रह’ का उल्लेख करते हुए संगठनों ने अपनी बात रखी। उनके अनुसार, इन पुस्तकों में कहा गया है कि वैटिकन विश्व सभा के निर्देशन के आधार पर आदिवासी त्योहारों का अध्ययन एवं संशोधन किया गया और अब उन्हें ख्रीस्तीय ढंग से अर्थात ईसाई विधि से सरहुल और करम आदि त्योहारों को मनाया जा सकता है।

आदिवासी संगठनों का कहना है कि इसी निर्देशन के अनुसार आदिवासियों के आराध्य देव करम देवता को चर्च/गिरजाघरों के अंदर बालू के टीना में खड़ा कर उनके आराध्य देवता का अपमान किया जा रहा है। “Sarna Samiti”

परंपरागत पूजा पद्धति छोड़ने के बाद पर्व मनाने पर सवाल

प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी/जनजाति संगठनों ने कहा कि आदिवासियों के पर्व-त्योहार, संस्कार, संस्कृति, परंपरागत रूढ़ि-प्रथा और पूजा पद्धति आदि को त्यागने के बाद आदिवासी धर्म और पूजा पद्धति से उनका कोई लेना-देना नहीं रह जाता है।

संगठनों का आरोप है कि इसके बावजूद आदिवासी बने रहने के लिए आस्था से नहीं, बल्कि दिखावे के लिए आदिवासियों के पर्व-त्योहारों को मनाने का ढोंग किया जा रहा है। प्रेस वार्ता में संगठनों ने इसी विषय को लेकर अपनी आपत्ति व्यक्त की। “Sarna Samiti”

करम पूजा की रात को लेकर भी जताई आपत्ति

प्रेस वार्ता में आदिवासी संगठनों ने करम पूजा की रात को लेकर कही जाने वाली बातों पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, आदिवासी समाज भादो एकादशी के दिन करम देवता की पूरे विधि-विधान, आस्था और उल्लास के साथ पूजा करता है। इस अवसर पर भाई-बहनों, माता-पिता और समाज के लोगों के साथ रात भर सामूहिक नृत्य और संगीत होता है।

संगठनों ने कहा कि इस परंपरा को लेकर ईसाइयों द्वारा यह कहा जाता है कि करम पूजा की रात को नाचते-गाते हैं और इस अवसर पर लड़का-लड़की, स्त्री-पुरुष जिस किसी के साथ अपना आचरण खराब करते हैं। उनके अनुसार इसे ‘बुरा करम’ बताया जाता है और आदिवासी समाज से इसे हटाने की बात कही जाती है। केंद्रीय सरना समिति और आदिवासी संगठनों ने इसे अपने समाज के लिए बहुत आपत्तिजनक बताया। “Sarna Samiti”

‘बुरा करम’ कहे जाने पर संगठनों का विरोध

आदिवासी संगठनों ने कहा कि एक तरफ उनके पर्व-त्योहारों में से करम को ‘बुरा करम’ कहना और इसे आदिवासी समाज से ही हटाने की बात करना आपत्तिजनक है। वहीं दूसरी तरफ ईसाइयों द्वारा आदिवासी त्योहारों को संशोधित कर ख्रीस्तीय ढंग से मनाने की बात कही जा रही है।

संगठनों ने सवाल उठाया कि आदिवासियों के पर्व-त्योहारों को संशोधित करने वाले आखिर ऐसा करने वाले होते कौन हैं। केंद्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी संगठनों ने इसे सरासर गलत बताते हुए इस पर विरोध जताया। “Sarna Samiti”

16 सितंबर को उपायुक्त को सौंपा गया लिखित आवेदन

इस विषय को लेकर केंद्रीय सरना समिति एवं विभिन्न आदिवासी संगठनों ने 16 सितंबर 2026 को रांची के उपायुक्त को लिखित रूप से आवेदन देकर इस पर रोक लगाने की मांग की है। संगठनों ने कहा कि उन्होंने अपनी आपत्ति और मांग को प्रशासन के समक्ष लिखित रूप में रखा है।

प्रेस वार्ता में संगठनों की ओर से कहा गया कि ईसाई अपना पर्व-त्योहार मनाएं, इसमें उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन अगर आदिवासियों के पर्व-त्योहारों को आदिवासियों के नाम से धर्म परिवर्तन कर ईसाई लोग मनाएंगे, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

आदिवासी पर्व-त्योहारों को लेकर स्पष्ट विरोध

प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति और विभिन्न आदिवासी/जनजाति संगठनों ने कहा कि उनके विरोध का मुख्य विषय आदिवासियों के पर्व-त्योहारों और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा है। संगठनों ने कहा कि आदिवासी समाज अपने पर्व-त्योहारों को अपनी आस्था, परंपरा और पूजा पद्धति के अनुसार मनाता है।

संगठनों ने चर्च/गिरजाघरों में करम देवता को स्थापित किए जाने और आदिवासी पर्व-त्योहारों को कथित रूप से संशोधित कर ईसाई विधि से मनाने के विषय को लेकर अपनी आपत्ति दोहराई।

प्रेस वार्ता में कई प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद

प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पहान जगलाल पहान, जनजाति सुरक्षा मंच के संदीप उरांव, डॉ. बिरसा उरांव, सोमा उरांव, अंजलि लकड़ा, शनि उरांव, अजय कुमार भोगता और झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

इसके अलावा रवि प्रकाश उरांव, विमल पहान, सतीश उरांव, विश्वकर्मा पहचान, अविनाश मुंडा, प्रदीप लकड़ा, राकेश मुंडा, संतोष मुंडा, अंजन मुंडा, विक्रम उरांव, रानी करमाली, रुकमनी देवी, मुकेश मुंडा, मुन्ना हेंब्ररोम, आशीष मुंडा, गुड्डू पहान, रवि करमाली, अजय मुंडा और प्रदीप मुंडा सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

आदिवासी संगठनों ने आगे भी विरोध की बात कही

प्रेस वार्ता में संगठनों ने स्पष्ट किया कि ईसाई समुदाय अपने पर्व-त्योहार मनाए, इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनका विरोध आदिवासियों के पर्व-त्योहारों को आदिवासी नाम और पहचान के साथ ईसाई विधि से मनाने को लेकर है। संगठनों ने कहा कि यदि ऐसा किया जाता है तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

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