भारतीय रेलवे में सुरक्षा और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। स्टेशन मास्टर, उप स्टेशन अधीक्षक, लोको पायलट, गार्ड और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए रेल संचालन को सुरक्षित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि रेलवे के दो विभागों के बीच किसी विवाद के दौरान हिंसा और दुर्व्यवहार के आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं रह जाती, बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे और कर्मचारियों के मनोबल से जुड़ा विषय बन जाता है। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर ऑन-ड्यूटी उप स्टेशन अधीक्षक (Dy. SS) नरेंद्र सिंह चाहर के साथ आरपीएफ कर्मियों द्वारा कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला इसी कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (AISMA) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।

AISMA के पत्र में लगाए गए गंभीर आरोप
AISMA के केंद्रीय अध्यक्ष प्रमोद कुमार द्वारा उत्तर मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक (DRM), आगरा कैंट को भेजे गए पत्र में दावा किया गया है कि घटना 12 जुलाई 2026 को उस समय हुई, जब ट्रेन संख्या 20808 आगरा कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 1 से प्रस्थान कर रही थी। संगठन के अनुसार, एक महिला यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थी। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात उप स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने तत्काल गार्ड को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई और संभावित दुर्घटना को टाल दिया। AISMA का कहना है कि उन्होंने एक जिम्मेदार रेल अधिकारी के रूप में सुरक्षा संबंधी अपने दायित्व का पालन किया।
महिला यात्री से कथित अवैध वसूली का आरोप
AISMA द्वारा जारी प्रेस नोट में आरोप लगाया गया है कि ट्रेन रुकने के बाद मौके पर पहुंचे कुछ आरपीएफ कर्मियों ने संबंधित महिला यात्री को ट्रेन से नीचे उतारा और उससे कथित रूप से एक हजार रुपये की मांग की। संगठन का दावा है कि जब उप स्टेशन अधीक्षक ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया, तब मामला और अधिक विवादित हो गया। प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि महिला यात्री ने भी कथित तौर पर अपने बयान में अवैध वसूली के प्रयास का उल्लेख किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है और इसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
ऑन-ड्यूटी अधिकारी के साथ कथित मारपीट का आरोप
AISMA का आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद लगभग पांच से छह आरपीएफ कर्मियों ने ऑन-ड्यूटी उप स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर को उनके कार्यालय से जबरन बाहर निकाला और उन्हें घसीटते हुए आरपीएफ कार्यालय ले जाया गया। संगठन के अनुसार, वहां उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। एसोसिएशन का कहना है कि यह पूरी घटना रेलवे परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल विभागीय अनुशासन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आपराधिक कानून के दायरे में भी आ सकता है।
AISMA ने उठाए कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल
इस घटना के बाद AISMA ने रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि स्टेशन मास्टर और उप स्टेशन अधीक्षक चौबीसों घंटे अत्यधिक दबाव और जिम्मेदारी के बीच रेल संचालन को सुरक्षित बनाए रखने का कार्य करते हैं। यदि ड्यूटी के दौरान किसी अधिकारी के साथ इस प्रकार की कथित हिंसा होती है, तो इससे पूरे स्टेशन मास्टर वर्ग में असुरक्षा और भय का माहौल पैदा होगा। संगठन का मानना है कि रेलवे प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी कर्मचारी के साथ सेवा के दौरान अपमानजनक या हिंसक व्यवहार न हो।
केवल निलंबन नहीं, कानूनी कार्रवाई की भी मांग
इस मामले पर AISMA की मालदा मंडल (MLDT) इकाई ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंडल सचिव रवीन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो केवल निलंबन पर्याप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि सभी आरोपित कर्मियों के विरुद्ध विधिसम्मत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर मानहानि सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी के साथ ड्यूटी के दौरान कथित रूप से इस प्रकार की घटना होती है और उस पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे भविष्य में गलत संदेश जा सकता है।
रेल प्रशासन से मांगा गया स्पष्ट जवाब
AISMA ने अपने पत्र में मंडल रेल प्रबंधक से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि इस घटना के संबंध में अब तक क्या कार्रवाई की गई है। संगठन ने यह भी पूछा है कि जिन कर्मियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनके विरुद्ध विभागीय या कानूनी स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही भविष्य में स्टेशन मास्टर और अन्य परिचालन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन-से संस्थागत उपाय किए जाएंगे। संगठन का कहना है कि रेलवे के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और पारस्परिक सम्मान बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
यदि आरोप सही हैं तो निष्पक्ष जांच ही सबसे महत्वपूर्ण
यह मामला कई गंभीर आरोपों से जुड़ा है। ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित जांच आवश्यक होती है। यदि सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि जांच में आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो जांच रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। किसी भी पक्ष के साथ न्याय तभी संभव है जब जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र हो।
पुलिस और आरपीएफ का पक्ष अभी सामने आना बाकी
यह उल्लेख करना आवश्यक है कि इस पूरे मामले में अब तक उत्तर मध्य रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) अथवा संबंधित पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसलिए इस समाचार में लगाए गए सभी आरोप AISMA द्वारा जारी प्रेस नोट और संगठन के दावों पर आधारित हैं। वैसे इस मामले पर RPF का पक्ष नहीं मिला है. जिसकी प्रतीक्षा की जा रही है.
जांच के बाद ही तय होगी जवाबदेही
आगरा कैंट स्टेशन की यह घटना रेलवे प्रशासन के लिए एक गंभीर परीक्षा बन गई है। यदि लगाए गए आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो यह केवल एक कर्मचारी के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि रेलवे के अनुशासन, सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय समन्वय पर भी सवाल खड़े करेगा। वहीं यदि जांच में तथ्य अलग सामने आते हैं, तो उससे भी स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल सबसे आवश्यक है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएं, उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाए और जांच के निष्कर्ष के आधार पर कानून एवं सेवा नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाए। यही प्रक्रिया कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ संस्थागत विश्वास को भी मजबूत करेगी।





