झारखंड में रक्षाबंधन के पूर्व घोषित अवकाश को रद्द किए जाने के फैसले को लेकर शिक्षकों के संगठन ने आपत्ति जताई है। झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के हित को देखते हुए राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से 28 अगस्त 2026 के रक्षाबंधन अवकाश को यथावत रखने की मांग की है। मोर्चा का कहना है कि रक्षाबंधन झारखंड समेत पूरे देश का महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पर्व है और इस दिन विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित करने का निर्णय व्यवहारिक रूप से उचित नहीं है।
मोर्चा ने इसके साथ ही सुझाव दिया है कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर पूर्व घोषित अवकाश को बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन 29 अगस्त से शुरू किया जाए। संगठन का मानना है कि इससे एक तरफ रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व की सामाजिक और पारिवारिक परंपरा प्रभावित नहीं होगी, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय खेल दिवस के आयोजन को भी अधिक व्यवस्थित और सार्थक तरीके से कराया जा सकेगा।
विभाग के आदेश पर पुनर्विचार की मांग
झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा की एक आपात बैठक रांची के धुर्वा स्थित भारतीय मजदूर संघ के कार्यालय में प्रदेश संयोजक अमीन अहमद की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में राज्य में स्कूलों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के बाद रक्षाबंधन अवकाश को रद्द करने के विभागीय आदेश को लेकर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर विभाग से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की गई।
मोर्चा के अनुसार स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार के सचिव के पत्रांक 3359, दिनांक 21 अगस्त 2026 के माध्यम से 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के लिए पहले से घोषित अवकाश को निरस्त कर उसी दिन विद्यालयों में खेल दिवस मनाने का आदेश दिया गया है। शिक्षक मोर्चा का कहना है कि पर्व के दिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर व्यावहारिक स्थिति को ध्यान में रखे बिना ऐसा निर्णय लिया गया है, जिसका असर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों पर पड़ सकता है।
ग्रामीण छात्राओं के लिए रक्षाबंधन का विशेष महत्व
शिक्षक मोर्चा ने रक्षाबंधन के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को भी अपने विरोध का प्रमुख आधार बनाया है। संगठन का कहना है कि झारखंड के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रक्षाबंधन केवल एक दिन का त्योहार नहीं है, बल्कि परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का महत्वपूर्ण अवसर है। विशेष रूप से कई छात्राएं इस दिन अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए अपने घर या दूसरे स्थानों पर जाती हैं।
मोर्चा का तर्क है कि यदि 28 अगस्त को विद्यालय खुले रहते हैं तो ग्रामीण क्षेत्रों की अनेक छात्राओं के लिए स्कूल जाना और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन मनाना दोनों काम एक साथ करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में छात्राओं और उनके परिवारों के सामने अनावश्यक परेशानी उत्पन्न होने की संभावना है। संगठन का कहना है कि पर्व के महत्व को देखते हुए पहले से घोषित अवकाश को रद्द करने के बजाय विभाग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की असुविधा न हो।
स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति पर भी उठाया सवाल
संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने यह भी कहा कि रक्षाबंधन के दिन विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में कम रहने की संभावना है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में त्योहार के कारण कई परिवारों के कार्यक्रम पहले से तय रहते हैं। ऐसी स्थिति में स्कूल खोलने के बावजूद यदि बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित नहीं होते हैं तो खेल दिवस का आयोजन भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाएगा।
मोर्चा का मानना है कि किसी भी विद्यालयी कार्यक्रम की सफलता के लिए विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। यदि पर्व के कारण बच्चों की उपस्थिति कम रहती है तो खेल गतिविधियों का आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह सकता है। इसलिए संगठन ने विभाग को तारीख में बदलाव का सुझाव दिया है, ताकि राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन ऐसे समय किया जाए जब विद्यार्थी पूरी संख्या में विद्यालय पहुंच सकें और कार्यक्रमों में उत्साह के साथ भाग ले सकें।
29 अगस्त से खेल दिवस मनाने का सुझाव
शिक्षक मोर्चा ने खेल दिवस के आयोजन को लेकर एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी विभाग के सामने रखा है। संगठन का कहना है कि हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई जाती है। ऐसे में खेल दिवस के आयोजन की शुरुआत भी 29 अगस्त से करना अधिक उपयुक्त होगा।
मोर्चा का कहना है कि 28 अगस्त को रक्षाबंधन का अवकाश रहने दिया जाए और उसके बाद 29 अगस्त से विद्यालयों में राष्ट्रीय खेल दिवस के कार्यक्रम शुरू किए जाएं। इससे दोनों महत्वपूर्ण अवसरों को अलग-अलग दिन उचित महत्व दिया जा सकेगा। विद्यार्थियों को भी खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए पर्याप्त अवसर मिलेगा और रक्षाबंधन के पारिवारिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में भी उनकी भागीदारी बनी रहेगी।
तीन दिन तक खेल दिवस समारोह का प्रस्ताव
संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने केवल एक दिन खेल दिवस मनाने के बजाय इसे तीन दिनों तक आयोजित करने का सुझाव दिया है। संगठन के अनुसार 29, 30 और 31 अगस्त 2026 को विद्यालयों में विभिन्न खेल गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं। इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग खेलों में भाग लेने का अवसर मिलेगा और स्कूलों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का उद्देश्य भी बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
तीन दिवसीय आयोजन के दौरान विद्यालय स्तर पर दौड़, कबड्डी, खो-खो, फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट तथा अन्य स्थानीय और पारंपरिक खेलों को शामिल किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना के साथ टीम भावना, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में भी मदद मिलेगी। शिक्षक मोर्चा का मानना है कि राष्ट्रीय खेल दिवस को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे विद्यार्थियों के लिए वास्तविक खेल उत्सव के रूप में आयोजित करना अधिक उपयोगी होगा।
राष्ट्रीय खेल दिवस का उद्देश्य भी पूरा होगा
राष्ट्रीय खेल दिवस भारत में खेलों और खेल प्रतिभाओं को सम्मान देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। 29 अगस्त को हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर यह दिवस मनाया जाता है। विद्यालयों में राष्ट्रीय खेल दिवस के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करना और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को समझाना भी है।
मोर्चा का मानना है कि यदि खेल दिवस को 29 अगस्त से शुरू कराकर लगातार तीन दिनों तक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो विद्यार्थियों को इसका अधिक लाभ मिलेगा। इससे विद्यालयों में खेलों को लेकर वातावरण तैयार किया जा सकता है और पढ़ाई के साथ खेलों को भी विद्यार्थियों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपा मांग पत्र
रक्षाबंधन अवकाश को यथावत रखने की मांग को लेकर संयुक्त शिक्षक मोर्चा की ओर से संबंधित अधिकारियों और सरकार के समक्ष मांग रखी गई है। मोर्चा ने सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के साथ-साथ मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, झारखंड सरकार को भी मांग पत्र सौंपा है।
मांग पत्र के माध्यम से संगठन ने विभागीय आदेश पर पुनर्विचार करने और 28 अगस्त 2026 के रक्षाबंधन अवकाश को बहाल रखने का आग्रह किया है। मोर्चा का कहना है कि यदि सरकार और विभाग विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों के हित को ध्यान में रखते हुए तारीख में बदलाव करते हैं तो इससे किसी पक्ष को नुकसान नहीं होगा। इसके विपरीत राष्ट्रीय खेल दिवस का आयोजन भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
छात्र हित को बताया सबसे बड़ा आधार
संयुक्त शिक्षक मोर्चा ने अपने पूरे प्रस्ताव को छात्र हित से जोड़ते हुए कहा है कि किसी भी शैक्षणिक निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण आधार विद्यार्थियों की सुविधा और उनके समग्र हित को होना चाहिए। संगठन के अनुसार स्कूलों में अवकाश, शैक्षणिक गतिविधियों और विशेष कार्यक्रमों की तारीख तय करते समय स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
रक्षाबंधन जैसे पर्व पर विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों के बीच आवागमन बढ़ जाता है। ऐसे में विद्यालयी कार्यक्रम और पारिवारिक आयोजन एक ही दिन होने से विद्यार्थियों के सामने दुविधा पैदा हो सकती है। मोर्चा का मानना है कि तारीख को एक दिन आगे करने से समस्या का सरल समाधान संभव है।
शिक्षकों और अभिभावकों में असंतोष का दावा
मोर्चा ने कहा है कि रक्षाबंधन अवकाश रद्द करने के आदेश से शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच असंतोष है। संगठन का कहना है कि पहले से घोषित अवकाश को अचानक निरस्त किए जाने से परिवारों की बनाई गई योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। खासकर ऐसे परिवार जिनमें बच्चे रक्षाबंधन के अवसर पर दूसरे शहर या गांव जाते हैं, उनके लिए विद्यालय खुला रहने का निर्णय परेशानी पैदा कर सकता है।
शिक्षक मोर्चा का कहना है कि सरकार यदि आदेश पर पुनर्विचार करती है तो इससे अनावश्यक विवाद और असंतोष को भी समाप्त किया जा सकता है। साथ ही राष्ट्रीय खेल दिवस को भी 29 अगस्त से शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
शिक्षकों की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव
बैठक में मौजूद सदस्यों ने रक्षाबंधन अवकाश को बहाल करने के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति व्यक्त की। प्रदेश संयोजक अमीन अहमद की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश संयोजक विजय बहादुर सिंह, रांची जिला पदाधिकारी पंकज कुमार, राकेश श्रीवास्तव, राज्य पदाधिकारी अजय कुमार सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में सदस्यों ने कहा कि शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यालय और समाज के बीच महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं। इसलिए विद्यार्थियों और अभिभावकों की व्यावहारिक समस्याओं को विभाग तक पहुंचाना भी शिक्षक संगठनों की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से मोर्चा ने विभाग और सरकार के सामने अपना प्रस्ताव रखा है।
सरकार के सामने अब तारीख बदलने का विकल्प
पूरे विवाद का समाधान बहुत सरल तरीके से किया जा सकता है। 28 अगस्त को रक्षाबंधन के लिए घोषित अवकाश को यथावत रखा जाए और 29 अगस्त से राष्ट्रीय खेल दिवस के कार्यक्रम शुरू किए जाएं। यदि विभाग चाहे तो 29, 30 और 31 अगस्त को तीन दिवसीय खेल समारोह आयोजित कर सकता है। इससे रक्षाबंधन और राष्ट्रीय खेल दिवस दोनों को अपना-अपना महत्व मिल जाएगा।
अब देखना यह होगा कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग शिक्षक मोर्चा की इस मांग पर क्या निर्णय लेता है। चूंकि मामला सीधे विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों से जुड़ा है, इसलिए विभाग के सामने छात्र हित, सांस्कृतिक परंपरा और खेल गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
रक्षाबंधन की छुट्टी और खेल दिवस के बीच संतुलन संभव
झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा की मांग का मूल संदेश यही है कि रक्षाबंधन और राष्ट्रीय खेल दिवस में से किसी एक को चुनने की आवश्यकता नहीं है। दोनों अवसरों को अलग-अलग दिन मनाकर विद्यार्थियों को दोनों का लाभ दिया जा सकता है। 28 अगस्त को रक्षाबंधन का अवकाश और 29 से 31 अगस्त तक खेल दिवस समारोह आयोजित करना इस दिशा में एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।
अब गेंद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पाले में है। यदि विभाग शिक्षक मोर्चा के सुझाव पर पुनर्विचार करता है तो रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व की सामाजिक भावना भी बनी रहेगी और राष्ट्रीय खेल दिवस का उद्देश्य भी बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि इस निर्णय के केंद्र में विद्यार्थी रहें, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हर फैसले का अंतिम उद्देश्य बच्चों के हित और उनके बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करना ही होना चाहिए।






