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04/02/2026 7:59 am

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लाल शकरकंद: सेहत, ऊर्जा और प्राकृतिक पोषण का देसी सुपरफूड

लाल शकरकंद, जिसे भारतीय भाषाओं में शकरकंद, रताली या स्वीट पोटैटो भी कहा जाता है, हमारे देश के पारंपरिक आहार का हिस्सा रहा है। इसका उपयोग न सिर्फ व्रत-उपवास में किया जाता है, बल्कि सर्दियों में यह शरीर को ऊर्जा, गर्माहट और पोषण देने वाला सबसे सस्ता और भरोसेमंद प्राकृतिक सुपरफूड माना जाता है। लाल शकरकंद का लाल-बैंगनी रंग और इसका मीठा स्वाद इसे बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सबके लिए आदर्श भोजन बनाता है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी यह मानते हैं कि यह कंद सब्ज़ी कई रोगों को दूर करती है, पाचन को मजबूत बनाती है, वजन कम करने में सहायक होती है और शरीर की अंदरूनी शक्ति को बढ़ाती है।

लाल शकरकंद की पहचान और पोषक महत्व

लाल शकरकंद का रंग इसके अंदर मौजूद बीटा-कैरोटीन और एंथोसायनिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स की वजह से होता है। इन एंटीऑक्सीडेंट्स का कार्य शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाना, कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना है। आधुनिक पोषण विज्ञान बताता है कि शकरकंद में विटामिन A, C, B6, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और भरपूर फाइबर मौजूद होता है, जो इसे एक संपूर्ण पोषक आहार बनाता है। लाल शकरकंद विशेष रूप से दृष्टि, त्वचा और इम्युनिटी के लिए लाभकारी माना जाता है।

पाचन शक्ति और आंतों के स्वास्थ्य के लिए वरदान

शकरकंद फाइबर से भरपूर होता है और यह पाचन तंत्र को सुचारु करता है। इसका नियमित सेवन आंतों की गतिशीलता बढ़ाता है, जिससे कब्ज़ जैसी समस्या दूर होती है। भोजन में फाइबर की कमी होने पर शरीर में गैस, एसिडिटी और कोलन से जुड़ी परेशानियाँ बढ़ने लगती हैं। लाल शकरकंद का घुलनशील फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और आंतों की सफाई को आसान बनाता है। इसे उबालकर या भूनकर खाने से पाचन प्राकृतिक रूप से बेहतर होता है।

ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत और सर्दियों में गर्माहट

सर्दियों में शरीर को गर्म रखने के लिए लोग भारी या तली-भुनी चीज़ें खाते हैं, लेकिन लाल शकरकंद एक ऐसा विकल्प है जो बिना नुकसान पहुँचाए शरीर को प्राकृतिक गर्माहट देता है। इसकी प्राकृतिक मिठास शरीर में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज़ करती है, जिससे ऊर्जा लंबे समय तक बनी रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान इसे खेतों में काम करने से पहले खाते थे ताकि पूरे दिन शरीर में ताकत और गर्माहट बनी रहे। आधुनिक लाइफस्टाइल में यह एक ‘स्मार्ट एनर्जी फूड’ बनकर उभरा है।

आंखों की रोशनी और त्वचा के लिए अमृत समान

लाल शकरकंद में मौजूद बीटा-कैरोटीन विटामिन A में बदलकर आँखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है। यह रेटिना को मजबूत बनाता है और रात में कम दिखाई देने की समस्या को सुधारने में सहायक होता है। त्वचा के लिए यह एंटी-एजिंग फूड माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कोलेजन के निर्माण को बढ़ाते हैं, जिससे त्वचा में चमक आती है, झुर्रियों की प्रक्रिया धीमी होती है और त्वचा अंदर से स्वस्थ बनती है।

डायबिटीज मरीजों के लिए समझदारी भरा विकल्प

हालाँकि शकरकंद का स्वाद मीठा होता है, लेकिन इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम है। यह रक्त में शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है और अचानक स्पाइक नहीं आने देता। सीमित मात्रा में लेने पर यह डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित और लाभकारी भोजन माना जाता है। शोध बताते हैं कि शकरकंद इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करता है और रक्त शर्करा को संतुलित रखता है।

वजन घटाने वालों के लिए बेहतरीन भोजन

शकरकंद का फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिसके कारण बार-बार खाने की इच्छा कम होती है। वजन घटाने के लिए कम कैलोरी, अधिक फाइबर और प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट्स का संयोजन बेहद प्रभावी माना जाता है। यदि इसे शाम के स्नैक के रूप में उबालकर या भूनकर खाया जाए, तो यह बाजार की तली-भुनी चीज़ों से कहीं ज्यादा स्वस्थ और लाभकारी होता है।

व्रत और उपवास में शकरकंद की अहम भूमिका

भारतीय संस्कृति में शकरकंद को ऊर्जा का शुद्ध स्रोत माना गया है, इसलिए नवरात्रि, एकादशी और सावन जैसे उपवासों में इसे प्रमुखता दी जाती है। व्रत के दौरान शरीर में ग्लूकोज कम हो जाता है, जिससे कमजोरी महसूस होती है। शकरकंद तुरंत ऊर्जा देकर शरीर को स्थिर रखता है। यह पेट को हल्का भी रखता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता।

लाल और सफेद शकरकंद का अंतर और उपयोग

लाल शकरकंद एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और इम्युनिटी, त्वचा और आँखों को मजबूत करता है। जबकि सफेद शकरकंद पाचन के लिए हल्का माना जाता है और गैस, एसिडिटी व पेट की समस्याओं में आराम देता है। दोनों ही प्रकार अपने-अपने औषधीय गुणों की वजह से भारतीय आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

शकरकंद से बनने वाले स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन

शकरकंद को भारतीय रसोई में कई रूपों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे उबालकर, भूनकर, सलाद में, चाट के रूप में, टिक्की या हलवे के रूप में आसानी से खाया जा सकता है। यह बच्चों के लिए हेल्दी स्नैक, बुज़ुर्गों के लिए पाचन-अनुकूल भोजन और व्रत में ऊर्जा देने वाला सर्वोत्तम विकल्प है।

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