केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार युवाओं, खासकर Gen Z यानी नई युवा पीढ़ी, से सीधे संवाद बढ़ाने के लिए ‘One Day, One University’ कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस पहल के तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री को देश के किसी विश्वविद्यालय में जाकर छात्रों से सीधे बातचीत करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं, उनके विचारों और देश से जुड़े मुद्दों को सीधे समझना भी है। इस प्रस्तावित कार्यक्रम की जानकारी 19 अगस्त 2026 को सामने आई है और इसे लेकर सूत्रों ने समाचार एजेंसी PTI को जानकारी दी है।
छात्रों से आमने-सामने होगी बातचीत
‘One Day, One University’ की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें संवाद का केंद्र विश्वविद्यालय के छात्र होंगे। संबंधित केंद्रीय मंत्री को किसी विश्वविद्यालय में जाकर छात्रों के साथ बातचीत करनी होगी, उनके सवाल सुनने होंगे और अलग-अलग विषयों पर उनके विचार जानने होंगे। इस बातचीत में शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं, युवा नीति और देश के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। यानी सरकार की ओर से युवाओं तक संदेश पहुंचाने के साथ-साथ विश्वविद्यालयों से निकलने वाली आवाज को भी सरकार तक पहुंचाने का प्रयास होगा।
सरकारी योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी
इस पहल का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू केंद्र सरकार की उन योजनाओं को छात्रों तक पहुंचाना है, जो विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़ी हैं। अक्सर सरकारी योजनाओं की जानकारी होने के बावजूद पात्र छात्र उनका लाभ नहीं उठा पाते। ऐसे में विश्वविद्यालयों को सीधे संवाद का माध्यम बनाकर सरकार छात्रवृत्ति, कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता, शिक्षा और युवा कल्याण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी देने की कोशिश कर सकती है। PTI के अनुसार, कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री छात्रों को युवाओं और छात्रों के लिए उपलब्ध सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी देंगे।
क्यों पड़ी सीधे संवाद की जरूरत?
इस पहल को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब देश के विश्वविद्यालयों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की सक्रियता बढ़ी है। हाल के दिनों में NEET पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों के प्रदर्शन भी सामने आए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कुछ अन्य स्थानों पर छात्रों के विरोध प्रदर्शनों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया और युवाओं की चिंताओं को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाया है। ऐसे माहौल में सरकार का विश्वविद्यालयों तक सीधे पहुंचना युवाओं की नाराजगी, अपेक्षाओं और प्राथमिकताओं को समझने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
Gen Z को समझने की सरकार की कोशिश
‘One Day, One University’ को व्यापक रूप से Gen Z outreach के रूप में देखा जा रहा है। यह वह पीढ़ी है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में बड़ी हुई है और पारंपरिक राजनीतिक संवाद के बजाय सीधे, तेज और संवादात्मक संचार को अधिक महत्व देती है। सरकार की हालिया युवा पहुंच रणनीति में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर भी अधिक जोर दिखाई दे रहा है। 19 अगस्त 2026 को सामने आई एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्रियों की सोशल मीडिया सक्रियता और युवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी सरकार का ध्यान है। ‘One Day One University’
कैबिनेट बैठक में भी उठा मामला
सूत्रों के मुताबिक ‘One Day, One University’ कार्यक्रम का प्रस्ताव बुधवार, 19 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में भी चर्चा का हिस्सा बना। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में कार्यक्रम के विस्तृत क्रियान्वयन की पूरी समय-सारिणी या प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए निर्धारित कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल इसे सरकार की प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी युवा पहुंच पहल के रूप में देखना अधिक उचित होगा। ‘One Day One University’
इन दो मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी
रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को विश्वविद्यालयों और कार्यक्रम में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है। इसका मतलब यह है कि कार्यक्रम को केवल एक राजनीतिक दौरे के रूप में नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों के साथ व्यवस्थित संवाद के रूप में संचालित करने की तैयारी की जा रही है।
देश के मुद्दों पर छात्रों की राय
इस कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प पक्ष यह हो सकता है कि छात्रों से केवल शिक्षा संबंधी सवालों पर बातचीत नहीं होगी। रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय मंत्री छात्रों से देश के विभिन्न मुद्दों पर उनके विचार भी जानेंगे। इससे युवाओं के नजरिए को समझने का एक नया मंच तैयार हो सकता है। बेरोजगारी, स्टार्टअप, कौशल विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा की गुणवत्ता, प्रतियोगी परीक्षाएं, मानसिक दबाव, पर्यावरण और देश की आर्थिक दिशा जैसे विषय विश्वविद्यालयों में युवाओं के बीच महत्वपूर्ण चर्चा के विषय हो सकते हैं।
लगभग 1,300 विश्वविद्यालयों तक पहुंचने की चुनौती
देश में विश्वविद्यालयों की संख्या को देखते हुए इस पहल का संभावित दायरा काफी बड़ा है। रिपोर्टों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के आंकड़ों के हवाले से देश में करीब 1,300 विश्वविद्यालय होने की बात कही गई है। इनमें 57 केंद्रीय विश्वविद्यालय और 522 राज्य विश्वविद्यालय शामिल हैं, जबकि अन्य विश्वविद्यालय डीम्ड और निजी श्रेणी में आते हैं। ऐसे में यदि कार्यक्रम को लंबे समय तक जारी रखा जाता है तो केंद्रीय मंत्रियों की विश्वविद्यालय यात्राओं के जरिए बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच बनाने की संभावना है।
क्या यह सिर्फ सरकारी योजनाओं का प्रचार होगा?
यह सवाल इस पूरी पहल की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा। अगर विश्वविद्यालयों में होने वाली बैठक केवल सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी देने तक सीमित रहती है तो इसका प्रभाव सीमित हो सकता है। लेकिन अगर छात्रों को खुलकर सवाल पूछने, अपनी समस्याएं रखने और सरकार की नीतियों पर असहमति व्यक्त करने का अवसर मिलता है तो यह पहल वास्तव में दोतरफा संवाद का माध्यम बन सकती है। सरकार के लिए भी यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि युवा केवल रोजगार या शिक्षा को लेकर ही चिंतित हैं या देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक बदलाव और तकनीकी परिवर्तन को लेकर भी उनकी अलग प्राथमिकताएं हैं।
NEET और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे अहम
छात्रों की मौजूदा चिंताओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को लेकर विवाद और विरोध प्रदर्शनों ने यह दिखाया है कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर सीधे युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे मुद्दों पर केंद्रीय मंत्रियों के साथ सीधा संवाद छात्रों को अपनी बात रखने का अवसर दे सकता है। हालांकि, इस संवाद की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि छात्रों की शिकायतों और सुझावों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण संस्थान हैं। यहां पढ़ने वाले युवा आने वाले वर्षों में प्रशासन, उद्योग, विज्ञान, तकनीक, राजनीति, मीडिया और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए सरकार और युवाओं के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने में युवाओं की अपेक्षाओं को समझने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी।
सरकार के लिए भी बनेगा फीडबैक सिस्टम
‘One Day, One University’ की सफलता का एक महत्वपूर्ण पैमाना यह होगा कि विश्वविद्यालयों से मिलने वाले फीडबैक का इस्तेमाल सरकार किस तरह करती है। अगर किसी विश्वविद्यालय में छात्रों ने रोजगार, परीक्षा व्यवस्था या कौशल प्रशिक्षण को लेकर कोई समस्या उठाई और उस पर संबंधित मंत्रालय बाद में कार्रवाई करता है, तो इस पहल का भरोसा काफी बढ़ सकता है। इसके उलट यदि बातचीत केवल कार्यक्रम तक सीमित रह जाती है और छात्रों की समस्याओं पर कोई ठोस फॉलोअप नहीं होता, तो इसे महज outreach exercise माना जा सकता है।
मोदी सरकार की युवा रणनीति का नया चरण?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से युवाओं के साथ सीधे संवाद पर जोर देते रहे हैं। ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री छात्रों के साथ परीक्षा, तनाव, समय प्रबंधन, करियर और जीवन से जुड़े विषयों पर बातचीत करते रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक सामग्री में ‘परीक्षा पे चर्चा’ के दौरान छात्रों के साथ इस तरह के प्रत्यक्ष संवाद का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध है।
‘One Day, One University’ उससे अलग एक व्यापक मॉडल हो सकता है, क्योंकि इसमें केवल प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि अलग-अलग केंद्रीय मंत्रियों को विश्वविद्यालयों तक पहुंचाने की योजना है। इसका उद्देश्य संवाद को राजधानी या बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग विश्वविद्यालयों और छात्र समुदायों तक ले जाना है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार सरकार इस कार्यक्रम को लेकर तैयारी कर रही है और इसकी रूपरेखा में केंद्रीय मंत्रियों तथा विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा। कार्यक्रम की वास्तविक शुरुआत, विश्वविद्यालयों की सूची, मंत्रियों का दौरा कार्यक्रम और संवाद का विस्तृत प्रारूप सामने आने के बाद इसकी तस्वीर और स्पष्ट होगी। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह पहल कितनी व्यापक होगी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि ‘One Day, One University’ के जरिए मोदी सरकार Gen Z और विश्वविद्यालयी युवाओं से सीधे संवाद का नया रास्ता तैयार करने की कोशिश कर रही है।






