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29/10/2026 4:11 am

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Ram Bharat Milap-रांची में 31 अक्टूबर को राम-भरत मिलाप समारोह, राज्यपाल को न्योता

Ram Bharat Milap

रांची के डोरंडा बाजार स्थित गांधी मैदान में 31 अक्टूबर को आयोजित होने वाले श्रीराम-भरत मिलाप समारोह की तैयारियों के बीच श्री राम भरत मिलाप समिति के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से शिष्टाचार भेंट की। समिति ने राज्यपाल को समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और इस धार्मिक आयोजन की ऐतिहासिक परंपरा, सांस्कृतिक महत्व तथा सामाजिक संदेश से अवगत कराया। वर्ष 1971 से चली आ रही यह परंपरा भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत के पवित्र मिलन की स्मृति को जीवंत करती है। इस प्रसंग के माध्यम से त्याग, भाईचारे, पारिवारिक प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया जाता है। “Ram Bharat Milap”

राज्यपाल संतोष गंगवार को समारोह में शामिल होने का आमंत्रण

श्री राम भरत मिलाप समिति, रांची के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर उन्हें 31 अक्टूबर को होने वाले श्रीराम-भरत मिलाप समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इस शिष्टाचार भेंट के दौरान समिति के सदस्यों ने आयोजन की परंपरा और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी। प्रतिनिधियों ने बताया कि यह समारोह केवल धार्मिक आस्था का अवसर नहीं है, बल्कि रांची की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता से भी जुड़ा हुआ है। समिति की ओर से राज्यपाल को आमंत्रित करने का उद्देश्य इस ऐतिहासिक आयोजन की गरिमा को व्यापक स्तर पर सामने लाना और अधिक से अधिक लोगों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जोड़ना है। “Ram Bharat Milap”

1971 से चली आ रही है डोरंडा की राम-भरत मिलाप परंपरा

रांची के डोरंडा क्षेत्र में श्रीराम-भरत मिलाप समारोह का आयोजन वर्ष 1971 से निरंतर किए जाने की परंपरा समिति के अनुसार चली आ रही है। पांच दशक से अधिक समय से आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन गया है। हर वर्ष भगवान श्रीराम और भरत के मिलन के प्रसंग को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को रामायण के उस भावनात्मक प्रसंग से जुड़ने का अवसर मिलता है, जिसमें भाई के प्रति प्रेम, त्याग और समर्पण को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। समय के साथ यह आयोजन धार्मिक कार्यक्रम के साथ-साथ सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक भी बना है। “Ram Bharat Milap”

भगवान श्रीराम और भरत का मिलन देता है त्याग और भाईचारे का संदेश

भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में भगवान श्रीराम और उनके अनुज भरत का मिलन विशेष महत्व रखता है। रामायण का यह प्रसंग भाईचारे, मर्यादा, कर्तव्य और निस्वार्थ प्रेम की ऐसी मिसाल प्रस्तुत करता है, जो आज भी समाज को प्रेरित करती है। भगवान श्रीराम के वनवास के दौरान भरत ने राजसिंहासन स्वीकार करने के बजाय अपने बड़े भाई के प्रति सम्मान और समर्पण को प्राथमिकता दी। उन्होंने श्रीराम की खड़ाऊं को सिंहासन पर रखकर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य का संचालन किया। यह प्रसंग बताता है कि सच्चे रिश्तों की नींव अधिकार या स्वार्थ पर नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग और सम्मान पर टिकी होती है।

श्रीराम-भरत मिलाप की झांकी इसी भावनात्मक प्रसंग को लोगों के सामने जीवंत करती है। जब भगवान श्रीराम और भरत के मिलन का दृश्य प्रस्तुत किया जाता है, तो श्रद्धालुओं को रामायण के आदर्शों को समझने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है। यही वजह है कि ऐसे धार्मिक आयोजन पीढ़ियों से भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। “Ram Bharat Milap”

आज के दौर में और प्रासंगिक हो जाता है राम-भरत मिलाप का संदेश

वर्तमान समय में तेजी से बदलती जीवनशैली, व्यस्त दिनचर्या और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच रिश्तों में संवाद की कमी कई बार तनाव का कारण बनती है। ऐसे में राम-भरत मिलाप जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन लोगों को याद दिलाते हैं कि परिवार की वास्तविक ताकत आपसी विश्वास, सम्मान और सहयोग में निहित है। भगवान श्रीराम और भरत का संबंध इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों में भी रिश्तों की गरिमा बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण होता है।

इस समारोह का संदेश केवल परिवार तक सीमित नहीं है। यह समाज में सद्भाव, सहिष्णुता और आपसी सहयोग की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। अलग-अलग विचारों और पृष्ठभूमि के लोग जब किसी सांस्कृतिक आयोजन में एक साथ शामिल होते हैं, तो उनके बीच संवाद और सामाजिक जुड़ाव के अवसर बढ़ते हैं। इस दृष्टि से डोरंडा का श्रीराम-भरत मिलाप समारोह धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला आयोजन भी है। “Ram Bharat Milap”

भव्य झांकी के माध्यम से जीवंत होगी रामायण की परंपरा

श्री राम भरत मिलाप समिति की ओर से आयोजित इस समारोह का प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीराम और भरत के मिलन की झांकी होगी। झांकी के माध्यम से रामायण के प्रसंग को पारंपरिक स्वरूप में प्रस्तुत करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक कथा से जोड़ना और उसके नैतिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। ऐसे आयोजन बच्चों और युवाओं के लिए भी भारतीय महाकाव्यों, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर बनते हैं।

धार्मिक झांकियां भारतीय लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। इनके माध्यम से कठिन धार्मिक प्रसंगों को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे आम लोगों के लिए उनका भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व समझना आसान हो जाता है। डोरंडा में आयोजित होने वाला राम-भरत मिलाप समारोह भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है। समिति का उद्देश्य आयोजन की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखते हुए नई पीढ़ी तक इसके मूल्यों को पहुंचाना है।

नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

आज डिजिटल माध्यमों और आधुनिक जीवनशैली के विस्तार के बीच पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजनों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, धार्मिक कथाओं और पारिवारिक मूल्यों से परिचित कराने का अवसर प्रदान करते हैं। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से उन्हें त्याग, सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।

श्री राम भरत मिलाप समिति का प्रयास इस परंपरा को केवल एक वार्षिक आयोजन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसके संदेश को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाना है। धार्मिक उत्सवों की निरंतरता तभी बनी रहती है, जब नई पीढ़ी उनमें रुचि लेती है और आयोजन से जुड़े सांस्कृतिक मूल्यों को समझती है। इस लिहाज से रांची के डोरंडा में होने वाला समारोह स्थानीय संस्कृति और सामुदायिक भागीदारी को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।

समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

राज्यपाल संतोष गंगवार को आमंत्रित करने के लिए हुई शिष्टाचार भेंट में समिति के कई पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल में समिति के अध्यक्ष रोहित शारदा, संरक्षक बी.के. विजय, महामंत्री नम्रता सोनी, एडवोकेट प्रिंस पांडे, मंत्री प्रिया सिन्हा और कोषाध्यक्ष पुरुषोत्तम दास सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। इसके अलावा महेश विजय, अनूप बर्मन, सत्येंद्र रजक, सौरभ विजय, विवेक आर्य, प्रीति कुमारी, कमल गिरी, राजकुमार गुप्ता, मीनू डांगी, जयंत मजूमदार, जीनिया घोष, मल्लू कुमार, प्रभात रंजन, संजय कुमार सिंह और रवि कुमार समेत अन्य सदस्यों की उपस्थिति रही।

समिति के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को आयोजन की गौरवशाली परंपरा से अवगत कराते हुए समारोह में शामिल होने का आग्रह किया। समिति का मानना है कि जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता से ऐसे पारंपरिक आयोजनों को प्रोत्साहन मिलता है और उनकी सांस्कृतिक पहचान व्यापक स्तर पर सामने आती है।

31 अक्टूबर को गांधी मैदान, डोरंडा में होगा आयोजन

रांची के डोरंडा बाजार स्थित गांधी मैदान में 31 अक्टूबर को आयोजित होने वाला श्रीराम-भरत मिलाप समारोह श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का अवसर होगा। समिति ने आम नागरिकों से आयोजन में सहभागिता करने और भगवान श्रीराम तथा भरत के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की है। समारोह के माध्यम से प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।

वर्ष 1971 से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए समिति लगातार प्रयासरत है। ऐसे आयोजन शहर की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के साथ स्थानीय समुदाय को एक साझा मंच भी प्रदान करते हैं। राम-भरत मिलाप का मूल संदेश यही है कि रिश्तों में त्याग, सम्मान और विश्वास को महत्व दिया जाए तथा समाज में आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर सद्भाव और एकता को मजबूत किया जाए। “Ram Bharat Milap”

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