इंसानी दिमाग को हम आमतौर पर एक ही अंग के रूप में जानते हैं, जो हमारी सोच, याददाश्त, भावनाओं, भाषा और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। लेकिन सितंबर 2026 में सामने आए स्टैनफोर्ड मेडिसिन के एक नए शोध ने मस्तिष्क के विकास को समझने के पुराने नजरिये पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, मस्तिष्क का अगला और पिछला हिस्सा भ्रूण के विकास के शुरुआती चरण में अलग-अलग कोशिकीय पूर्वजों से विकसित होता है। शोधकर्ताओं को यह भी संकेत मिला कि इन तंत्रिका प्रणालियों की विकासवादी जड़ें करोड़ों साल पुरानी हो सकती हैं।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च में क्या सामने आया?
स्टैनफोर्ड मेडिसिन के विकासात्मक जीव विज्ञान के शोधकर्ताओं ने भ्रूण के शुरुआती विकास का अध्ययन करके पाया कि मस्तिष्क के आगे और पीछे के हिस्सों की शुरुआत अलग-अलग कोशिकीय पूर्वजों से होती है। इस अध्ययन का नेतृत्व स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिक काइल लोह ने किया। शोध के निष्कर्ष 18 सितंबर 2026 को Nature Neuroscience में प्रकाशित हुए।
दिमाग के आगे और पीछे के हिस्से का काम कैसे अलग है?
मस्तिष्क के आगे के हिस्से में अग्र मस्तिष्क यानी फोरब्रेन और मध्य मस्तिष्क यानी मिडब्रेन शामिल होते हैं। अग्र मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्र सोचने, याददाश्त, भाषा समझने, भावनाओं और निर्णय लेने जैसे जटिल कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मध्य मस्तिष्क आंखों की गतिविधियों, दृश्य और श्रवण संबंधी प्रतिक्रियाओं तथा कई अन्य तंत्रिका प्रक्रियाओं में योगदान देता है। इन सभी कार्यों के लिए मस्तिष्क के अलग-अलग क्षेत्रों और तंत्रिका नेटवर्क के बीच लगातार तालमेल जरूरी होता है।
मस्तिष्क के पिछले हिस्से में पश्च मस्तिष्क यानी हिंडब्रेन शामिल होता है, जिससे मस्तिष्क के तने के कई महत्वपूर्ण भाग और सेरिबेलम जैसे क्षेत्र विकसित होते हैं। यह हिस्सा सांस लेने, हृदय गति के नियमन, निगलने और शरीर के संतुलन जैसी जरूरी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेरिबेलम मांसपेशियों की गतिविधियों में तालमेल और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ये कार्य अलग-अलग हिस्सों के सहयोग से होते हैं और मस्तिष्क का कोई भी बड़ा कार्य केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। “Human Brain”
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने चूहों के विकसित होते भ्रूण का अध्ययन किया। इसमें उन्हें दो प्रकार की कोशिकीय पूर्वज आबादियां मिलीं, जिनकी पहचान अलग-अलग जीन की सक्रियता से की जा सकती थी। OTX2 नामक जीन व्यक्त करने वाली कोशिकाएं आगे चलकर अग्र मस्तिष्क और मध्य मस्तिष्क बनाने के लिए निर्धारित थीं, जबकि GBX2 नामक जीन व्यक्त करने वाली कोशिकाएं पश्च मस्तिष्क के निर्माण से जुड़ी थीं। अध्ययन में इन दोनों कोशिकीय समूहों के शुरुआती विकास के दौरान अलग रहने के प्रमाण मिले।
करोड़ों साल पुराना है मस्तिष्क के विकास का यह इतिहास
इस शोध की एक और महत्वपूर्ण बात इसका विकासवादी पहलू है। वैज्ञानिकों ने इंसान के मस्तिष्क के विकास को समझने के लिए अन्य जीवों की तंत्रिका प्रणालियों से तुलना की। स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन में मुर्गियों, जेब्राफिश और एकॉर्न वर्म जैसे जीवों में भी दो अलग-अलग विकासात्मक स्रोतों से जुड़ा समान पैटर्न देखा गया। इससे वैज्ञानिकों को संकेत मिला कि मस्तिष्क के इन हिस्सों की अलग-अलग उत्पत्ति का इतिहास लगभग 55 करोड़ साल या उससे भी पुराने विकासवादी दौर तक जा सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि आज के इंसान के मस्तिष्क के दो हिस्से किसी हालिया घटना में अलग-अलग बने और फिर आपस में जुड़ गए। शोधकर्ताओं की व्याख्या यह है कि विकास के लंबे इतिहास में पहले से मौजूद अलग-अलग तंत्रिका प्रणालियां एक ही शरीर में अधिक निकटता से व्यवस्थित हुईं और आगे चलकर जटिल मस्तिष्क संरचनाओं का हिस्सा बनीं। यह एक विकासवादी व्याख्या है, न कि करोड़ों साल पहले की घटनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन। इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि वैज्ञानिक शोध में प्रमाण और उनकी व्याख्या दोनों की अपनी सीमाएं होती हैं। “Human Brain”
प्रयोगशाला में इंसानी तंत्रिका कोशिकाएं बनाने में मिली सफलता
इस शोध का सबसे व्यावहारिक पहलू यह है कि वैज्ञानिकों ने इंसानी बहुक्षमतायुक्त स्टेम सेल से प्रयोगशाला में पश्च मस्तिष्क की मोटर न्यूरॉन कोशिकाएं विकसित करने में सफलता हासिल की। मोटर न्यूरॉन ऐसी तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं, जो मस्तिष्क और मेरुरज्जु से मांसपेशियों तक संकेत पहुंचाने में मदद करती हैं। इन संकेतों के कारण शरीर की मांसपेशियां विभिन्न गतिविधियां कर पाती हैं।
क्या इस खोज से SMA और ALS जैसी बीमारियों का इलाज संभव होगा?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) ऐसी गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारियां हैं, जिनमें मोटर न्यूरॉन प्रभावित होते हैं। इन कोशिकाओं के कमजोर होने या नष्ट होने से मांसपेशियों की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। बीमारी की प्रकृति और गंभीरता के अनुसार मरीजों को चलने-फिरने, निगलने और सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।
भूख और वजन नियंत्रित करने वाली प्रक्रियाओं को समझने में भी मदद
मस्तिष्क के पश्च हिस्से की भूमिका केवल सांस लेने और शरीर की गतिविधियों के तालमेल तक सीमित नहीं है। इसके कुछ तंत्रिका परिपथ भूख और भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में भी योगदान देते हैं। स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट में इस खोज के संभावित संबंध का उल्लेख वजन घटाने वाली दवाओं, जैसे सेमाग्लूटाइड, की कार्यप्रणाली को समझने के संदर्भ में भी किया गया है।
क्या इंसानी दिमाग वास्तव में दो अलग-अलग अंग हैं?
इस शोध के शीर्षक में मस्तिष्क को दो अलग-अलग अंगों के रूप में वर्णित किया गया है, लेकिन इसे सही संदर्भ में समझना आवश्यक है। वैज्ञानिकों ने मुख्य रूप से यह दिखाया कि मस्तिष्क के आगे और पीछे के हिस्से की विकासात्मक शुरुआत अलग-अलग कोशिकीय पूर्वजों से होती है और उनके विकासवादी इतिहास में भी अंतर हो सकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सामान्य शारीरिक संरचना में इंसान के सिर के भीतर दो स्वतंत्र मस्तिष्क मौजूद हैं।
वयस्क इंसान का मस्तिष्क एक जटिल और परस्पर जुड़ी हुई संरचना है। उसके विभिन्न हिस्से लगातार संकेतों का आदान-प्रदान करते हैं और सोचने, महसूस करने, सांस लेने, चलने तथा शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं को मिलकर नियंत्रित करते हैं। नए शोध का महत्व इस बात में है कि यह मस्तिष्क की उत्पत्ति और विकास को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इससे वैज्ञानिकों को कोशिकाओं के विकास, तंत्रिका तंत्र की बनावट और कुछ गंभीर बीमारियों के अध्ययन के नए रास्ते मिल सकते हैं।
दिमाग की विकास यात्रा अभी भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा रहस्य
स्टैनफोर्ड मेडिसिन का यह शोध बताता है कि इंसानी मस्तिष्क का निर्माण पहले से समझी गई प्रक्रिया से अधिक जटिल हो सकता है। भ्रूण की शुरुआती कोशिकाओं, OTX2 और GBX2 जैसे जीन तथा विकासवादी तुलना से वैज्ञानिकों को मस्तिष्क के आगे और पीछे के हिस्सों की अलग-अलग उत्पत्ति के प्रमाण मिले हैं। प्रयोगशाला में पश्च मस्तिष्क की कार्यशील मोटर न्यूरॉन कोशिकाएं विकसित करने की सफलता इस खोज को व्यावहारिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
आने वाले समय में यह अध्ययन तंत्रिका कोशिकाओं के विकास और SMA तथा ALS जैसी बीमारियों को समझने में सहायक हो सकता है। फिर भी, इसके आधार पर किसी नए उपचार की उपलब्धता या बीमारी के इलाज की गारंटी नहीं दी जा सकती। विज्ञान की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि हर नई खोज कुछ सवालों के जवाब देती है और कई नए सवाल भी सामने लाती है।





