किसी दूसरे देश में पढ़ाई के लिए जाना सिर्फ कॉलेज, भाषा और संस्कृति बदलना नहीं होता। सबसे बड़ा बदलाव कई बार रसोई और खाने की मेज पर दिखाई देता है। सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन, रात का खाना, बाजार में उपलब्ध चीजें और दोस्तों के साथ बाहर खाना—ये सभी धीरे-धीरे किसी व्यक्ति की food habits बदल सकते हैं। पुणे में अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर हुई एक नई भारतीय रिसर्च ने इसी बदलाव को वैज्ञानिक तरीके से समझने की कोशिश की है। Frontiers in Nutrition में 7 अगस्त 2026 को प्रकाशित इस अध्ययन में 320 international students की eating habits और nutrient intake का विश्लेषण किया गया। “Food Culture India”
पुणे क्यों बना इस रिसर्च का केंद्र
पुणे लंबे समय से भारत के प्रमुख education hubs में शामिल है और यहां अलग-अलग देशों से आने वाले विद्यार्थी पढ़ते हैं। शोधकर्ताओं ने तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अध्ययन में शामिल किया। प्रतिभागियों की औसत उम्र 22.5 वर्ष थी और अध्ययन में पुरुषों तथा महिलाओं दोनों को शामिल किया गया। लगभग 64 प्रतिशत छात्र पुणे में सात से 12 महीने से रह रहे थे। प्रतिभागियों में अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई क्षेत्रों से आने वाले छात्रों की संख्या प्रमुख थी। “Food Culture India”
घर से दूर होने पर सबसे पहले क्या बदला
रिसर्च का सबसे दिलचस्प हिस्सा खाने की दिनचर्या में बदलाव है। भारत आने के बाद 78.7 प्रतिशत छात्रों ने meal skipping बढ़ने की जानकारी दी। लगभग आधे छात्रों ने convenience foods के सेवन और बाहर खाने में वृद्धि बताई। 54 प्रतिशत छात्रों ने meals की जगह snacks लेने की बात कही, जबकि 40 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उनकी meal frequency घटकर दिन में दो बार रह गई।
यह बदलाव केवल स्वाद की पसंद का मामला नहीं है। नई जगह पर पढ़ाई का दबाव, समय की कमी, भोजन की उपलब्धता, बजट, स्थानीय बाजार की जानकारी और अपनी पसंद का खाना आसानी से न मिलना, सभी मिलकर खाने की दिनचर्या को प्रभावित कर सकते हैं। “Food Culture India”
बदलाव सिर्फ खाने के समय में नहीं आया
शोधकर्ताओं ने पाया कि भारत आने के बाद भोजन की quality और variety में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए। कई छात्रों के भोजन में protein-rich foods, pulses and legumes, nuts and oilseeds, green leafy vegetables और fruits की खपत कम हुई। Animal-source foods जैसे meat, fish, seafood, eggs और poultry की frequency में भी कमी दर्ज की गई।
यानी एक तरफ भोजन अधिक सुविधाजनक हो सकता है, लेकिन दूसरी तरफ diet में विविधता और nutrient density कम होने का जोखिम भी पैदा हो सकता है। “Food Culture India”
वजन थोड़ा बढ़ा, BMI में भी बदलाव आया
अध्ययन में छात्रों का औसत pre-migration weight 65.2 किलोग्राम था, जो migration के बाद 67.0 किलोग्राम दर्ज किया गया। इसी तरह औसत BMI 22.58 से बढ़कर 23.18 kg/m² हुआ। यह औसत बदलाव है और इसका अर्थ यह नहीं कि हर छात्र का वजन बढ़ा। फिर भी यह finding बताती है कि नए food environment में शरीर और dietary pattern दोनों में बदलाव हो सकते हैं। “Food Culture India”
प्रोटीन और micronutrients में गिरावट क्यों चिंता की बात है
रिसर्च में protein के साथ iron, calcium, vitamin B12 और zinc intake में भी कमी देखी गई। ये nutrients शरीर में अलग-अलग महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। Protein muscles और tissues के लिए जरूरी है, iron oxygen transport से जुड़ा है, calcium bones और कई physiological functions में महत्वपूर्ण है, vitamin B12 nervous system और blood-cell formation में भूमिका निभाता है और zinc immune तथा cellular functions में योगदान देता है।
हालांकि यह अध्ययन clinical deficiency diagnosis नहीं था। इसलिए इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि अध्ययन में शामिल छात्रों में इन सभी nutrients की deficiency विकसित हो गई थी। Research ने dietary intake में कमी दर्ज की है, clinical deficiency नहीं। “Food Culture India”
भारत का खाना उपलब्ध था, फिर भी पोषण क्यों घटा
यह सवाल इस रिसर्च को और दिलचस्प बनाता है। भारत में दाल, चना, राजमा, सब्जियां, फल, दूध, दही, अंडे और कई तरह के स्थानीय खाद्य पदार्थ आसानी से मिल सकते हैं। फिर भी किसी विदेशी छात्र के लिए इनका नियमित सेवन आसान नहीं हो सकता।
खाना उपलब्ध होना और उस भोजन तक नियमित, affordable और culturally acceptable पहुंच होना दो अलग बातें हैं। यही वजह है कि researchers ने food availability, affordability, accessibility, food environment और sociocultural factors को dietary acculturation से जुड़े महत्वपूर्ण तत्वों के रूप में दर्ज किया। “Food Culture India”
भाषा भी थाली बदल सकती है
रिसर्च में Hindi-speaking ability for food purchases को भी eating behaviours से जुड़े factors में पाया गया। यह observation बेहद दिलचस्प है। किसी स्थानीय बाजार में जाकर सब्जी, दाल, मसाले या किसी खास food item के बारे में पूछना उस व्यक्ति के लिए आसान हो सकता है जो स्थानीय भाषा समझता हो।
इसके विपरीत भाषा की परेशानी व्यक्ति को packaged food, familiar fast-food options या ऐसे restaurants की ओर धकेल सकती है जहां menu समझना आसान हो। यानी language केवल communication का माध्यम नहीं, बल्कि food choice को प्रभावित करने वाला factor भी बन सकती है। “Food Culture India”
घर का खाना सिर्फ स्वाद नहीं, nutritional security भी है
कई लोगों के लिए “घर का खाना” भावनात्मक comfort का स्रोत होता है। लेकिन इस research से यह भी समझ आता है कि घर से दूर रहने वाले युवा के लिए familiar और balanced meal उपलब्ध होना nutritional security से जुड़ा विषय हो सकता है।
अगर छात्र लगातार बाहर का खाना खाता है, meals skip करता है और snacks से भूख मिटाता है, तो कुल dietary pattern में protein, fruits, vegetables और micronutrients की कमी आ सकती है। इसलिए international students के लिए food support केवल hospitality का मुद्दा नहीं, health support का भी हिस्सा हो सकता है। “Food Culture India”
क्या भारतीय भोजन अपनाना हमेशा स्वस्थ बदलाव होगा
जरूरी नहीं। किसी दूसरे देश की cuisine अपनाना अपने आप healthy या unhealthy नहीं होता। उदाहरण के लिए भारतीय भोजन में दाल, सब्जियां, फल, whole grains और fermented foods जैसे कई nutrient-rich विकल्प हैं, लेकिन भारतीय food environment में fried foods, sugary drinks, refined carbohydrates और high-calorie restaurant foods भी उपलब्ध हैं।
इसलिए healthy food acculturation का अर्थ केवल “भारतीय खाना खाना” नहीं, बल्कि स्थानीय cuisine के पौष्टिक विकल्पों को समझकर balanced diet बनाना है। “Food Culture India”
Food culture में adaptation स्वाभाविक है
जब कोई व्यक्ति नए देश में जाता है तो उसकी food identity पूरी तरह खत्म नहीं होती। वह अक्सर अपने देश के भोजन को स्थानीय खाद्य पदार्थों के साथ मिलाने की कोशिश करता है। कभी ingredients बदलते हैं, कभी cooking methods और कभी meal timings।
इस प्रक्रिया को food acculturation कहा जाता है। यह केवल nutrition का विषय नहीं बल्कि संस्कृति, पहचान, affordability और social interaction से भी जुड़ा है। पुणे की यह study भारत में international students के संदर्भ में इसी प्रक्रिया को समझने वाली शुरुआती research में महत्वपूर्ण योगदान देती है। “Food Culture India”
दोस्तों के साथ खाना भी diet को बदल सकता है
नई जगह पर दोस्त बनाना international students के लिए महत्वपूर्ण होता है और food social bonding का बड़ा माध्यम है। साथ में restaurant जाना, snacks खाना या weekend पर बाहर भोजन करना social experience बन सकता है।
लेकिन अगर social eating लगातार convenience foods और restaurant meals पर आधारित हो जाए, तो dietary quality प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, दोस्तों के साथ मिलकर healthy cooking या स्थानीय nutritious food explore करना सकारात्मक adaptation भी बन सकता है।
रिसर्च का सबसे बड़ा संदेश विश्वविद्यालयों के लिए है
अगर विश्वविद्यालय international students को केवल accommodation और academic support देते हैं, तो तस्वीर अधूरी रह सकती है। Nutrition education, affordable healthy food options, culturally diverse menus और basic cooking guidance भी student wellbeing का हिस्सा बन सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने भी स्थानीय nutritious foods को अपनाने में मदद करने वाले nutrition interventions की जरूरत पर जोर दिया है। “Food Culture India”
भारतीय थाली बन सकती है समाधान का हिस्सा
इस अध्ययन का एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि भारत में रहने वाले international students के लिए nutritious options स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। दाल, चना, राजमा, seasonal vegetables, fruits, curd, nuts, seeds और millets जैसे खाद्य पदार्थों को उनके भोजन में शामिल करने के तरीके समझाए जा सकते हैं।
इसमें किसी छात्र को उसकी अपनी food culture छोड़ने की जरूरत नहीं है। बेहतर रास्ता यह हो सकता है कि उसकी पसंद और स्थानीय nutritious foods के बीच एक संतुलित पुल बनाया जाए। “Food Culture India”
लेकिन इस रिसर्च की सीमाएं भी हैं
यह study retrospective pre-post design पर आधारित थी। यानी छात्रों से migration से पहले और बाद के dietary behaviours के बारे में जानकारी ली गई। ऐसे studies में memory और recall bias की संभावना रहती है। प्रतिभागियों का चयन purposive sampling से हुआ और study केवल पुणे में हुई, इसलिए परिणामों को भारत में मौजूद हर international student पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा यह study dietary intake और behavior में बदलाव दिखाती है, लेकिन लंबे समय में इन बदलावों से होने वाले clinical health outcomes को साबित नहीं करती। “Food Culture India”
फिर भी यह रिसर्च क्यों महत्वपूर्ण है
भारत में international education तेजी से बदल रहा है और देश में अलग-अलग संस्कृतियों से आने वाले छात्रों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में food environment भी international student experience का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।
एक विदेशी छात्र के लिए भारत का खाना केवल नई cuisine नहीं है। वह affordability, language, convenience, social life और health के बीच संतुलन खोजने की कोशिश भी है। “Food Culture India”
निष्कर्ष: किसी देश में बसना, उसकी थाली को भी बदल देता है
पुणे में 320 international students पर हुई यह 2026 की research एक साधारण दिखने वाली बात के पीछे छिपी बड़ी कहानी सामने लाती है। भारत आने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने meals skip किए, snacks और convenience foods का सेवन बढ़ाया और कई protein-rich foods, fruits, vegetables तथा micronutrient sources की खपत कम हुई। साथ ही औसत weight और BMI में भी modest increase दर्ज हुआ।
लेकिन इस कहानी का निष्कर्ष यह नहीं है कि भारतीय खाना विदेशी छात्रों के लिए खराब है। असली संदेश इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि किसी देश में कौन-सा खाना मिलता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति उस खाने तक कितनी आसानी से पहुंच सकता है, उसे समझता कितना है, वह कितना afford कर सकता है और उसकी अपनी संस्कृति तथा दिनचर्या के साथ वह भोजन कितना फिट बैठता है।
शायद इसी वजह से किसी विश्वविद्यालय की अच्छी कैंटीन केवल पेट भरने की जगह नहीं होनी चाहिए।
वह ऐसी जगह हो सकती है जहां अलग-अलग देशों से आए युवा एक-दूसरे की संस्कृति का स्वाद भी चखें और अनजाने में अपनी सेहत की नई भाषा भी सीखें। “Food Culture India”
शोध स्रोत: Frontiers in Nutrition में प्रकाशित मूल शोध, 7 अगस्त 2026





