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20/09/2026 4:52 pm

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Millet Diet-जिस बाजरे को गांव की रोटी समझा गया, वह अब स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन की लैब में है

Millet Diet

भारत में बाजरा यानी pearl millet कोई नया स्वास्थ्य भोजन नहीं है। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और देश के कई अन्य हिस्सों में बाजरे की रोटी, खिचड़ी और दलिया लंबे समय से भोजन का हिस्सा रहे हैं। लेकिन आधुनिक nutrition science अब इस पारंपरिक अनाज को performance nutrition के नजरिए से भी देख रही है। 22 मई 2026 को Scientific Reports में प्रकाशित एक randomized controlled trial ने 18 से 25 वर्ष की उम्र के पुरुष एथलीटों में यह जांचने की कोशिश की कि नियमित अनाज के एक हिस्से की जगह बाजरा लेने से शारीरिक प्रदर्शन और recovery से जुड़े संकेतकों पर क्या असर पड़ सकता है। “Millet Diet”

60 युवा एथलीटों को 60 दिनों तक देखा गया

अध्ययन में 60 प्रशिक्षित पुरुष एथलीट शामिल थे, जिन्हें बेतरतीब ढंग से दो समूहों में बांटा गया। प्रयोग वाले समूह में सामान्य अनाज की जगह लगभग एक-तिहाई cereal intake को pearl millet से बदला गया। शोधकर्ताओं ने हस्तक्षेप के दौरान प्रतिदिन लगभग 100 ग्राम बाजरा देने की योजना बनाई और इसे 60 दिनों तक जारी रखा। नियंत्रण समूह ने अपनी सामान्य cereal-based diet जारी रखी। प्रतिभागी हरियाणा के फरीदाबाद क्षेत्र से लिए गए और सभी की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच थी। “Millet Diet”

ताकत में हुआ उल्लेखनीय सुधार

60 दिनों के बाद बाजरा वाले समूह में handgrip muscular strength का औसत मान लगभग 35.3 किलोग्राम से बढ़कर 42.8 किलोग्राम हुआ। शोधकर्ताओं ने strength में महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया। यह परिणाम दिलचस्प जरूर है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बाजरा अकेले मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है। प्रतिभागी नियमित प्रशिक्षण कर रहे थे और बाजरा उनकी पूरी lifestyle का केवल एक हिस्सा था। इसलिए भोजन को training programme से अलग करके देखना उचित नहीं होगा। “Millet Diet”

VO₂ max और endurance में भी सकारात्मक संकेत

अध्ययन में अनुमानित VO₂ max लगभग 47.8 से बढ़कर 49.5 mL/kg/min हुआ। endurance test में प्रतिभागियों द्वारा तय की गई दूरी भी लगभग 1,359 मीटर से बढ़कर 1,566 मीटर हुई और cumulative exercise time में भी वृद्धि दर्ज की गई। Resting heart rate लगभग 80 से घटकर 75 beats per minute हुआ। ये बदलाव performance की दृष्टि से दिलचस्प हैं, लेकिन अध्ययन में VO₂ max सीधे laboratory gas analysis से नहीं मापा गया था; इसे Yo-Yo Intermittent Recovery Test की दूरी के आधार पर अनुमानित किया गया था।

बाजरे में ऐसा क्या है जो खिलाड़ियों के लिए उपयोगी हो सकता है

Pearl millet में carbohydrate, protein, dietary fibre और कई minerals पाए जाते हैं। अध्ययन के लेखक बताते हैं कि इसमें iron, calcium, zinc और antioxidant compounds भी मौजूद होते हैं। खेल पोषण में carbohydrate महत्वपूर्ण है क्योंकि endurance activity के दौरान शरीर glycogen stores का इस्तेमाल करता है। Protein muscle repair और maintenance में महत्वपूर्ण है। लेकिन इन पोषक तत्वों की मौजूदगी अपने आप यह साबित नहीं करती कि बाजरा हर athlete में performance बढ़ाएगा। वास्तविक लाभ पूरी diet, training load और कुल energy intake पर निर्भर करता है। “Millet Diet”

क्या बाजरे ने inflammation कम कर दी?

यहां रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण नकारात्मक निष्कर्ष सामने आता है। शोधकर्ताओं ने IL-6, TNF-alpha और high-sensitivity CRP जैसे inflammatory markers की जांच की, लेकिन बाजरा खाने वाले समूह में इन markers में उल्लेखनीय बदलाव नहीं मिला। इसलिए बाजरे को इस अध्ययन के आधार पर anti-inflammatory treatment या recovery supplement कहना सही नहीं होगा। शोध का performance वाला परिणाम सकारात्मक था, लेकिन inflammation वाले परिणामों ने वैसा स्पष्ट लाभ नहीं दिखाया।

Recovery के दावे में भी सावधानी जरूरी है

अध्ययन का शीर्षक recovery पर भी केंद्रित था, लेकिन उपलब्ध परिणामों में अधिकांश immunomodulatory markers और recovery indicators में महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं मिले। इसका मतलब यह है कि बाजरे को “खिलाड़ियों की recovery तेज करने वाला प्रमाणित भोजन” कहना अभी उचित नहीं होगा। बेहतर शब्द यह होगा कि 60 दिनों के इस trial में बाजरा आधारित cereal substitution के साथ strength और endurance में सुधार के संकेत मिले, जबकि कई biological markers में स्पष्ट बदलाव नहीं आया।

बाजरा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पहले शोध हो चुका है

इसी research team से जुड़े 2025 के एक randomized controlled trial में 60 युवा पुरुष एथलीटों पर pearl millet diet का mental health और metacognitive skills पर प्रभाव देखा गया था। उस अध्ययन में बाजरा समूह में disordered eating behaviour में कमी तथा planning, monitoring और evaluation जैसे metacognitive skills में सुधार दर्ज किया गया। हालांकि यह अलग study थी और उसके परिणामों को 2026 के physical-performance trial के साथ मिलाकर एक ही निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

क्या आम व्यक्ति को भी 100 ग्राम बाजरा रोज खाना चाहिए?

इस अध्ययन से ऐसा कोई सार्वभौमिक prescription नहीं निकलता। प्रतिभागी युवा, स्वस्थ, पुरुष और नियमित रूप से प्रशिक्षण लेने वाले athletes थे। उनका diet pattern सामान्य आबादी से अलग था। इसलिए 50 या 60 वर्ष के व्यक्ति, महिला, sedentary lifestyle वाले व्यक्ति या किसी बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति पर वही परिणाम लागू होंगे, ऐसा नहीं कहा जा सकता। किसी भी व्यक्ति की diet उम्र, स्वास्थ्य, activity level और कुल nutritional needs के अनुसार तय होनी चाहिए।

बाजरे को चमत्कारी भोजन बनाने की जरूरत नहीं

मिलेट्स की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनके बारे में कई अतिशयोक्तिपूर्ण दावे भी सामने आते हैं। बाजरा न तो हर बीमारी का इलाज है और न ही हर व्यक्ति के लिए गेहूं या चावल से अनिवार्य रूप से बेहतर है। यह एक पौष्टिक whole grain है जिसे विविध और संतुलित भोजन में शामिल किया जा सकता है। भोजन की गुणवत्ता केवल एक अनाज से तय नहीं होती; दाल, सब्जियां, फल, protein sources, healthy fats और कुल energy balance भी महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय रसोई का पारंपरिक ज्ञान यहां फिर सामने आता है

बाजरे की रोटी और खिचड़ी को आधुनिक sports nutrition में देखकर एक दिलचस्प बात सामने आती है। ग्रामीण भारत में जिस भोजन को लंबे समय तक उपलब्धता, affordability और स्थानीय कृषि के कारण खाया गया, उसमें आधुनिक पोषण विज्ञान अब performance के संभावित उपयोग तलाश रहा है। इसका अर्थ यह नहीं कि हमारे पूर्वजों ने आधुनिक sports science को पहले ही खोज लिया था। बल्कि यह बताता है कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों में वैज्ञानिक अध्ययन के योग्य पोषण संबंधी विशेषताएं हो सकती हैं।

इस रिसर्च की सबसे बड़ी सीमा क्या है?

अध्ययन में केवल 60 प्रतिभागी थे, हस्तक्षेप 60 दिनों का था और follow-up intervention खत्म होने के बाद नहीं किया गया। प्रतिभागियों और intervention providers को dietary intervention की प्रकृति के कारण blind करना संभव नहीं था। इसके अलावा अध्ययन में युवा पुरुष team-sport athletes शामिल थे, इसलिए परिणामों की generalizability सीमित है। स्वयं शोधकर्ताओं ने भी इसे preliminary exploratory evidence के रूप में प्रस्तुत किया है।

बाजरे की असली ताकत शायद उसकी सादगी में है

2026 के randomized controlled trial में 60 युवा पुरुष athletes पर 60 दिनों तक लगभग 100 ग्राम प्रतिदिन pearl millet को सामान्य cereals के एक हिस्से के स्थान पर देने से muscular strength, अनुमानित VO₂ max और endurance performance में सुधार के संकेत मिले। दूसरी ओर IL-6, TNF-alpha और hs-CRP जैसे प्रमुख inflammatory markers में महत्वपूर्ण बदलाव नहीं मिला।

इसलिए आज का वैज्ञानिक निष्कर्ष यह नहीं है कि “बाजरा खाने से खिलाड़ी बन जाएंगे।” ज्यादा सटीक निष्कर्ष यह है कि बाजरा एक उपयोगी whole grain हो सकता है और युवा athletes में नियमित diet के हिस्से के रूप में इसके performance benefits की संभावना पर अब बेहतर clinical evidence बनना शुरू हुआ है। बड़े और लंबे trials यह बताएंगे कि ये लाभ कितने स्थायी हैं और क्या यही प्रभाव महिलाओं, दूसरे आयु वर्गों और अलग-अलग खेलों के खिलाड़ियों में भी दिखाई देता है।

भारत के लिए शायद सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस बाजरे को कभी सिर्फ ग्रामीण भोजन माना जाता था, वह अब आधुनिक sports nutrition के सवालों का हिस्सा बन चुका है। हमारी थाली और आधुनिक विज्ञान के बीच यह संवाद अभी शुरू हुआ है—और आने वाले वर्षों में इसकी कहानी और दिलचस्प हो सकती है।

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