स्पीच, म्यूजिक और AI पर शोध का साझा मंच
बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा (BIT Mesra) में Frontiers of Research in Speech and Music (FRSM 2026) का 30वां अंतरराष्ट्रीय सिम्पोजियम 21 और 22 अगस्त 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। “Intelligent and Inclusive Sound: Bridging Speech, Music and Human-Centred Technologies” विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में स्पीच, संगीत, एकॉस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कॉग्निटिव स्पीच एवं म्यूजिक प्रोसेसिंग, कम्प्यूटेशनल म्यूजिकोलॉजी और गणितीय मॉडलिंग जैसे क्षेत्रों से जुड़े शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन बीआईटी मेसरा के गणित विभाग ने सर सी. वी. रमन सेंटर फॉर फिजिक्स एंड म्यूजिक, जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता के सहयोग से किया।
1990 से शोध और नवाचार को बढ़ावा दे रहा FRSM
FRSM की शुरुआत वर्ष 1990 में हुई थी और पिछले तीन दशकों से अधिक समय में यह Speech and Music Research के क्षेत्र में अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसका उद्देश्य केवल स्पीच और संगीत को अलग-अलग विषयों के रूप में देखने के बजाय गणित, विज्ञान, तकनीक, मनोविज्ञान और कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों के साथ इनके संबंधों को समझना रहा है। समय के साथ FRSM ने अपने दायरे को और व्यापक किया है तथा आज इसमें Artificial Intelligence, Speech Technology, Music Technology और Computational Musicology जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र भी शामिल हो चुके हैं।
FRSM 2026 का आयोजन ऐसे समय में हुआ जब AI Technology और मानव-केंद्रित तकनीकों के विकास के कारण आवाज, संगीत और साउंड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है। स्मार्ट डिवाइस, वॉयस असिस्टेंट, स्पीच रिकग्निशन, इमोशन रिकग्निशन और AI आधारित संगीत निर्माण जैसी तकनीकों ने स्पीच और म्यूजिक रिसर्च को नई दिशा दी है। सिम्पोजियम में इन्हीं बदलावों के वैज्ञानिक, तकनीकी और मानवीय पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई।
उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने रखे विचार
FRSM 2026 के पहले दिन 21 अगस्त को उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और संस्थान गान के साथ हुई। सेंट जॉन्स यूनिवर्सिटी, अमेरिका की प्रोफेसर स्मिता गुहा ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाग लिया, जबकि आईआईटी बॉम्बे की प्रोफेसर प्रीति राव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर FRSM 2026 के अध्यक्ष प्रोफेसर पीयूष तिवारी ने प्रोफेसर स्मिता गुहा और प्रोफेसर प्रीति राव को सम्मानित किया। वहीं FRSM 2026 के संयोजक प्रोफेसर सौभिक चक्रवर्ती ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के डॉ. शंख सान्याल को सम्मानित किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रोफेसर सौभिक चक्रवर्ती ने FRSM की वर्ष 1990 से अब तक की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह यह मंच Speech and Music Research में विभिन्न विषयों को एक साथ लाकर अंतर्विषयक शोध के लिए अवसर उपलब्ध कराता रहा है। इसके बाद FRSM 2026 के अध्यक्ष प्रोफेसर पीयूष तिवारी, बीआईटी मेसरा के आरआईई के डीन प्रोफेसर राजू पोद्दार, आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर श्यामल कुमार दास और जादवपुर यूनिवर्सिटी के डॉ. शंख सान्याल ने भी अपने विचार साझा किए।
स्पीच और एकॉस्टिक्स पर मुख्य व्याख्यान
उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर प्रीति राव और प्रोफेसर स्मिता गुहा ने मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किए। उनके व्याख्यान में Speech Technology, Acoustics और Human-Centred Technologies में हो रहे समकालीन शोध और तकनीकी विकास पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने यह रेखांकित किया कि आवाज और संगीत से संबंधित तकनीकों का विकास केवल मशीनों की क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना भी है जो अलग-अलग सामाजिक और मानवीय जरूरतों को समझ सके।
इस अवसर पर FRSM 2026 की Abstract Booklet का भी आधिकारिक रूप से विमोचन किया गया। इसमें सिम्पोजियम में प्रस्तुत किए जा रहे शोध कार्यों और विभिन्न शोध विषयों से संबंधित जानकारी शामिल की गई। इससे प्रतिभागियों को अलग-अलग शोध क्षेत्रों और उनके संभावित तकनीकी उपयोगों को समझने का अवसर मिला।
40 शोध पत्रों में दिखी नई तकनीक
दो दिवसीय सिम्पोजियम के दौरान देश और विदेश से आए शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। FRSM 2026 के लिए कुल 40 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन शोध पत्रों में Phonetic Systems, Speech Therapy, Emotion Recognition, AI-based Music Synthesis, Acoustics और Human-Centred Technology जैसे विषयों से संबंधित शोध शामिल रहे।
सिम्पोजियम में प्रस्तुत शोध यह दर्शाते हैं कि आज Artificial Intelligence और Machine Learning का इस्तेमाल स्पीच और संगीत से जुड़े क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहा है। आवाज को पहचानने, भावनाओं को समझने, संगीत तैयार करने और अलग-अलग प्रकार के साउंड को प्रोसेस करने में AI आधारित तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में शोधकर्ताओं के लिए तकनीकी विकास के साथ-साथ इसके मानवीय उपयोग और सामाजिक प्रभावों को समझना भी जरूरी हो गया है।
तीन शोध पत्रों को मिला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार
FRSM 2026 में प्रस्तुत किए गए शोध कार्यों में से तीन सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। इस पहल का उद्देश्य शोधकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के लिए प्रोत्साहित करना और Speech, Music, AI and Sound Technology जैसे उभरते क्षेत्रों में नए विचारों को बढ़ावा देना रहा।
सिम्पोजियम में प्रोफेसर मार्कस पियर्स, क्यूएमयूएल, डॉ. आशुतोष कर, बर्मिंघम सिटी यूनिवर्सिटी, प्रोफेसर उमर फारूक, एएमयू, संज हॉल, टॉनिक सॉनिक, डॉ. एस. बी. सिंह, रिम्स और सुश्री गीताश्री मजुमदार, रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया। विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों की भागीदारी ने FRSM 2026 को एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय शोध मंच का स्वरूप दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखी संगीत की विविधता
FRSM 2026 के पहले दिन शाम को प्रतिभागियों और अतिथियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम ने शोध और अकादमिक चर्चाओं के बीच भारतीय कला, संगीत और संस्कृति का रंग जोड़ा। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत अरित साई मजुमदार के ‘रिदमिक योगा’ और जोयन मजुमदार की लाइव पेंटिंग से हुई। इन प्रस्तुतियों ने शरीर की लय, संगीत और दृश्य कला के बीच संबंध को बेहद खूबसूरती से सामने रखा।
इसके बाद पूर्णिमा चक्रवर्ती ने सरस्वती वंदना और काफी जुगलबंदी प्रस्तुत की। अपूर्वा चक्रवर्ती ने राग काफी जुगलबंदी के साथ ‘नैना मोरे तरस’, ‘फूल गेंदुवा’ और ‘सलोना सा सजन’ जैसी शास्त्रीय एवं उप-शास्त्रीय रचनाओं की प्रस्तुति दी। तबले पर प्रज्वल, गिटार पर सचिन और कीबोर्ड पर आकाश ने शानदार संगत की। पूरे सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन डॉ. मृणाल कुमार पाठक ने किया।
भारतीय शास्त्रीय कला ने मोहा दर्शकों का मन
सांस्कृतिक संध्या में सुतपा मुखर्जी ने ‘चंडालिका नृत्य’ और देबोस्मिता कर ने ‘काफी पल्लवी’ प्रस्तुत की। इन नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत किया गया। पार्थ बोस द्वारा प्रस्तुत नाटक ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और कार्यक्रम में नाट्य कला का प्रभावशाली रंग जोड़ा।
संगीत कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए आंचल सिंह ने कई सदाबहार गीतों की प्रस्तुति दी। ‘बैयां न धरो’, ‘हम तेरे प्यार में सारा’, ‘रहे न रहे हम’, ‘जैसे मैं हूं पास तेरे’ और ‘मोह मोह के धागे’ जैसे गीतों ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ा। वहीं प्रियांशु प्रकाश के बॉलीवुड मैशअप ने छात्रों और दर्शकों में खासा उत्साह पैदा किया। इस तरह सांस्कृतिक संध्या ने FRSM 2026 के पहले दिन को संगीत और कला से यादगार बना दिया।
मानव-केंद्रित तकनीक पर रहा जोर
FRSM 2026 का सबसे महत्वपूर्ण पहलू Human-Centred Technology रहा। आज जब AI और डिजिटल तकनीक तेजी से हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही हैं, ऐसे में तकनीक को केवल अधिक शक्तिशाली बनाने के बजाय उसे अधिक उपयोगी, समावेशी और मानवीय बनाना भी महत्वपूर्ण है। स्पीच और म्यूजिक जैसी मानवीय अभिव्यक्तियों से जुड़ी तकनीकों में यह चुनौती और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
सिम्पोजियम में हुई चर्चाओं ने यह अवसर दिया कि शोधकर्ता इस बात पर विचार कर सकें कि आने वाले समय में AI, Speech Recognition, Music Synthesis और Sound Processing जैसी तकनीकों को किस तरह विकसित किया जाए, ताकि उनका इस्तेमाल समाज के व्यापक वर्ग के लिए किया जा सके। यही कारण है कि Intelligent and Inclusive Sound जैसा विषय FRSM 2026 की अकादमिक चर्चा के केंद्र में रहा।
BIT Mesra में शोध का मजबूत मंच
FRSM 2026 के आयोजन ने बीआईटी मेसरा में अनुसंधान, नवाचार और अंतर्विषयक सहयोग की दिशा में संस्थान की भूमिका को भी सामने रखा। देश-विदेश के शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर इस सिम्पोजियम ने नए विचारों के आदान-प्रदान और भविष्य के शोध सहयोग के लिए अवसर उपलब्ध कराया।
दो दिनों तक चले इस आयोजन का व्यापक उद्देश्य Speech, Music और Intelligent Sound Technology के उभरते क्षेत्रों में अकादमिक संवाद को मजबूत करना था। शोधकर्ताओं को अपने काम प्रस्तुत करने, विशेषज्ञों से विचार साझा करने और संभावित सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिला। FRSM 2026 ने यह संदेश भी दिया कि आने वाले समय में स्पीच, संगीत, AI और मानव-केंद्रित तकनीक के बीच संबंध और अधिक महत्वपूर्ण होने वाला है।






