बिहार के मुंगेर में एक ऐसा बरगद मौजूद है, जिसने सदियों के बदलाव अपनी आंखों के सामने देखे हैं। राजा बदले, शासन बदले, साम्राज्य बने और खत्म हुए, शहर का स्वरूप बदला और आधुनिक दौर ने दस्तक दी, लेकिन यह विशाल बरगद आज भी अपनी जड़ों और शाखाओं के साथ खड़ा है। लंबे समय से इस पेड़ को लेकर स्थानीय स्तर पर इसकी प्राचीनता की चर्चा होती रही थी, लेकिन अब वैज्ञानिक शोध ने इसकी उम्र को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा है। वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक मुंगेर का यह बरगद कम से कम करीब 700 साल पुराना है और इसे दुनिया का सबसे पुराना वैज्ञानिक रूप से सटीक उम्र निर्धारित किया गया Ficus benghalensis बताया गया है। “700 Year Old Banyan Tree”
ITC परिसर में मौजूद है सदियों पुराना बरगद
मुंगेर का यह विशाल बरगद Indian Tobacco Company यानी ITC के परिसर में मौजूद है। खास बात यह है कि जिस परिसर में आज यह बरगद खड़ा है, उससे जुड़ा संस्थागत इतिहास करीब 1901 से माना जाता है। वैज्ञानिक शोध में भी इस स्थान का उल्लेख Indian Tobacco Company के 1901 में स्थापित परिसर के रूप में किया गया है। इसका मतलब यह है कि बरगद की वैज्ञानिक रूप से निर्धारित न्यूनतम उम्र परिसर के आधुनिक इतिहास से कई सदियां पुरानी है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह पेड़ उस क्षेत्र के पुराने प्राकृतिक परिदृश्य का जीवित अवशेष भी हो सकता है। Year Old Banyan Tree”
न राजा रहे, न साम्राज्य, बरगद बना रहा गवाह
इस बरगद की कहानी केवल इसकी उम्र तक सीमित नहीं है। करीब सात सौ वर्षों का समय मानव इतिहास में बेहद लंबा कालखंड होता है। इस दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में राजनीतिक सत्ता, सामाजिक व्यवस्था और शहरों का स्वरूप कई बार बदला। मुंगेर भी इन ऐतिहासिक परिवर्तनों से अछूता नहीं रहा। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह बरगद लंबे समय से लोगों के जुटने का स्थान रहा है। प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययन में भी स्थानीय परंपरा का उल्लेख है कि यह पेड़ शासकों और आम लोगों दोनों के लिए एकत्र होने का स्थान रहा होगा।
आज जब इसकी विशाल छतरी, नीचे उतरती जटाओं और अनेक सहायक तनों को देखा जाता है, तो इसकी संरचना ही इसके लंबे जीवन की कहानी कहती नजर आती है। बरगद की यही विशेषता उसे दूसरे पेड़ों से अलग बनाती है। इसकी शाखाओं से निकलने वाली जड़ें जमीन तक पहुंचकर नए सहायक तनों का रूप ले सकती हैं और धीरे-धीरे एक अकेला पेड़ एक छोटे जंगल जैसी संरचना बना सकता है। Year Old Banyan Tree”
बरगद की उम्र पता करना वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था
किसी पेड़ की उम्र पता करने की बात आती है तो आमतौर पर पेड़ के तने में बनने वाले वार्षिक छल्लों की गिनती का तरीका याद आता है। लेकिन बरगद जैसे उष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों में यह तरीका हमेशा प्रभावी नहीं होता। ऐसे पेड़ों में स्पष्ट वार्षिक वृद्धि-वलय नहीं मिलते, जबकि बरगद की जटिल संरचना में कई तने और शाखाएं भी विकसित हो सकती हैं। यही वजह है कि पुराने बरगदों की उम्र लंबे समय तक स्थानीय इतिहास, लोककथाओं या उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अनुमानित की जाती रही।
मुंगेर के इस बरगद के मामले में भी वैज्ञानिकों के सामने यही चुनौती थी। अगर केवल बाहरी आकार, तनों की संख्या या स्थानीय मान्यता के आधार पर उम्र निर्धारित की जाती, तो वह वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त प्रमाण नहीं माना जाता। इसलिए शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे पेड़ की पुरानी लकड़ी में मौजूद कार्बन के आधार पर उसकी उम्र का वैज्ञानिक आकलन किया जा सके। Year Old Banyan Tree”
रेडियोकार्बन डेटिंग से खुला 700 साल पुराना राज
इस शोध में रेडियोकार्बन डेटिंग का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने बरगद के एक खुले हुए द्वितीयक तने और एक प्राचीन मुख्य शाखा से लकड़ी के नमूने लिए। इसके बाद नमूनों के भीतर से अल्फा-सेल्यूलोज निकाला गया। यह पौधों की कोशिका भित्ति का अपेक्षाकृत स्थिर प्रमुख घटक है और रेडियोकार्बन विश्लेषण के लिए उपयोगी माना जाता है। इसके बाद नमूनों की जांच Accelerator Mass Spectrometry यानी AMS तकनीक से की गई।
वैज्ञानिकों को द्वितीयक तने के पिथ से लिए गए नमूने में 276 ± 36 वर्ष BP और प्राचीन मुख्य शाखा के पिथ से लिए गए नमूने में 652 ± 37 वर्ष BP की रेडियोकार्बन उम्र मिली। इसके बाद आधुनिक कैलिब्रेशन तकनीक और IntCal20 calibration curve तथा OxCal software का इस्तेमाल किया गया। इन परिणामों के आधार पर पेड़ की न्यूनतम उम्र करीब 700 वर्ष निर्धारित की गई। Year Old Banyan Tree”
700 साल की उम्र का मतलब क्या है?
यहां एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक बात समझना जरूरी है। शोध यह नहीं कहता कि पेड़ की उम्र बिल्कुल 700 वर्ष ही है। वैज्ञानिक निष्कर्ष इसे करीब 700 वर्ष की न्यूनतम उम्र के रूप में स्थापित करता है। यानी जिन पुराने हिस्सों के नमूनों की जांच की गई, वे कम से कम इतनी पुरानी जैविक सामग्री का प्रमाण देते हैं। इसलिए पत्रकारिता की भाषा में इसे “700 साल पुराना बरगद” कहा जा सकता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से अधिक सटीक शब्द “कम से कम करीब 700 साल पुराना” है। Year Old Banyan Tree”
मुंगेर के इतिहास की एक पुरानी धारणा भी बदली
वैज्ञानिक अध्ययन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसने बरगद को लेकर पहले की एक धारणा को चुनौती दी है। पहले यह अनुमान लगाया जाता रहा था कि बरगद को ऐतिहासिक ‘बड़ा बंगला’ के आसपास लगाया गया होगा। वैज्ञानिक एवं ऐतिहासिक विश्लेषण के मुताबिक उस भवन की उम्र लगभग 300 से 350 वर्ष के आसपास मानी जाती है, जबकि बरगद की न्यूनतम उम्र करीब 700 वर्ष सामने आई है। इसका अर्थ यह हुआ कि पेड़ उस भवन से कई सदियां पुराना है।
शोधकर्ताओं के अनुसार इस तथ्य से यह संभावना मजबूत होती है कि बरगद उस क्षेत्र में मौजूद किसी पुराने प्राकृतिक वन का हिस्सा रहा होगा और बाद में विकसित हुए भवन तथा आसपास की मानव बस्ती का साक्षी बना। इस तरह वैज्ञानिक अध्ययन ने केवल पेड़ की उम्र नहीं बताई, बल्कि मुंगेर के स्थानीय ऐतिहासिक परिदृश्य को समझने का एक नया आधार भी दिया है। Year Old Banyan Tree”
वैज्ञानिकों ने विकसित किया उम्र पता करने का नया तरीका
इस अध्ययन का महत्व सिर्फ मुंगेर के बरगद तक सीमित नहीं है। बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज, लखनऊ की डॉ. त्रिना बोस के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने इस पेड़ की उम्र निर्धारित करने के लिए ऐसी पद्धति अपनाई जिसमें पिथ यानी लकड़ी के सबसे अंदरूनी हिस्से से नमूना लेने पर विशेष ध्यान दिया गया। शोध में डॉ. मायंक शेखर और डॉ. अखिलेश के. यादव सहित अन्य शोधकर्ताओं ने भी योगदान दिया।
पिथ पेड़ के विकास के शुरुआती चरण में बनने वाली लकड़ी से संबंधित होता है। बरगद जैसे पेड़ों में स्पष्ट वार्षिक वृद्धि-वलय नहीं होने के कारण पिथ के पास से सही नमूना लेना और उसके बाद रेडियोकार्बन विश्लेषण करना इस अध्ययन की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक विशेषताओं में शामिल था। यही पद्धति भविष्य में दक्षिण एशिया और दुनिया के दूसरे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मौजूद प्राचीन पेड़ों की उम्र समझने में उपयोगी हो सकती है। Year Old Banyan Tree”
दुनिया का सबसे पुराना वैज्ञानिक रूप से सटीक उम्र वाला बरगद
इस शोध का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि मुंगेर के इस बरगद को दुनिया का सबसे पुराना accurately dated Ficus benghalensis यानी वैज्ञानिक तरीके से सटीक उम्र निर्धारित किया गया भारतीय बरगद माना गया है। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका अर्थ यह नहीं है कि दुनिया में इससे ज्यादा उम्र का कोई बरगद अस्तित्व में नहीं हो सकता। बल्कि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह वह बरगद है जिसकी उम्र इस प्रजाति में इस तरह वैज्ञानिक रूप से निर्धारित हुई है।
शोध Quaternary Research जर्नल में प्रकाशित हुआ और Cambridge University Press पर इसका प्रकाशन 23 अप्रैल 2026 को ऑनलाइन हुआ। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने भी जुलाई 2026 में इस वैज्ञानिक उपलब्धि की जानकारी जारी की। Year Old Banyan Tree”
सिर्फ इतिहास नहीं, जैव विविधता का भी केंद्र
बरगद की अहमियत सिर्फ इसलिए नहीं है कि वह सैकड़ों वर्ष पुराना है। विशाल बरगद अपनी जटिल शाखाओं और जड़ों के कारण कई प्रकार के जीवों के लिए आवास उपलब्ध करा सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसार बरगद जैसे पेड़ पक्षियों और कीटों समेत विभिन्न जीवों के लिए आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका बड़ा फैलाव स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
मुंगेर का यह बरगद इसलिए प्राकृतिक विरासत के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा बन जाता है। सदियों पुराने पेड़ों को संरक्षित करने का मतलब केवल एक पेड़ को बचाना नहीं, बल्कि उससे जुड़े पूरे प्राकृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ को बचाना भी है। इसी वजह से शोधकर्ताओं ने इस वैज्ञानिक पद्धति को भविष्य में heritage tree conservation, biodiversity conservation, heritage management और environmental education जैसे क्षेत्रों में उपयोगी बताया है।
सात सदियों से जारी है बरगद की कहानी
मुंगेर का यह विशाल बरगद आज एक ऐसी कहानी कह रहा है, जिसे समझने के लिए इतिहास की किताबों से आगे बढ़कर विज्ञान की मदद लेनी पड़ी। सात सदियों के करीब लंबा सफर तय करने वाला यह वृक्ष अब वैज्ञानिक शोध का विषय भी है और मुंगेर की प्राकृतिक विरासत का प्रतीक भी।
न राजा रहे, न साम्राज्य रहे, न वह दुनिया रही जिसमें इस बरगद ने अपनी शुरुआती जड़ें जमाई थीं। समय लगातार बदलता गया, लेकिन बरगद अपनी जड़ों से जमीन से जुड़ा रहा। आज उसकी शाखाओं से नीचे उतरती अनगिनत जटाएं जैसे मुंगेर के इतिहास की उन परतों को जोड़ती दिखाई देती हैं, जिन्हें समय ने पीछे छोड़ दिया।
अब यह बरगद केवल स्थानीय लोगों के लिए एक पुराना पेड़ नहीं है। वैज्ञानिक प्रमाण ने इसे विश्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण heritage tree के रूप में पहचान दिलाई है। मुंगेर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यहां की धरती पर मौजूद एक जीवित वृक्ष ने इतिहास, पर्यावरण और आधुनिक विज्ञान—तीनों को एक साथ जोड़ दिया है।





