जिस पौधे की पत्तियां गांवों में सब्जी थीं, अब उससे बन रहे हैं muffins और cookies
भारत में मोरिंगा यानी सहजन का पेड़ किसी introduction का मोहताज नहीं है। इसकी फलियों की सब्जी, पत्तियों का इस्तेमाल और कुछ क्षेत्रों में फूलों के व्यंजन पारंपरिक भोजन का हिस्सा हैं। लेकिन आधुनिक food science अब सवाल पूछ रही है कि क्या इस पौधे के ज्यादा से ज्यादा हिस्सों को स्वादिष्ट, सुरक्षित और उपयोगी food ingredients में बदला जा सकता है। अगस्त 2026 में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ी एक नई food-processing initiative ने मोरिंगा के लगभग पूरे पौधे का बेहतर उपयोग करने की दिशा में किए गए काम को सामने रखा है। “Moringa Benefits”
मोरिंगा को ‘miracle tree’ क्यों कहा जाता है
मोरिंगा को कई जगह “miracle tree” कहा जाता है क्योंकि इसकी पत्तियों, फलियों, बीजों और अन्य हिस्सों में विभिन्न nutrients और bioactive compounds पाए जाते हैं। इसकी पत्तियों में protein, fibre और कई micronutrients मौजूद होते हैं। लेकिन “miracle tree” शब्द वैज्ञानिक diagnosis या treatment claim नहीं है। किसी पौधे में पोषक तत्व मौजूद होने का अर्थ यह नहीं कि वह diabetes, cancer, blood pressure या किसी दूसरी बीमारी का इलाज करता है। इसलिए मोरिंगा की कहानी को nutrition और food innovation के संदर्भ में देखना ज्यादा सही है।
नई पहल का केंद्र सिर्फ पत्तियां नहीं हैं
Punjab Agricultural University के Department of Food Science and Technology के वैज्ञानिकों ने मोरिंगा की leaves के साथ-साथ flowers, seeds, kernels और pods के उपयोग पर processing technologies विकसित करने की दिशा में काम किया है। इसका उद्देश्य केवल nutrition बढ़ाना नहीं, बल्कि plant के ऐसे हिस्सों को भी उपयोग में लाना है जो processing के दौरान कम इस्तेमाल होते हैं या by-product के रूप में बच जाते हैं।
मोरिंगा के बीजों से flour बनाने की कोशिश
इस पहल की एक दिलचस्प दिशा moringa kernels से flour तैयार करना है। बीजों के kernel को food ingredient में बदलने से मोरिंगा का उपयोग traditional sabzi से आगे बढ़कर bakery और snack products तक किया जा सकता है। यह food innovation इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी पौधे को लोकप्रिय बनाने के लिए केवल उसके स्वास्थ्य लाभ बताना पर्याप्त नहीं होता। स्वाद, texture, shelf life और उपयोग में आसानी भी उतनी ही जरूरी हैं। “Moringa Benefits”
बचने वाले seed cake का भी इस्तेमाल
तेल निकालने या processing के बाद बचने वाला seed cake अक्सर मुख्य food product जितना आकर्षक नहीं माना जाता। PAU researchers ने इसके संभावित food applications पर भी काम किया है। यदि किसी agricultural raw material के ज्यादा हिस्से का सुरक्षित और उपयोगी इस्तेमाल हो सके तो food waste कम करने और resource efficiency बढ़ाने की संभावना बनती है। “Moringa Benefits”
स्वास्थ्य के साथ स्वाद भी जरूरी है
मोरिंगा का सबसे बड़ा culinary challenge उसका distinctive और कई लोगों को कड़वा लगने वाला स्वाद है। यदि कोई ingredient nutrition से भरपूर हो लेकिन परिवार उसे खाना पसंद ही न करे, तो उसका वास्तविक dietary impact सीमित रहेगा। PAU की food-processing research का एक उद्देश्य इसी taste barrier को कम करना है। मोरिंगा को cheela, muffins और cookies जैसे familiar formats में इस्तेमाल करके इसे नए consumers तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
Cheela में मोरिंगा की कहानी सबसे दिलचस्प क्यों है
भारतीय भोजन में cheela पहले से लोकप्रिय है और इसे अलग-अलग आटे तथा ingredients के साथ बनाया जाता है। ऐसे परिचित भोजन में moringa ingredient शामिल करना किसी नए विदेशी food को लोगों से स्वीकार कराने की तुलना में आसान हो सकता है। Food innovation की सफलता कई बार ingredient से ज्यादा इस बात पर निर्भर करती है कि वह ingredient consumer की existing food habits में कितनी आसानी से फिट होता है। “Moringa Benefits”
Muffins और cookies का उद्देश्य सिर्फ ‘healthy junk food’ बनाना नहीं
मोरिंगा को bakery products में शामिल करने का अर्थ यह नहीं कि cookies या muffins अचानक health food बन जाते हैं। यदि किसी product में refined flour, added sugar और fat की मात्रा ज्यादा है, तो उसमें थोड़ा moringa ingredient होने से पूरा product स्वतः healthy नहीं हो जाता। यह distinction महत्वपूर्ण है, क्योंकि “moringa cookie” को देखकर consumer उसे unlimited मात्रा में खाने योग्य health food समझ सकता है। Food की पूरी nutritional composition देखना जरूरी है।
मोरिंगा और food waste का रिश्ता
भारत में food loss और agricultural by-products का बेहतर उपयोग sustainability के लिए महत्वपूर्ण है। यदि मोरिंगा के विभिन्न हिस्सों को सुरक्षित तरीके से food ingredients में बदला जा सके, तो एक ही crop से अधिक value निकाली जा सकती है। इसका लाभ किसान, food processors और consumers—तीनों को मिल सकता है। लेकिन इसके लिए processing cost, food safety, shelf stability और consumer acceptance की वास्तविक testing जरूरी होगी।
क्या मोरिंगा हर व्यक्ति के लिए जरूरी है
नहीं। किसी भी पौधे को superfood कहकर हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। संतुलित diet में vegetables, fruits, pulses, whole grains, nuts, seeds और पर्याप्त protein का विविध combination अधिक महत्वपूर्ण है। मोरिंगा इस विविध diet का एक ingredient हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति इसे स्वाद और स्थानीय उपलब्धता के अनुसार भोजन में शामिल करना चाहता है, तो सामान्य food quantities में यह dietary variety का हिस्सा बन सकता है।
मोरिंगा powder और supplements से अलग है यह approach
बाजार में moringa leaf powder और supplements पहले से उपलब्ध हैं। लेकिन food-processing research का उद्देश्य इसे केवल capsule या powder के रूप में बेचने से अलग है। यहां सवाल है कि पूरे पौधे के अलग-अलग edible components को everyday foods में किस तरह इस्तेमाल किया जाए। इससे moringa का उपयोग उन लोगों तक भी पहुंच सकता है जो supplements नहीं लेना चाहते लेकिन सामान्य भोजन में इसे शामिल कर सकते हैं।
किसान के लिए भी खुल सकता है नया बाजार
यदि moringa-based ingredients का consumer acceptance बढ़ता है तो farmers के लिए value-added products का बाजार बन सकता है। Seeds, kernels, leaves और pods की अलग-अलग processing chains विकसित हो सकती हैं। लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। किसी crop को commercial trend बनाने से पहले stable demand, fair pricing, quality standards और processing infrastructure सुनिश्चित करना होगा। केवल social media popularity किसान की आय की गारंटी नहीं देती।
स्थानीय भोजन और आधुनिक food technology का मेल
सहजन की कहानी इस बात का अच्छा उदाहरण है कि food innovation हमेशा किसी बिल्कुल नए ingredient से शुरू नहीं होती। कभी-कभी समाधान हमारे आसपास उगने वाले पौधों में होता है, लेकिन उसे आधुनिक processing, packaging और product development की जरूरत होती है। भारत में ऐसी अनेक regional crops और plants हैं जिन्हें स्थानीय स्तर पर जाना जाता है लेकिन national food market में उनकी उपयोगिता सीमित है।
क्या इससे पोषण की समस्या हल हो जाएगी?
बिल्कुल नहीं। मोरिंगा एक ingredient है, complete nutrition solution नहीं। भारत में malnutrition और micronutrient deficiency जैसी समस्याओं के लिए diverse diet, maternal and child nutrition, food security, sanitation, healthcare और socioeconomic conditions सभी महत्वपूर्ण हैं। किसी एक पौधे को nutrition policy का substitute बनाना वैज्ञानिक रूप से गलत होगा।
वैज्ञानिक शोध में सबसे जरूरी है प्रमाण
मोरिंगा के बारे में laboratory और nutritional studies में कई संभावित benefits की चर्चा मिलती है, लेकिन किसी specific disease पर clinical treatment claim के लिए मजबूत human trials जरूरी होते हैं। इसलिए “मोरिंगा diabetes ठीक करता है”, “BP सामान्य करता है” या “हर बीमारी से बचाता है” जैसे दावों से सावधान रहना चाहिए। इस नई food-processing initiative का मुख्य महत्व disease treatment में नहीं, बल्कि food utilization, acceptability और waste reduction में है।
भविष्य में मोरिंगा की थाली कैसी दिख सकती है
एक तरफ पारंपरिक सहजन की सब्जी और पत्तियों का इस्तेमाल जारी रह सकता है, दूसरी तरफ moringa-based flour, cheela और bakery products आधुनिक kitchens में जगह बना सकते हैं। यदि processing technologies स्वाद और nutritional quality दोनों को बेहतर ढंग से संतुलित कर सकें, तो मोरिंगा एक versatile food ingredient बन सकता है। लेकिन consumer acceptance, cost और long-term dietary use पर वास्तविक बाजार और nutrition studies अभी महत्वपूर्ण रहेंगी।
‘सुपरफूड’ से ज्यादा जरूरी है ‘स्मार्ट फूड’
अगस्त 2026 में सामने आई पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की पहल ने मोरिंगा के पत्तों से आगे बढ़कर flowers, seeds, kernels और pods के बेहतर उपयोग की दिशा दिखाई है। Researchers ने moringa-based flour और cheela, muffins तथा cookies जैसे products विकसित करने की कोशिश की है, जबकि seed cake जैसे by-products के उपयोग पर भी ध्यान दिया गया है।
इस कहानी की असली खूबसूरती यह नहीं कि मोरिंगा को फिर से “चमत्कारी पौधा” कहा जा रहा है। असली बात यह है कि एक पारंपरिक भारतीय पौधे को आधुनिक food science स्वाद, उपयोगिता और कम waste के नजरिए से फिर से देख रही है।
कल की healthy Indian kitchen शायद केवल कम चीनी और कम तेल वाली रसोई नहीं होगी। वह ऐसी रसोई भी हो सकती है जहां एक ही पौधे के ज्यादा हिस्से उपयोग में आएं, स्थानीय ingredients नए रूप में दिखाई दें और भोजन का स्वाद भी बना रहे।
यानी भविष्य का food trend शायद हमेशा बाहर से आने वाला superfood नहीं होगा। कभी-कभी वह हमारे घर के आंगन में पहले से खड़ा सहजन का पेड़ भी हो सकता है।






