आज की जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने घंटों रहना, शारीरिक गतिविधि कम होना और लगातार मानसिक दबाव जैसी आदतें शरीर और दिमाग दोनों पर असर डालती हैं। ऐसे में हर व्यक्ति के लिए कठिन योगासन या लंबे वर्कआउट करना संभव नहीं होता। यही वजह है कि ऐसे आसान योगाभ्यास महत्वपूर्ण हो जाते हैं जिन्हें शुरुआती व्यक्ति भी अपनी क्षमता के अनुसार कर सके। मकरासन यानी Makarasana या Crocodile Pose इसी श्रेणी का एक विश्राम प्रधान योगासन है। इसमें शरीर को किसी कठिन मुद्रा में खींचने के बजाय पेट के बल लेटकर शरीर को ढीला छोड़ने और सांस पर ध्यान देने पर जोर दिया जाता है। भारत सरकार के मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार मकरासन एक relaxing posture है और इसे तनाव, चिंता तथा पीठ की परेशानी में सहायक माना जाता है। “Makarasan ke Fayde”
मकरासन आखिर है क्या और इसका नाम कैसे पड़ा?
मकरासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है—‘मकर’ यानी मगरमच्छ और ‘आसन’ यानी मुद्रा या posture। इस आसन में शरीर को जमीन पर पेट के बल इस तरह आराम दिया जाता है कि वह विश्राम कर रहे मगरमच्छ जैसा दिखाई देता है। International Day of Yoga के Common Yoga Protocol में इसे prone relaxation posture बताया गया है। इसका उद्देश्य शरीर को किसी तरह का जोरदार खिंचाव देना नहीं, बल्कि अभ्यास के दौरान शरीर और सांस को शांत करना है। आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार इसमें पेट के बल लेटकर दोनों पैरों को आराम की स्थिति में फैलाया जाता है, पंजे बाहर की ओर रहते हैं और सिर को हाथों पर टिकाया जाता है। आंखें बंद करके शरीर को ढीला छोड़ने की सलाह दी जाती है। “Makarasan ke Fayde”
सही तरीके से मकरासन कैसे करें?
मकरासन की सबसे बड़ी खूबी इसकी सरलता है, लेकिन सरल होने का मतलब यह नहीं कि इसे किसी भी तरह किया जाए। इसके लिए योग मैट या आरामदायक सतह पर पेट के बल लेटें। पैरों को सहज रूप से थोड़ा अलग रखें और पंजों को बाहर की ओर रहने दें। दोनों हाथों को मोड़कर एक हथेली को दूसरी हथेली पर रखा जा सकता है और सिर को हाथों पर आराम दिया जाता है। शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं होना चाहिए। इसके बाद आंखें बंद करके सामान्य, धीमी और सहज सांस लें। सांस रोकने या जबरदस्ती बहुत गहरी सांस लेने की जरूरत नहीं है। पांच मिनट का अभ्यास किसी व्यक्ति के लिए एक सुविधाजनक शुरुआती समय हो सकता है, लेकिन इसे किसी वैज्ञानिक रूप से तय ‘इलाज की खुराक’ के रूप में नहीं समझना चाहिए। योग का उद्देश्य यहां शरीर को आराम देना और सांस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। “Makarasan ke Fayde”
कमर और पीठ के लिए क्यों उपयोगी माना जाता है मकरासन?
मकरासन का सबसे चर्चित लाभ पीठ और कमर को आराम देने से जुड़ा है। पेट के बल विश्राम की इस स्थिति में व्यक्ति सक्रिय रूप से रीढ़ को मोड़ने या खींचने की कोशिश नहीं करता, बल्कि पीठ की मांसपेशियों को आराम देने पर ध्यान देता है। आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की सामग्री में इसे backache से राहत और पीठ की समस्याओं से उबरने में सहायक बताया गया है।
हालांकि यहां एक जरूरी वैज्ञानिक अंतर समझना चाहिए। मकरासन को कमर दर्द का इलाज या स्लिप-डिस्क को ठीक करने वाली मुद्रा कहना उचित नहीं होगा। व्यापक स्तर पर किए गए योग संबंधी अध्ययनों में पाया गया है कि योग से chronic low back pain वाले लोगों में दर्द और disability में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन उपलब्ध प्रमाणों की गुणवत्ता अलग-अलग है और योग को हर व्यक्ति के लिए किसी बीमारी का अकेला इलाज नहीं माना जा सकता। 2021 की एक systematic review और meta-analysis में 27 अध्ययनों तथा 2,702 प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और योग से short-term pain intensity तथा pain-related disability में सुधार पाया गया, लेकिन शोधकर्ताओं ने प्रमाण को low-to-moderate certainty का बताया। “Makarasan ke Fayde”
लगातार तनाव और मानसिक थकान में मिल सकता है आराम
मकरासन की दूसरी महत्वपूर्ण भूमिका relaxation से जुड़ी है। जब व्यक्ति पेट के बल आराम से लेटता है, शरीर को ढीला छोड़ता है और सांस की गति पर ध्यान देता है तो योग अभ्यास का एक शांत करने वाला पहलू सामने आता है। भारत सरकार के Common Yoga Protocol में मकरासन को stress और anxiety को counter करने वाली relaxation posture के रूप में शामिल किया गया है।
योग और तनाव पर हुए आधुनिक शोध भी यह संकेत देते हैं कि नियमित योग अभ्यास तनाव कम करने में मदद कर सकता है। 13 randomized controlled trials और 1,026 प्रतिभागियों को शामिल करने वाली एक systematic review में yoga के short-term stress reduction प्रभाव के पक्ष में परिणाम मिले, हालांकि शोधकर्ताओं ने evidence quality को low बताया। इसलिए मकरासन को तनाव और मानसिक बेचैनी में एक सहायक relaxation practice कहना ज्यादा वैज्ञानिक है, न कि anxiety या depression का इलाज। “Makarasan ke Fayde”
सांस पर ध्यान देने से बढ़ सकता है आराम का प्रभाव
मकरासन में पेट के बल रहते हुए धीमी और सहज सांस लेने पर ध्यान देना अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मुद्रा को कई योग परंपराओं में diaphragmatic या abdominal breathing के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली relaxation position के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसका व्यावहारिक लाभ यह है कि व्यक्ति कुछ मिनट के लिए अपनी सांस की गति पर ध्यान केंद्रित करता है और शरीर को सक्रिय तनाव की स्थिति से आराम की अवस्था की ओर ले जाने की कोशिश करता है। हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल मकरासन करने से asthma, bronchitis या दूसरी respiratory बीमारी ठीक हो जाती है। सांस से जुड़ी किसी बीमारी वाले व्यक्ति को योग को चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए। “Makarasan ke Fayde”
दिनभर बैठकर काम करने वालों के लिए क्यों हो सकता है उपयोगी?
ऑफिस में लगातार बैठने, ड्राइविंग करने या कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों में लंबे समय तक एक ही posture में रहने से पीठ और कंधों में stiffness महसूस हो सकती है। ऐसे लोगों के लिए दिन में कुछ मिनट शरीर को सक्रिय विश्राम देने की आदत उपयोगी हो सकती है। मकरासन में शरीर को जमीन पर रखकर पीठ और कंधों को आराम देने की कोशिश की जाती है, इसलिए इसे किसी कठिन workout की तरह नहीं बल्कि relaxation break की तरह देखा जा सकता है। हालांकि यदि कमर दर्द लगातार बना रहता है, दर्द पैर तक जाता है, सुन्नपन या कमजोरी होती है अथवा दर्द चोट के बाद शुरू हुआ है, तो केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या physiotherapist की सलाह जरूरी है। “Makarasan ke Fayde”
पाचन और कब्ज को लेकर क्या है सच्चाई?
मकरासन के बारे में इंटरनेट पर कई जगह यह दावा मिलता है कि इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है, कब्ज दूर होता है या पेट की अनेक समस्याएं ठीक हो जाती हैं। लेकिन इन दावों को लेकर उतना मजबूत clinical evidence उपलब्ध नहीं है जितना कमर दर्द या relaxation के संदर्भ में योग पर उपलब्ध शोध में मिलता है। इसलिए मकरासन को digestion की बीमारी का इलाज बताना सही नहीं होगा। आराम, सांस पर ध्यान और नियमित शारीरिक गतिविधि overall wellbeing के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन कब्ज, लगातार पेट दर्द या digestive disorder के मामले में कारण की जांच और उचित चिकित्सा जरूरी है।
क्या रोज पांच मिनट मकरासन करना पर्याप्त है?
यदि कोई व्यक्ति योग की शुरुआत कर रहा है तो पांच मिनट का शांत अभ्यास एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकता है। इसमें लक्ष्य ज्यादा देर तक मुद्रा में पड़े रहना नहीं बल्कि शरीर को आराम देना, सांस को सहज रखना और किसी भी प्रकार के दर्द या खिंचाव को नजरअंदाज न करना होना चाहिए। नियमितता यहां अवधि से ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है। कोई व्यक्ति पांच मिनट आराम से कर पाता है तो धीरे-धीरे अपने योग प्रशिक्षक की सलाह के अनुसार समय बढ़ा सकता है। मकरासन को अकेले करने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य के लिए रोजाना चलना, पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना भी जरूरी है। “Makarasan ke Fayde”
किन लोगों को मकरासन करते समय सावधानी रखनी चाहिए?
हर योगासन हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होता। Common Yoga Protocol में pregnancy और frozen shoulder की स्थिति में मकरासन से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा यदि पेट, रीढ़, कंधे या किसी अन्य हिस्से में गंभीर समस्या है, हाल में surgery हुई है या किसी आसन से दर्द बढ़ता है, तो बिना विशेषज्ञ सलाह के अभ्यास नहीं करना चाहिए। खास तौर पर chronic back pain वाले व्यक्ति को यह समझना जरूरी है कि योग का लाभ व्यक्ति की समस्या और सही technique पर निर्भर करता है। शोध में योग के लाभ दिखाई दिए हैं, लेकिन yoga और physiotherapy जैसे active exercise interventions के बीच हमेशा कोई स्पष्ट श्रेष्ठता नहीं मिली है।
पांच मिनट का मकरासन, लेकिन सही उम्मीद के साथ
मकरासन की ताकत इसकी सादगी में है। इसे किसी चमत्कारी उपचार की तरह देखने के बजाय शरीर और मन को कुछ मिनटों का व्यवस्थित विश्राम देने वाली योग मुद्रा के रूप में समझना ज्यादा उचित है। कमर और पीठ की परेशानी, तनाव और मानसिक थकान जैसी स्थितियों में यह एक सहायक अभ्यास हो सकता है, जबकि वैज्ञानिक शोध व्यापक रूप से योग को chronic low back pain और stress management में संभावित लाभ वाला intervention बताते हैं।
इसलिए रोजाना कुछ मिनट मकरासन करने की आदत उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अपनी दिनचर्या में एक सरल relaxation exercise जोड़ना चाहते हैं। लेकिन यदि शरीर किसी बीमारी, तेज दर्द या चोट का संकेत दे रहा है, तो उस संकेत को नजरअंदाज करके आसन करते रहना समझदारी नहीं है। योग स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का माध्यम हो सकता है, लेकिन गंभीर बीमारी में डॉक्टर की सलाह और आवश्यक उपचार का विकल्प नहीं। “Makarasan ke Fayde”






