रांची | शिक्षा एवं स्वास्थ्य | झारखंड समाचार
रक्तदान को जीवन बचाने का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। किसी दुर्घटना, गंभीर बीमारी, ऑपरेशन या आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में समय पर रक्त उपलब्ध होना किसी जरूरतमंद के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। इसी सामाजिक जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (BIT), मेसरा की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रिम्स एवं अन्य अस्पतालों के सहयोग से आयोजित इस शिविर में संस्थान के छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर में स्वयंसेवकों के रक्तदान से 400 से अधिक यूनिट रक्त संग्रह किया गया। इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करने और समाज में नियमित रक्तदान की भावना विकसित करने का संदेश दिया गया। “Blood Donation Camp”
BIT मेसरा में रक्तदान शिविर का उद्घाटन, छात्र मामलों के डीन ने की शुरुआत
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन संस्थान के छात्र मामलों के डीन डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने रक्तदान को मानवता की सेवा से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य बताया। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक महादान है और प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को अपनी क्षमता एवं चिकित्सकीय पात्रता के अनुसार इस पुण्य कार्य में सहयोग करना चाहिए। रक्त की जरूरत किसी भी व्यक्ति को कभी भी पड़ सकती है। ऐसे में समाज के लोगों को आगे आकर रक्तदान करना चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके।
डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव ने युवाओं से इस अभियान को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित नहीं रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है, जितना स्वयं रक्तदान करना। यदि युवा वर्ग इस दिशा में पहल करे और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को प्रेरित करे, तो रक्त की कमी से जूझ रहे अस्पतालों और मरीजों को काफी मदद मिल सकती है। “Blood Donation Camp”
रक्तदान को अभियान बनाकर बचाई जा सकती हैं लोगों की जान: डॉ. ओपी पांडेय
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ओ.पी. पांडेय ने रक्तदान को एक व्यापक सामाजिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल व्यक्तिगत सेवा नहीं, बल्कि समाज के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी है। अस्पतालों में भर्ती कई मरीजों को उपचार के दौरान रक्त और उसके विभिन्न घटकों की आवश्यकता होती है। दुर्घटनाओं में घायल लोगों, गंभीर रूप से बीमार मरीजों और जटिल ऑपरेशन से गुजर रहे लोगों के लिए समय पर रक्त की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि यदि रक्तदान को नियमित सामाजिक अभियान बनाया जाए, तो जरूरतमंद मरीजों को समय पर सहायता मिल सकती है। इसके लिए युवाओं, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। डॉ. पांडेय ने इस तरह के आयोजनों को समाज में जागरूकता फैलाने और लोगों को मानव सेवा के लिए प्रेरित करने का प्रभावी माध्यम बताया। “Blood Donation Camp”
NSS स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा, 400 से अधिक यूनिट रक्त संग्रह
इस रक्तदान शिविर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी रही। शिविर में संस्थान के विद्यार्थियों और राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े स्वयंसेवकों ने उत्साह के साथ रक्तदान किया। आयोजन के दौरान 400 से अधिक यूनिट रक्त संग्रह किया गया। यह उपलब्धि युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी और जरूरतमंद लोगों की सहायता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान और रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी है। विद्यार्थी जब इस तरह के सामाजिक कार्यों में भाग लेते हैं, तो उनमें सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं का विकास होता है। रक्तदान के माध्यम से युवा यह साबित कर रहे हैं कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सामूहिक प्रयास कितने महत्वपूर्ण हैं। “Blood Donation Camp”
रिम्स और अन्य अस्पतालों के सहयोग से आयोजित हुआ शिविर
इस रक्तदान शिविर का आयोजन रिम्स तथा अन्य अस्पतालों के सहयोग से किया गया। चिकित्सा संस्थानों का सहयोग ऐसे आयोजनों को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्तदान के दौरान दाताओं की स्वास्थ्य संबंधी प्रारंभिक जांच, रक्तदान की पात्रता का आकलन और सुरक्षित तरीके से रक्त संग्रह जैसी प्रक्रियाओं का विशेष महत्व होता है।
रक्तदान के बाद संग्रहित रक्त की जांच और सुरक्षित भंडारण भी जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा सके। इस तरह के शिविर अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता बनाए रखने और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। BIT मेसरा की NSS इकाई की यह पहल शिक्षा संस्थानों और चिकित्सा संस्थानों के बीच सामाजिक सहयोग का उदाहरण भी है। “Blood Donation Camp”
कार्यक्रम में कई अधिकारी और शिक्षक रहे मौजूद
शिविर के दौरान संस्थान के कई अधिकारी और कार्यक्रम से जुड़े शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संजीत कुमार, डॉ. संजीव तिवारी, डॉ. अभिजीत नाग, डॉ. प्रांजल कुमार और डॉ. सुमित श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने रक्तदान के महत्व और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति और छात्र प्रतिनिधियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अध्यक्ष पुरुषोत्तम, महासचिव आनंद, संयुक्त सचिव रितेश और सौरव सहित अन्य कार्यकारी सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्था और संचालन में सहयोग किया। सामूहिक प्रयासों से शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और बड़ी संख्या में रक्त यूनिट का संग्रह संभव हो सका। “Blood Donation Camp”
रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका
शिक्षण संस्थान केवल पढ़ाई और शोध के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। BIT मेसरा की NSS इकाई की ओर से आयोजित यह शिविर इसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है। जब विद्यार्थी स्वयं रक्तदान जैसे मानवीय कार्यों में भाग लेते हैं, तो इसका सकारात्मक संदेश अन्य युवाओं और समाज के लोगों तक भी पहुंचता है।
राष्ट्रीय सेवा योजना का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को समाज सेवा से जोड़ना और उनमें जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना है। रक्तदान शिविर जैसे आयोजन विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर देते हैं कि उनकी छोटी-सी पहल भी किसी जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ी मदद बन सकती है। ऐसे कार्यक्रमों से युवाओं में सामाजिक सहभागिता, संवेदनशीलता और सेवा भावना को बढ़ावा मिलता है।
रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियां दूर करना भी जरूरी
समाज में आज भी रक्तदान को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं। कुछ लोग कमजोरी आने के डर से रक्तदान करने से बचते हैं, जबकि स्वस्थ और चिकित्सकीय रूप से पात्र व्यक्ति निर्धारित अंतराल पर सुरक्षित तरीके से रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान से पहले स्वास्थ्य जांच की जाती है और रक्तदान की पात्रता चिकित्सा मानकों के आधार पर तय होती है।
रक्तदान के बाद शरीर धीरे-धीरे दान किए गए रक्त की भरपाई करता है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति के लिए रक्तदान करना उचित नहीं होता। इसलिए रक्तदान से पहले डॉक्टर या अधिकृत चिकित्सा कर्मियों की सलाह और जांच जरूरी है। जागरूकता अभियानों के माध्यम से इन भ्रांतियों को दूर करना और स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है।
मानव सेवा का संदेश देकर संपन्न हुआ रक्तदान शिविर
BIT मेसरा की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की ओर से आयोजित इस शिविर में 400 से अधिक यूनिट रक्त का संग्रह होना आयोजन की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। रिम्स एवं अन्य अस्पतालों के सहयोग से संपन्न इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को समाज सेवा से जोड़ने के साथ रक्तदान के महत्व को भी सामने रखा। संस्थान के अधिकारियों, कार्यक्रम समन्वयकों और विद्यार्थियों ने मिलकर इस पहल को सफल बनाया।
इस आयोजन का मूल संदेश यही रहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक गतिविधि नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का अवसर है। यदि अधिक से अधिक स्वस्थ और पात्र लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आएं, तो रक्त की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। BIT मेसरा के विद्यार्थियों की यह पहल अन्य शिक्षण संस्थानों और युवाओं को भी मानव सेवा के ऐसे कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित कर सकती है।





