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17/10/2026 10:56 am

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Naukasana Benefits-नौकासन कैसे करें? जानिए पेट, कमर और पाचन के लिए फायदे

Naukasana Benefits

योग में नौकासन एक ऐसा अभ्यास है, जिसमें पीठ के बल लेटकर सिर, कंधों, हाथों और पैरों को जमीन से ऊपर उठाया जाता है। इस दौरान शरीर का मध्य भाग यानी पेट और धड़ की मांसपेशियां शरीर को संभालने में सक्रिय रहती हैं। इसका नाम नाव के आकार से जुड़ा है, क्योंकि अभ्यास के दौरान शरीर की आकृति नाव जैसी दिखाई दे सकती है। हालांकि, आपके द्वारा साझा की गई पुस्तक में नौकासन का जो रूप दिखाया गया है, उसमें हाथों और पैरों को जमीन से ऊपर उठाकर शरीर को संतुलित रखा जाता है।

आज की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठना, कम शारीरिक गतिविधि और पेट तथा धड़ की मांसपेशियों का कमजोर होना आम समस्याएं हैं। ऐसे में सही तकनीक से किया गया नौकासन शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाले योगाभ्यास का हिस्सा बन सकता है। “Naukasana Benefits”

नौकासन करने की सही विधि
पहला चरण: जमीन पर लेटकर शरीर को तैयार करें

सबसे पहले समतल जगह पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को सीधा रखें और हाथों को शरीर के दोनों तरफ जमीन पर टिकाएं। गर्दन को सामान्य स्थिति में रखें और कुछ बार सहज सांस लेकर शरीर को अभ्यास के लिए तैयार करें। यदि कमर में खिंचाव महसूस होता है, तो घुटनों को थोड़ा मोड़कर अभ्यास का आसान रूप अपनाया जा सकता है। “Naukasana Benefits”

दूसरा चरण: सांस लेते हुए सिर और पैर उठाएं

धीरे-धीरे सांस लेते हुए सिर, कंधों, हाथों और दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। हाथों को पैरों की दिशा में आगे बढ़ाएं। आपके द्वारा साझा की गई पुस्तक में सिर को जमीन से लगभग एक फुट से अधिक ऊपर नहीं उठाने और हाथों तथा पैरों को लगभग समान ऊंचाई पर रखने का निर्देश दिया गया है। शुरुआत में इतनी ही ऊंचाई चुनें, जितनी पर कमर पर अनावश्यक दबाव न पड़े। “Naukasana Benefits”

तीसरा चरण: कुछ समय तक स्थिति बनाए रखें

इस स्थिति में शरीर को स्थिर रखने की कोशिश करें। सांस को रोकने के बजाय सहज गति से लेते रहें। पुस्तक में इस स्थिति को अपनी क्षमता के अनुसार बनाए रखने और फिर धीरे-धीरे जमीन पर लौटने का निर्देश दिया गया है। शुरुआती लोग लगभग 3 से 5 सेकंड से शुरुआत कर सकते हैं। यदि शरीर सहज महसूस करता है, तो धीरे-धीरे अवधि बढ़ाई जा सकती है। नौकासन की पारंपरिक विधियों में भी शरीर को नियंत्रित तरीके से ऊपर उठाने और धीरे-धीरे वापस आने पर जोर दिया जाता है। “Naukasana Benefits”

चौथा चरण: शरीर को धीरे-धीरे नीचे लाएं

सांस छोड़ते हुए सिर, कंधों, हाथों और पैरों को धीरे-धीरे जमीन पर वापस रखें। शरीर को अचानक नीचे न गिराएं। कुछ देर सामान्य स्थिति में आराम करें और सांस को सहज होने दें। इसके बाद ही अगला चक्र शुरू करें।

पुस्तक में दूसरे अभ्यास के रूप में इसी स्थिति को दोहराते हुए मुट्ठियां भींचने और शरीर में तनाव उत्पन्न करने का निर्देश है। लेकिन शुरुआती लोगों को इस अधिक कठिन रूप को करने की आवश्यकता नहीं है। मांसपेशियों को अत्यधिक कसने या शरीर को अचानक जमीन पर गिराने के बजाय नियंत्रित तरीके से अभ्यास करना अधिक सुरक्षित है। “Naukasana Benefits”

नौकासन कितनी बार और कितनी देर करना चाहिए?

शुरुआती लोगों के लिए अभ्यास की अवधि

नौकासन अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण अभ्यास है, इसलिए शुरुआत में इसे 3 से 5 सेकंड तक एक बार करना भी पर्याप्त हो सकता है। यदि कोई दर्द या असुविधा नहीं होती, तो कुछ समय बाद इसे 5 से 10 सेकंड तक बनाए रखने का प्रयास किया जा सकता है। प्रत्येक प्रयास के बाद लगभग 20 से 30 सेकंड आराम करें। यह शुरुआती लोगों के लिए एक व्यावहारिक सुझाव है, न कि सभी लोगों के लिए निर्धारित चिकित्सकीय मात्रा। “Naukasana Benefits”

दिन में कितने चक्र करना उचित है?

शुरुआत में एक से दो चक्र करें। अभ्यास में सहजता आने पर दो से तीन चक्र तक बढ़ाया जा सकता है। पुस्तक में पांच बार अभ्यास करने का निर्देश है, लेकिन यह संख्या हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है। शरीर की क्षमता, उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अभ्यास की मात्रा तय करना चाहिए। थकान होने, सांस रोकने की जरूरत महसूस होने या कमर में दर्द होने पर चक्रों की संख्या बढ़ाने के बजाय अभ्यास रोक दें।

नौकासन के प्रमुख फायदे

पेट और धड़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद

नौकासन के दौरान पेट की मांसपेशियां शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को ऊपर उठाए रखने में सक्रिय रहती हैं। इसके कारण पेट और धड़ की मांसपेशियों की ताकत तथा सहनशक्ति विकसित करने में मदद मिल सकती है। नियमित रूप से उपयुक्त व्यायाम करने से शरीर को स्थिर रखने और रोजमर्रा की गतिविधियों में बेहतर नियंत्रण बनाए रखने में सहायता मिलती है। हालांकि, नौकासन अकेले करने से पेट की चर्बी समाप्त होने की गारंटी नहीं है। “Naukasana Benefits”

पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करने में सहायक

इस अभ्यास में सिर, कंधों और पैरों को ऊपर उठाकर स्थिर रखने के लिए धड़ की कई मांसपेशियां काम करती हैं। इससे पीठ और पेट के आसपास की मांसपेशियों की सक्रियता बढ़ सकती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नौकासन हर प्रकार के कमर दर्द में लाभकारी है। यदि पहले से कमर दर्द, स्लिप डिस्क या रीढ़ की समस्या है, तो यह अभ्यास परेशानी बढ़ा भी सकता है। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह के बिना इसे नहीं करना चाहिए।

शरीर के संतुलन और नियंत्रण में सुधार

नौकासन में शरीर को एक निश्चित स्थिति में बनाए रखने के लिए मांसपेशियों का समन्वय आवश्यक होता है। नियमित और सही तरीके से किए गए अभ्यास से व्यक्ति को अपने शरीर की स्थिति पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। यह क्षमता अन्य शारीरिक गतिविधियों में भी उपयोगी होती है। हालांकि, इसका प्रभाव अभ्यास की गुणवत्ता और व्यक्ति की शारीरिक क्षमता पर निर्भर करेगा।

शारीरिक सक्रियता और व्यायाम की दिनचर्या में योगदान

नौकासन को योग की नियमित दिनचर्या में शामिल करने से शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है। यदि इसे चलने, अन्य उपयुक्त योगासनों और संतुलित भोजन के साथ किया जाए, तो यह समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है। इसे अकेले वजन घटाने, मधुमेह नियंत्रित करने या किसी आंतरिक अंग की बीमारी ठीक करने का उपाय नहीं समझना चाहिए।

क्या नौकासन से पाचन ठीक होता है और कब्ज में राहत मिलती है?

पाचन संबंधी दावों को समझना जरूरी

पारंपरिक योग साहित्य में नौकासन को पाचन से जुड़े लाभों के साथ जोड़ा गया है। लेकिन केवल इस आसन को करने से कब्ज, गैस या पाचन संबंधी किसी बीमारी के ठीक होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त पानी, रेशेदार भोजन और संतुलित दिनचर्या पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखने में अधिक व्यापक भूमिका निभाते हैं।

यदि आपको लंबे समय से कब्ज, पेट में दर्द, उल्टी या मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव की समस्या है, तो केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।

किन लोगों को नौकासन करना चाहिए?

स्वस्थ वयस्क और नियमित योग करने वाले लोग

जिन वयस्कों को कमर, गर्दन या पेट से जुड़ी कोई गंभीर समस्या नहीं है और जो सामान्य शारीरिक व्यायाम कर सकते हैं, वे प्रशिक्षित योग शिक्षक के मार्गदर्शन में नौकासन सीख सकते हैं। शुरुआती लोगों को पहले आसान रूप से शुरुआत करनी चाहिए और शरीर को ऊपर उठाने की ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए। सही तकनीक सीखना केवल अधिक देर तक आसन बनाए रखने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

कमजोर मांसपेशियों वाले शुरुआती लोग

यदि आपकी पेट की मांसपेशियां कमजोर हैं, तो सीधे दोनों पैरों और सिर को एक साथ ऊपर उठाने की कोशिश न करें। पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह से आसान कोर अभ्यास करें। इसके बाद शरीर की क्षमता बढ़ने पर नौकासन का सरल रूप अपनाया जा सकता है। यदि अभ्यास के दौरान कमर जमीन से बहुत अधिक उठती है या दर्द होता है, तो कठिन रूप को रोक देना चाहिए।

किन लोगों को नौकासन नहीं करना चाहिए?

कमर, गर्दन या रीढ़ की समस्या वाले लोग

जिन लोगों को कमर में तेज दर्द, स्लिप डिस्क, रीढ़ की चोट या गर्दन से संबंधित समस्या है, उन्हें इस आसन से बचना चाहिए, जब तक चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट इसकी अनुमति न दे। शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से को एक साथ उठाने से कमर की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है।

हर्निया या हाल में पेट की सर्जरी कराने वाले लोग

हर्निया, पेट की मांसपेशियों में चोट या हाल में पेट की सर्जरी कराने वाले लोगों को नौकासन नहीं करना चाहिए, जब तक संबंधित चिकित्सक इसकी अनुमति न दे। इस अभ्यास में पेट की मांसपेशियों पर जोर पड़ता है, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में जोखिम हो सकता है।

गर्भवती महिलाएं

गर्भावस्था के दौरान नौकासन का यह रूप नहीं करना चाहिए। इसमें पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और पीठ के बल लेटकर सिर तथा पैरों को उठाना शामिल है। गर्भावस्था के दौरान कौन-से व्यायाम सुरक्षित हैं, इसका निर्णय चिकित्सक की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

हृदय रोग या अनियंत्रित रक्तचाप वाले लोग

हृदय रोग, अनियंत्रित उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को इस चुनौतीपूर्ण आसन को शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। अभ्यास के दौरान सांस रोकना या जरूरत से ज्यादा जोर लगाना उचित नहीं है। यदि डॉक्टर ने कठिन शारीरिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी है, तो उसका पालन करें।

नौकासन करते समय किन गलतियों से बचें?

शरीर को जरूरत से ज्यादा ऊपर न उठाएं

कई लोग यह सोचकर सिर और पैरों को बहुत ऊपर उठाने की कोशिश करते हैं कि इससे अधिक लाभ होगा। वास्तव में, गलत तकनीक से कमर और गर्दन पर दबाव बढ़ सकता है। शुरुआत में कम ऊंचाई पर शरीर को नियंत्रित रखना और धीरे-धीरे क्षमता बढ़ाना अधिक उपयुक्त है।

सांस रोककर अभ्यास न करें

नौकासन करते समय मांसपेशियों में तनाव स्वाभाविक है, लेकिन सांस को रोकना जरूरी नहीं है। सामान्य रूप से सांस लेते रहें। यदि सांस फूलने लगे, चक्कर आए या असामान्य कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत आसन से बाहर आ जाएं।

दर्द के बावजूद अभ्यास जारी न रखें

व्यायाम के दौरान मांसपेशियों में हल्का प्रयास महसूस होना सामान्य हो सकता है, लेकिन तेज दर्द, कमर में चुभन या गर्दन में खिंचाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर को धीरे-धीरे नीचे लाएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

नौकासन करने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

नौकासन को सुबह के समय योग दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, लेकिन सुबह करना अनिवार्य नहीं है। ऐसा समय चुनें जब पेट बहुत भरा हुआ न हो और शरीर सहज महसूस करे। भारी भोजन के तुरंत बाद इस तरह का कठिन पेट-केंद्रित व्यायाम न करें। यदि आप किसी बीमारी के लिए उपचार करा रहे हैं, तो अपने चिकित्सक द्वारा निर्धारित व्यायाम कार्यक्रम को प्राथमिकता दें।

नौकासन के लाभ सही तकनीक और सावधानी पर निर्भर करते हैं

नौकासन पेट और धड़ की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाला एक चुनौतीपूर्ण योगाभ्यास है। सही तरीके से और अपनी क्षमता के अनुसार करने पर यह मांसपेशियों की ताकत, सहनशक्ति तथा शरीर के नियंत्रण को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त या किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं है। विशेष रूप से कमर की समस्या, हर्निया, गर्भावस्था, हृदय रोग या हाल की सर्जरी की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि योग का उद्देश्य शरीर को स्वस्थ रखना है, उसे अनावश्यक तनाव देना नहीं। इसलिए नौकासन को धीरे-धीरे सीखें, नियमित अभ्यास करें और शरीर की प्रतिक्रिया को प्राथमिकता दें।

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