खर्राटे सोते समय निकलने वाली एक ऐसी आवाज होती है जो तब उत्पन्न होती है जब सांस लेने के दौरान गले या नाक की वायुनली संकरी हो जाती है। इस स्थिति में जब हवा तेजी से अंदर-बाहर होती है, तो आसपास की मांसपेशियां कंपन करने लगती हैं और खर्राटे जैसी आवाज पैदा होती है। यह समस्या पुरुषों में अधिक देखी जाती है, लेकिन महिलाएं और बच्चे भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या और बढ़ जाती है क्योंकि गले की मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती हैं। कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक रहने वाले तेज खर्राटे गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।
खर्राटे आने के मुख्य कारण क्या हैं
खर्राटों के पीछे कई शारीरिक और जीवनशैली से जुड़े कारण होते हैं। नाक में एलर्जी, सर्दी, जुकाम या साइनस की समस्या होने पर वायुमार्ग संकुचित हो जाता है जिससे सांस लेने में बाधा आती है और खर्राटे शुरू हो जाते हैं। मोटापा भी एक बड़ा कारण है क्योंकि गर्दन के आसपास जमा चर्बी गले की नली को दबाती है। पीठ के बल सोने की आदत से जीभ पीछे की ओर गिर जाती है, जिससे सांस का रास्ता आंशिक रूप से बंद हो जाता है। धूम्रपान और शराब का सेवन भी गले की मांसपेशियों को शिथिल करता है, जिससे खर्राटों की समस्या बढ़ती है। नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या भी इस समस्या को गंभीर बना सकती है।
स्लीप एपनिया: जब खर्राटे बन जाते हैं खतरनाक संकेत
कुछ मामलों में खर्राटे केवल आवाज तक सीमित नहीं रहते बल्कि यह स्लीप एपनिया नामक गंभीर बीमारी का रूप ले लेते हैं। इस स्थिति में सोते समय सांस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है और बार-बार यह प्रक्रिया दोहराई जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों को सुबह उठते ही सिर दर्द, अत्यधिक थकान, चिड़चिड़ापन और दिनभर नींद आने की शिकायत रहती है। यदि किसी व्यक्ति को बहुत तेज खर्राटे आते हों और साथ में सांस रुकने की समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
खर्राटे रोकने के घरेलू उपाय जो सच में असरदार हैं
घरेलू उपायों से अधिकांश मामलों में खर्राटों में काफी राहत मिल सकती है। रात को सोने से पहले गुनगुने पानी की भाप लेने से नाक और गले की नलियां साफ होती हैं जिससे सांस लेने में आसानी होती है। हल्दी वाला दूध पीने से गले की सूजन कम होती है और श्वसन मार्ग खुला रहता है। शहद में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण होते हैं, इसलिए सोने से पहले शहद का सेवन करने से भी फायदा होता है। नाक में सरसों या तिल के तेल की दो बूंद डालने से सूखापन दूर होता है और हवा का प्रवाह बेहतर होता है। नियमित रूप से इन उपायों को अपनाने से कुछ ही दिनों में खर्राटों की तीव्रता में कमी महसूस होने लगती है।
खर्राटे रोकने में योग और प्राणायाम की भूमिका
योग और प्राणायाम खर्राटों के इलाज में अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। अनुलोम-विलोम प्राणायाम से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस की नलियां मजबूत होती हैं। भ्रामरी प्राणायाम से गले और नाक की मांसपेशियों में कंपन कम होता है जिससे खर्राटों की आवाज घटती है। उज्जायी प्राणायाम श्वसन तंत्र को मजबूत बनाता है और ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर करता है। सिंहासन जैसे योगासन से गले की मांसपेशियां सशक्त होती हैं जिससे वायुमार्ग खुला रहता है। यदि प्रतिदिन सुबह खाली पेट 15 से 20 मिनट तक इन योग क्रियाओं का अभ्यास किया जाए तो खर्राटों की समस्या में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
जीवनशैली में बदलाव से कैसे खत्म हो सकते हैं खर्राटे
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर खर्राटों से स्थायी राहत पाई जा सकती है। वजन नियंत्रित रखने से गर्दन पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और सांस की नली खुली रहती है। सोने से कम से कम दो घंटे पहले भारी भोजन करने से बचना चाहिए क्योंकि पेट भरा होने पर डायाफ्राम पर दबाव पड़ता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखना बेहद जरूरी है क्योंकि ये दोनों ही गले की मांसपेशियों को ढीला करते हैं। सोते समय करवट लेकर सोने की आदत डालने से जीभ पीछे की ओर नहीं गिरती और खर्राटों की संभावना कम हो जाती है। नियमित नींद का समय तय करना भी इस समस्या से बचाव में सहायक होता है।
मेडिकल इलाज: जब घरेलू उपाय न करें काम
जब घरेलू उपाय, योग और जीवनशैली सुधार से राहत न मिले तब मेडिकल इलाज की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर नाक की जांच कर यह पता लगाते हैं कि कहीं नाक की हड्डी टेढ़ी तो नहीं है या टॉन्सिल अधिक बढ़े हुए तो नहीं हैं। कुछ मामलों में नाक के स्प्रे, एलर्जी की दवाएं या डेंटल डिवाइस दिए जाते हैं जो सोते समय जबड़े को सही स्थिति में रखते हैं। स्लीप एपनिया के मरीजों के लिए CPAP मशीन का उपयोग किया जाता है जो नींद के दौरान निरंतर हवा प्रवाहित कर सांस की नली को खुला रखती है। गंभीर मामलों में सर्जरी भी की जाती है जिससे वायुमार्ग की रुकावट को दूर किया जाता है।
खर्राटे और रिश्तों पर इसका असर
खर्राटे केवल स्वास्थ्य समस्या ही नहीं बल्कि पारिवारिक और वैवाहिक जीवन पर भी असर डालते हैं। तेज खर्राटों के कारण साथी की नींद बार-बार टूटती है जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव और रिश्तों में दूरी पैदा हो सकती है। कई बार लोग शर्मिंदगी के कारण सामाजिक मेलजोल से बचने लगते हैं। समय रहते इसका समाधान न किया जाए तो यह मानसिक तनाव का कारण भी बन सकता है। इसलिए खर्राटों को मामूली समस्या समझकर टालना नहीं चाहिए बल्कि इसका उचित इलाज करवाना चाहिए।
कब डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए
यदि व्यक्ति को हर रात तेज खर्राटे आते हों, नींद के दौरान सांस रुकती हो, सुबह उठते ही सिर दर्द हो, दिनभर अत्यधिक थकान महसूस होती हो और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत ENT विशेषज्ञ या स्लीप स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए ताकि समय रहते सही उपचार मिल सके और भविष्य की गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सके।
सही इलाज से खर्राटों से पाएं स्थायी राहत
खर्राटे एक आम समस्या जरूर हैं लेकिन यह शरीर के अंदर चल रही गड़बड़ी का संकेत भी हो सकते हैं। सही समय पर घरेलू उपाय, योग-प्राणायाम, जीवनशैली सुधार और जरूरत पड़ने पर मेडिकल इलाज अपनाकर इस समस्या से पूरी तरह राहत पाई जा सकती है। यदि नियमित प्रयास किए जाएं तो अधिकांश मामलों में बिना दवा के ही खर्राटों को नियंत्रित किया जा सकता है और शांतिपूर्ण नींद का आनंद लिया जा सकता है।





