Explore

Search

17/10/2026 4:07 am

[the_ad id="14531"]

Pawanmuktasana- गैस, कब्ज और पेट की चर्बी के लिए कितना फायदेमंद?

Pawanmuktasana

सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेटता है और एक पैर को घुटने से मोड़कर छाती और पेट की ओर लाता है। हाथों की उंगलियों को फंसाकर घुटने को पकड़ने के बाद सांस के साथ शरीर के ऊपरी हिस्से को उठाने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे वापस सामान्य स्थिति में आया जाता है। यही प्रक्रिया दूसरे पैर और फिर दोनों पैरों के साथ की जा सकती है।

पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) का नाम संस्कृत के ‘पवन’ यानी वायु और ‘मुक्त’ यानी मुक्त करना शब्दों से बना है। योग परंपरा में इसे ऐसा आसन माना जाता है जो पेट और आंतों में जमा गैस को बाहर निकालने तथा पेट के क्षेत्र में हल्का दबाव और खिंचाव पैदा करने में मदद करता है।

इसे करने का सही तरीका क्या है?

सबसे पहले समतल और आरामदायक स्थान पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को सीधा रखें और हाथों को शरीर के बगल में आराम की स्थिति में रखें। शरीर को ढीला छोड़ते हुए कुछ सामान्य सांस लें। इसके बाद बाएं पैर को घुटने से मोड़कर धीरे-धीरे छाती की ओर लाएं और दोनों हाथों से घुटने या पिंडली को आराम से पकड़ें।

अब सांस की गति को नियंत्रित करते हुए, खासकर सांस छोड़ते समय, घुटने को हल्के दबाव के साथ पेट की तरफ लाएं। यदि आपके लिए सहज हो तो सिर और कंधों को जमीन से थोड़ा ऊपर उठाकर नाक या ठोड़ी को घुटने के करीब लाने का प्रयास किया जा सकता है। लेकिन गर्दन पर जोर लगाकर सिर को घुटने तक पहुंचाना जरूरी नहीं है। आधिकारिक योग प्रोटोकॉल में भी सांस और शरीर की गति के तालमेल पर जोर दिया गया है।

इसके बाद धीरे-धीरे सिर और कंधों को नीचे रखें तथा पैर को सीधा कर दें। कुछ सामान्य सांस लेने के बाद यही प्रक्रिया दूसरे पैर से करें। अंत में दोनों घुटनों को छाती की ओर लाकर दोनों हाथों से पकड़कर अभ्यास किया जा सकता है। शुरुआत में गति धीमी रखें और किसी भी स्थिति में झटका देकर घुटने या सिर को शरीर की ओर न खींचें।

कितनी बार करना चाहिए?

Pawanmuktasana अभ्यास में प्रत्येक पैर को 10-10 बार और दोनों पैरों को 10 बार करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है। यदि आप पहली बार यह अभ्यास शुरू कर रहे हैं तो सीधे 10 दोहराव करने के बजाय पहले लगभग 3 से 5 बार प्रत्येक तरफ से शुरू करना अधिक आरामदायक हो सकता है। शरीर अभ्यस्त होने पर धीरे-धीरे 8 से 10 दोहराव तक बढ़ाया जा सकता है।

योग में संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मुद्रा, सहज सांस और बिना दर्द के अभ्यास है। यदि 10 बार करने पर कमर, गर्दन, घुटने या पेट में दर्द होने लगे तो संख्या कम कर दें। पवनमुक्तासन के सामान्य निर्देशों में भी कुछ संस्करणों में 3–5 बार हल्का रॉक या रोल करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए।

पेट की गैस और पेट फूलने में कैसे मदद कर सकता है?

जब घुटने को पेट की तरफ लाया जाता है तो पेट के क्षेत्र पर हल्का दबाव बनता है। योग परंपरा में इसी कारण इसे गैस निकालने और पेट फूलने की समस्या में उपयोगी माना जाता है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की सामग्री में भी पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) को अत्यधिक गैस, पेट फूलने और कब्ज से राहत देने वाला अभ्यास बताया गया है।

हालांकि किसी व्यक्ति को लगातार गैस, पेट दर्द, पेट फूलना या कब्ज की समस्या रहती है तो केवल आसन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बार-बार होने वाले लक्षणों के पीछे भोजन संबंधी समस्या, कब्ज, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी या अन्य कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।

कब्ज और पाचन के लिए क्यों किया जाता है?

पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) में पेट और पेल्विस के आसपास हल्का संकुचन और खिंचाव होता है। पारंपरिक योग साहित्य में इसे पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। आधिकारिक योग प्रोटोकॉल में इसे कब्ज कम करने, गैस से राहत और पेट फूलने की अनुभूति कम करने में सहायक बताया गया है।

लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि केवल इस आसन से पुरानी कब्ज की समस्या हमेशा ठीक हो जाएगी। कब्ज में पानी, फाइबर, नियमित शारीरिक गतिविधि और भोजन की आदतों की भी बड़ी भूमिका होती है।

कमर और पेट की मांसपेशियों के लिए क्या फायदा हो सकता है?

इस अभ्यास में पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और शरीर के निचले हिस्से में हल्का खिंचाव आता है। कुछ योग स्रोत इसे पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने तथा कमर के तनाव को कम करने में सहायक बताते हैं।

लेकिन यदि किसी व्यक्ति को पहले से कमर का गंभीर दर्द, नसों से जुड़ी समस्या, साइटिका या स्लिप डिस्क है तो इसी खिंचाव के कारण समस्या बढ़ भी सकती है। इसलिए कमर की बीमारी वाले व्यक्ति को इसे अपने स्तर पर शुरू करने के बजाय डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

क्या इससे पेट की चर्बी कम होती है?

यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है। केवल पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) करने से पेट की चर्बी सीधे और तेजी से खत्म होने का दावा वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। यह आसन पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करने और शरीर को गतिशील रखने में मदद कर सकता है, लेकिन वसा कम करने के लिए पूरे शरीर की ऊर्जा खपत और खान-पान का संतुलन महत्वपूर्ण है।

यदि पेट की चर्बी कम करनी है तो इस आसन के साथ तेज चाल से चलना, अन्य उपयुक्त योगासन, नियमित व्यायाम और संतुलित कैलोरी वाला भोजन ज्यादा प्रभावी रणनीति होगी।

सुबह करना बेहतर है या शाम को?

इस तरह के योग अभ्यास को सामान्यतः खाली या हल्के पेट करना सुविधाजनक रहता है। सुबह उठने के बाद शौच आदि से निवृत्त होकर अभ्यास करना कई लोगों के लिए आरामदायक हो सकता है। भोजन के तुरंत बाद इसे नहीं करना चाहिए क्योंकि घुटनों को पेट की ओर खींचने से पेट पर दबाव पड़ता है।

यदि सुबह समय नहीं मिलता तो शाम को भी अभ्यास किया जा सकता है, लेकिन भोजन के तुरंत बाद नहीं। शरीर को पर्याप्त समय देने के बाद ही अभ्यास करना बेहतर है।

किन लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए?

जिन लोगों को हर्निया, पेट में चोट, गंभीर कमर दर्द, साइटिका या स्लिप डिस्क जैसी समस्या है, उन्हें पवनमुक्तासन से बचना चाहिए या केवल चिकित्सकीय/विशेषज्ञ सलाह के बाद इसका संशोधित रूप करना चाहिए। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की सामग्री में उच्च रक्तचाप, साइटिका और स्लिप डिस्क में इसे न करने की सलाह दी गई है।

गर्भावस्था के दौरान विशेष सावधानी जरूरी है। पेट पर दबाव डालने वाले इस तरह के अभ्यास को गर्भावस्था में अपने आप नहीं करना चाहिए। योग प्रोटोकॉल भी गर्भावस्था और पेट की चोट, हर्निया तथा गंभीर कमर दर्द जैसी स्थितियों में इससे बचने की सलाह देता है।

जिन लोगों को उच्च रक्तचाप या हृदय संबंधी समस्या है, उन्हें भी विशेष सावधानी रखनी चाहिए। अलग-अलग योग स्रोत उच्च रक्तचाप में पवनमुक्तासन से बचने की सलाह देते हैं, इसलिए ऐसे व्यक्ति को चिकित्सक या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेना उचित है।

अभ्यास करते समय इन गलतियों से बचें

इस आसन में सबसे बड़ी गलती शरीर को झटके से मोड़ना है। घुटने को जबरदस्ती छाती से दबाने, गर्दन को खींचकर सिर को घुटने तक पहुंचाने या सांस रोककर बहुत देर तक मुद्रा में रहने से बचना चाहिए। दर्द, चक्कर, सांस फूलना, सुन्नपन या असामान्य असुविधा महसूस हो तो तुरंत अभ्यास रोक देना चाहिए।

विशेष रूप से गर्दन को जमीन से उठाने वाले संस्करण में शुरुआत करने वालों को सावधानी रखनी चाहिए। यदि गर्दन में परेशानी है तो सिर और कंधों को जमीन पर रखते हुए केवल पैर को पेट की ओर मोड़ना अपेक्षाकृत आसान विकल्प हो सकता है।

कितने समय तक करना चाहिए?

शुरुआत में एक मुद्रा को कुछ सहज सांसों तक ही रखें। लंबे समय तक मुद्रा पकड़ने की जरूरत नहीं है। नियमित अभ्यास के साथ शरीर की क्षमता बढ़ने पर समय धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। योग का उद्देश्य शरीर को दर्द में डालना नहीं, बल्कि नियंत्रित गति और सांस के साथ शरीर की गतिशीलता बढ़ाना है।

किस समय तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?

अगर गैस या कब्ज के साथ लगातार तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट बहुत ज्यादा फूलना, मल में खून, अचानक वजन कम होना, लगातार कब्ज या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हों तो योग को इलाज का विकल्प नहीं बनाना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

इसी तरह यदि आसन करते समय सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी जैसा महसूस होना, तेज चक्कर या अचानक तेज कमर दर्द हो तो अभ्यास तुरंत रोककर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

आसान आसन, लेकिन सही तरीके से करना जरूरी

चित्र में दिखाया गया पैर मोड़ने का अभ्यास और पवनमुक्तासन (Pawanmuktasana) की शैली शुरुआती लोगों के लिए अपेक्षाकृत सरल हो सकती है और पेट के क्षेत्र में हल्का दबाव, कमर-पेल्विस में खिंचाव तथा नियंत्रित श्वास का अभ्यास कराती है। इसके सबसे ज्यादा बताए जाने वाले पारंपरिक लाभ गैस, पेट फूलने और कब्ज से राहत से जुड़े हैं।

लेकिन इसे किसी बीमारी की दवा या चर्बी घटाने का चमत्कारी उपाय नहीं समझना चाहिए। सही तकनीक, नियमितता और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अभ्यास करना सबसे महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से हर्निया, साइटिका, स्लिप डिस्क, गंभीर कमर दर्द, पेट की चोट, गर्भावस्था, उच्च रक्तचाप या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बिना यह अभ्यास नहीं करना चाहिए।

Leave a Comment