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27/03/2026 1:00 am

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दादी जानकी पुण्यतिथि: ब्रह्माकुमारीज ने मनाया वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस

राँची के हरमू रोड स्थित चौधरी बगान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र द्वारा पूर्व अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख प्रशासिका दादी जानकी जी की पुण्यतिथि को वैश्विक आध्यात्मिक जागृति दिवस के रूप में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों, आध्यात्मिक साधकों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि दादी जानकी जी के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ना भी था।

दादी जानकी: एक अद्भुत और प्रेरणादायक व्यक्तित्व

कार्यक्रम में उपस्थित राँची नगर निगम के उप महापौर नीरज कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि दादी जानकी जी का जीवन असाधारण था। उन्होंने 104 वर्ष की आयु में भी अपने व्यक्तित्व से लाखों लोगों के जीवन में उजियारा फैलाया। उन्होंने कहा कि दादी जानकी जी योग की शक्ति की अद्भुत मिसाल थीं और उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिकता के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। उनका जीवन आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

बुजुर्ग उम्र में भी नई शुरुआत की मिसाल

राँची विश्वविद्यालय की पूर्व अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. बंदना राय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिस उम्र में लोग स्वयं को सेवानिवृत्त मान लेते हैं, उस उम्र में दादी जानकी जी ने पहली बार विदेश यात्रा की। उनका उद्देश्य केवल एक था—पूरी दुनिया में आध्यात्मिकता का संदेश फैलाना। उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे यह प्रयास एक आंदोलन में बदल गया और यूरोप सहित कई देशों में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार हुआ। यह दर्शाता है कि जीवन में कुछ नया करने के लिए उम्र कभी बाधा नहीं होती।

ऊर्जा और समर्पण का अनोखा उदाहरण

कार्यक्रम में उपस्थित राजनीति विज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रानी प्रगति प्रसाद ने कहा कि दादी जानकी जी 103 वर्ष की आयु में भी अत्यंत ऊर्जावान थीं। उन्होंने एक वर्ष में भारत सहित कई देशों की यात्रा करते हुए लगभग 50 हजार किलोमीटर का सफर तय किया, जो अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है। उनके अंदर अंतिम समय तक युवाओं जैसा उत्साह और ऊर्जा बनी रही, जो आज की पीढ़ी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

समाज सेवा को समर्पित रहा पूरा जीवन

ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी निमला बहन ने बताया कि दादी जानकी जी का पूरा जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित था। बचपन से ही उनके मन में यह भावना थी कि दूसरों के जीवन को कैसे बेहतर और सुखी बनाया जाए। उन्होंने भारतीय शास्त्रों का गहन अध्ययन किया और आध्यात्मिक ज्ञान को अपने जीवन में उतारा। आजादी के बाद उन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए एक सशक्त महिला आध्यात्मिक नेत्री के रूप में अपनी पहचान बनाई।

राजयोग मेडिटेशन से विश्व को दी नई दिशा

दादी जानकी जी द्वारा सिखाया गया राजयोग मेडिटेशन आज पूरी दुनिया में लाखों लोग अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं। यह ध्यान पद्धति व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक सोच प्रदान करती है। आज के समय में जब लोग तनाव और चिंता से जूझ रहे हैं, राजयोग मेडिटेशन उनके लिए एक सरल और प्रभावी समाधान बनकर उभरा है।

विश्व स्तर पर मिला सम्मान और पहचान

दादी जानकी जी ने दादी प्रकाशमणि जी के बाद संस्था की प्रमुख प्रशासिका के रूप में कार्य करते हुए विश्व परिवर्तन और आध्यात्मिक पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैज्ञानिकों ने उन्हें “सर्वोच्च स्थिर मन वाली महिला” की उपाधि से सम्मानित किया। इतना ही नहीं, भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी उन्हें स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया था। उन्हें देश और विदेश में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्रद्धांजलि अर्पण

इस अवसर पर दादी जानकी जी की स्मृति में बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने कार्यक्रम में एक भावनात्मक वातावरण उत्पन्न किया। सभी ब्रह्मावत्सों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें याद किया। कार्यक्रम में ब्रह्मभोजन का आयोजन भी किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने भाग लिया और सामूहिक रूप से आध्यात्मिक एकता का अनुभव किया।

आज के समाज के लिए दादी जानकी जी की शिक्षाओं का महत्व

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक तनाव और असंतुलन का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दादी जानकी जी की शिक्षाएं अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सकारात्मक सोच, आत्मज्ञान और ध्यान के माध्यम से हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। उनकी शिक्षाएं केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन में भी अत्यंत उपयोगी हैं।

एक प्रेरणादायक जीवन, जो हमेशा मार्गदर्शन देगा

दादी जानकी जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिकता के माध्यम से व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बल्कि पूरे समाज को बदल सकता है। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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