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17/10/2026 4:57 am

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रांची में Karam Milan Samaroh में धर्म, संस्कृति और परंपरा बचाने का संकल्प

Karam Milan Samaroh

रांची, 5 अक्टूबर 2026। सरना सदान मूलवासी मंच एवं केंद्रीय सरना समिति के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर करम मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। करम पर्व की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान जहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई, वहीं पारंपरिक गीत, संगीत और नृत्य ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। समारोह में शामिल लोगों ने अपनी धार्मिक पहचान, संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाजों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने तथा उन्हें संरक्षित रखने का संकल्प लिया।  “Karam Milan Samaroh”

करम मिलन समारोह में जुटा समाज, संस्कृति संरक्षण पर जोर

अल्बर्ट एक्का चौक पर आयोजित करम मिलन समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। समारोह का उद्देश्य केवल करम पर्व मनाना नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश देना भी रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक दौर में तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। समारोह के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और पूर्वजों की परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। “Karam Milan Samaroh”

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और महापौर रोशनी खलखो हुईं शामिल

करम मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में रक्षा राज्य मंत्री सह सांसद संजय सेठ और रांची की महापौर रोशनी खलखो शामिल हुईं। दोनों अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया। समारोह में उपस्थित लोगों ने अतिथियों का स्वागत किया और करम पर्व की धार्मिक तथा सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में चर्चा की। आयोजन में सामाजिक प्रतिनिधियों और समुदाय के लोगों की मौजूदगी ने इसे व्यापक सामुदायिक कार्यक्रम का स्वरूप दिया। “Karam Milan Samaroh”

मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने पारंपरिक विधि से किया शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने पारंपरिक विधि-विधान और रीति-रिवाज के साथ किया। उन्होंने धार्मिक परंपरा के अनुसार भेलवा फाड़कर समारोह की शुरुआत की। इसके बाद पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की गई। करम पर्व से जुड़े अनुष्ठानों के दौरान समाज के लोगों ने श्रद्धा और आस्था के साथ हिस्सा लिया। इस मौके पर वातावरण में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामुदायिक एकजुटता का भाव भी दिखाई दिया। “Karam Milan Samaroh”

धर्म और संस्कृति को बचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी: जगलाल पाहन

मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अपनी धर्म-संस्कृति और रीति-रिवाजों को बचाने की जरूरत पहले से अधिक महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल बड़े-बुजुर्गों के माध्यम से परंपराओं को जीवित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना जरूरी है। बच्चों और युवाओं को अपनी परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक व्यवस्था के बारे में जानकारी देने से ही सांस्कृतिक विरासत आगे बढ़ सकती है। “Karam Milan Samaroh”

नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का आह्वान

समारोह में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, धार्मिक परंपरा, लोकगीत, लोकनृत्य और सामाजिक रीति-रिवाजों से बनती है। यदि नई पीढ़ी इन परंपराओं से दूर होती चली गई तो आने वाले समय में सांस्कृतिक विरासत कमजोर पड़ सकती है। इसलिए करम जैसे पर्वों को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा और सामुदायिक जुड़ाव के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए। कार्यक्रम में लोगों ने संकल्प लिया कि वे अपनी आने वाली पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराएंगे। “Karam Milan Samaroh”

बबलू मुंडा ने पूर्वजों की व्यवस्था और परंपरा आगे बढ़ाने की बात कही

केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि समाज अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित व्यवस्था और परंपराओं को आगे बढ़ाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की मजबूती उसकी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता से जुड़ी होती है। इसलिए अपनी परंपराओं को केवल पर्व-त्योहारों तक सीमित रखने के बजाय दैनिक सामाजिक जीवन में भी उनके मूल्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

अलग राज्य के आंदोलन से जुड़े सपनों का भी किया उल्लेख

बबलू मुंडा ने झारखंड राज्य के निर्माण के लिए किए गए संघर्ष और उससे जुड़े सपनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिन विचारों और सपनों के साथ वीर शहीदों ने अलग राज्य के लिए संघर्ष किया था, उनमें से कई अपेक्षाएं अभी भी अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अपनी पहचान, अधिकार और संस्कृति के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा। इस दौरान उन्होंने दोहराया कि किसी भी परिस्थिति में समाज की धार्मिक पहचान, संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुआ पारंपरिक उत्सव

धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद समारोह ने उत्सव का रूप ले लिया। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को जीवंत कर दिया। समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से करम पर्व की खुशियां मनाईं और पारंपरिक संगीत की धुन पर नृत्य किया। इस दौरान बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक की भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम में पीढ़ियों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश भी सामने आया।

करम पर्व में प्रकृति और सामुदायिक जीवन की झलक

झारखंड की सांस्कृतिक पहचान में करम पर्व का विशेष महत्व है। करम पर्व को प्रकृति, कृषि, सामुदायिक जीवन और लोक आस्था से जोड़कर देखा जाता है। इस अवसर पर पारंपरिक पूजा, गीत और नृत्य के माध्यम से समाज अपनी सांस्कृतिक स्मृतियों को जीवित रखता है। यही कारण है कि रांची और झारखंड के अन्य क्षेत्रों में करम पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामुदायिक एकजुटता और लोक संस्कृति के उत्सव के रूप में भी दिखाई देता है।

पारंपरिक गीत और नृत्य ने बांधा समां

करम मिलन समारोह की सबसे आकर्षक प्रस्तुतियों में पारंपरिक गीत और नृत्य शामिल रहे। कलाकारों और समाज के लोगों ने अपनी लोक परंपरा के अनुरूप गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में झारखंड की लोक संस्कृति की सहजता और सामूहिकता दिखाई दी। आधुनिक मनोरंजन के दौर में भी पारंपरिक गीत-संगीत के प्रति लोगों की रुचि ने यह संदेश दिया कि लोक संस्कृति आज भी समाज के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सामूहिक भागीदारी ने मजबूत किया सामाजिक एकजुटता का संदेश

समारोह में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। धार्मिक अनुष्ठान से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक लोग सामूहिक रूप से शामिल हुए। ऐसे आयोजन समुदाय के विभिन्न वर्गों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं, जहां लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर संवाद कर सकते हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए परंपराओं को सुरक्षित रखने की दिशा में सामूहिक प्रयास कर सकते हैं।

सरना धर्म और सांस्कृतिक पहचान को लेकर जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम के दौरान सरना धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि अपनी परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। उनका मानना है कि जब नई पीढ़ी अपनी संस्कृति को समझेगी और उससे जुड़ेगी, तभी पारंपरिक ज्ञान, लोकाचार और धार्मिक रीति-रिवाज लंबे समय तक सुरक्षित रह पाएंगे।

समारोह में कई सामाजिक प्रतिनिधियों की रही मौजूदगी

करम मिलन समारोह में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पाहन जगलाल पाहन, करम मिलन समारोह के मुख्य संरक्षक सन्नी टोप्पो, सरना सदान मूलवासी मंच की अध्यक्ष अर्चना मिर्धा सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनके अलावा करन नायक, मुकेश मुंडा, आशीष मुंडा, विशाल मंडा, नरेश पाहन, शोभा कच्छप, प्रदीप मुंडा, अशोक मुंडा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।

परंपराओं को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ समापन

पूजा-अर्चना, पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों के बाद करम मिलन समारोह का समापन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान धर्म, संस्कृति और सामाजिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश प्रमुखता से सामने आया। समारोह ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पूर्वजों की विरासत को सुरक्षित रखना जरूरी है। करम मिलन समारोह इसी सामूहिक संकल्प और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

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