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17/10/2026 3:33 am

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Very Hot Tea Coffee-चाय-कॉफी कितनी गर्म पीते हैं आप? रिसर्च ने खोला तापमान और कैंसर के बीच छिपा रिश्ता

Very Hot Tea Coffee

सुबह की चाय, लेकिन एक छोटा सवाल

भारत में सुबह की शुरुआत चाय से करने की आदत करोड़ों घरों में आम है। किसी के लिए अदरक वाली चाय दिन की पहली ऊर्जा है, तो किसी के लिए कॉफी के बिना सुबह अधूरी लगती है। चाय के साथ अखबार, परिवार के साथ कुछ मिनट और दिन की पहली बातचीत—यह पेय सिर्फ भोजन या पेय नहीं, हमारी सामाजिक दिनचर्या का हिस्सा भी है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप चाय कितनी गर्म पीते हैं?

यही मामूली-सा सवाल अब कैंसर संबंधी एक बड़े वैज्ञानिक अध्ययन के केंद्र में है। सितंबर 2026 में प्रकाशित एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में करीब 9.8 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि बहुत गर्म चाय या कॉफी पीने की आदत का संबंध भोजन नली यानी इसोफेगस के एक विशेष प्रकार के कैंसर के अधिक जोखिम से था।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शोध चाय या कॉफी को दोषी नहीं ठहराता। संकेत तापमान की ओर है। “Very Hot Tea Coffee”

करीब 10 लाख लोगों का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है

इस नए अध्ययन में University of Oxford के शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के दो बड़े अध्ययन समूहों—Million Women Study और UK Biobank—के आंकड़ों को मिलाकर 977,282 वयस्कों का विश्लेषण किया।

प्रतिभागियों पर औसतन लगभग 14.2 वर्ष और 11.1 वर्ष तक नजर रखी गई। इस दौरान कुल 2,348 नए इसोफेगल कैंसर के मामले सामने आए, जिनमें 1,045 स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और 1,303 एडेनोकार्सिनोमा थे।

इतने बड़े समूह और लंबे अनुवर्ती समय के कारण यह अध्ययन अब तक के सबसे बड़े अध्ययनों में माना जा रहा है, जिसमें गर्म पेय के तापमान और इसोफेगल कैंसर के बीच संबंध को देखा गया है। “Very Hot Tea Coffee”

बहुत गर्म चाय पीने वालों में जोखिम करीब तीन गुना

अध्ययन का सबसे चर्चित निष्कर्ष स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा यानी ESCC से संबंधित है।

जिन लोगों ने अपने गर्म पेय का तापमान “बहुत गर्म” बताया, उनमें इस प्रकार के कैंसर का जोखिम उन लोगों की तुलना में लगभग 3.17 गुना था जो पेय को गर्म के बजाय अपेक्षाकृत गुनगुना पीना पसंद करते थे। “गर्म” पेय पसंद करने वालों में जोखिम भी अधिक था, हालांकि “बहुत गर्म” समूह जितना नहीं।

यहां “तीन गुना जोखिम” सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। यह सापेक्ष जोखिम है, यानी अध्ययन में दोनों समूहों के बीच जोखिम का अनुपात। इसका मतलब यह नहीं कि बहुत गर्म चाय पीने वाले हर तीसरे व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा।

छह या उससे ज्यादा गर्म पेय भी बने चिंता का कारण

तापमान के अलावा पेय की संख्या भी महत्वपूर्ण दिखाई दी।

शोधकर्ताओं ने पाया कि तापमान के प्रभाव को समायोजित करने के बाद भी जो लोग रोजाना छह या उससे ज्यादा गर्म पेय लेते थे, उनमें इसोफेगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का जोखिम छह से कम गर्म पेय लेने वालों की तुलना में लगभग 71 प्रतिशत अधिक था।

यह परिणाम यह सवाल उठाता है कि केवल एक कप की गर्मी नहीं, बल्कि बार-बार होने वाला तापीय संपर्क भी महत्वपूर्ण हो सकता है। “Very Hot Tea Coffee”

65 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा कहां से आया

यहां विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़े कैंसर शोध निकाय International Agency for Research on Cancer यानी IARC की पुरानी वैज्ञानिक समीक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है।

IARC ने 2016 में 65 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर पिए जाने वाले बहुत गर्म पेय को मनुष्यों के लिए “संभवतः कैंसरकारी” यानी Group 2A में वर्गीकृत किया था।

लेकिन Group 2A का अर्थ “यह चीज निश्चित रूप से कैंसर करेगी” नहीं है। IARC खुद स्पष्ट करता है कि यह वर्गीकरण मुख्यतः वैज्ञानिक प्रमाण की मजबूती बताता है, किसी व्यक्ति के लिए वास्तविक जोखिम की मात्रा नहीं। “Very Hot Tea Coffee”

तापमान शरीर के भीतर क्या कर सकता है

भोजन नली शरीर का वह रास्ता है जिससे भोजन और पेय मुंह से पेट तक पहुंचते हैं। जब बहुत गर्म तरल बार-बार इसी रास्ते से गुजरता है तो इसकी अंदरूनी परत पर तापीय चोट हो सकती है।

वैज्ञानिकों की प्रमुख परिकल्पना यह है कि बार-बार होने वाली गर्मी से ऊतक में क्षति और सूजन जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं। लंबे समय में लगातार दोहराया गया ऐसा नुकसान कोशिकीय बदलावों के लिए अनुकूल वातावरण बना सकता है।

यह जैविक प्रक्रिया अभी पूरी तरह समझी नहीं गई है, लेकिन बहुत गर्म पेय और ESCC के बीच संबंध को लेकर अलग-अलग देशों के शोधों ने समान दिशा में संकेत दिए हैं। “Very Hot Tea Coffee”

चाय या कॉफी खुद दोषी नहीं दिखीं

यह शायद इस पूरी खबर का सबसे जरूरी हिस्सा है।

अगर कोई व्यक्ति चाय पीता है लेकिन उसे थोड़ा ठंडा करके पीता है, तो इस अध्ययन को पढ़कर चाय छोड़ने का निष्कर्ष निकालना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।

शोध में तापमान के साथ कैंसर का संबंध अधिक स्पष्ट था। चाय और कॉफी के बीच भी ऐसा कोई संदेश नहीं मिला कि किसी एक पेय को सामान्य मात्रा में पीना अपने आप इस कैंसर का कारण है। शोधकर्ताओं का निष्कर्ष मुख्यतः बहुत अधिक तापमान और पेय सेवन की आवृत्ति से जुड़ा है। “Very Hot Tea Coffee”

कैंसर के दोनों प्रमुख प्रकारों में एक जैसा असर नहीं

इस अध्ययन की वैज्ञानिक अहमियत इसलिए भी है क्योंकि शोधकर्ताओं ने इसोफेगल कैंसर के अलग-अलग प्रकारों को अलग करके देखा।

बहुत गर्म पेय का संबंध स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के साथ स्पष्ट था। लेकिन दूसरे प्रमुख प्रकार, एडेनोकार्सिनोमा, में तापमान के साथ वैसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला।

यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि गर्म पेय का संभावित प्रभाव किसी भी प्रकार के इसोफेगल कैंसर पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

भारत के लिए यह खबर क्यों मायने रखती है

ब्रिटेन में हुआ अध्ययन भारत के लोगों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। भारतीय आबादी की चाय पीने की आदतें, भोजन, तंबाकू का सेवन, शराब की आदत, शरीर का वजन और कैंसर के अन्य जोखिम अलग हो सकते हैं।

फिर भी भारत में चाय और कॉफी का नियमित सेवन बहुत आम है और कई लोग पेय को इतनी गर्म अवस्था में पीते हैं कि कप से लगातार भाप निकलती रहती है।

इसलिए अध्ययन से निकलने वाली सावधानी सरल है—पेय को पीने लायक आरामदायक तापमान तक आने दें।

“बहुत गर्म” और “गर्म” में फर्क समझना जरूरी है

अक्सर लोग “गर्म चाय” और “बहुत गर्म चाय” को एक ही मान लेते हैं।

IARC का 65°C से ऊपर वाला वर्गीकरण वैज्ञानिक संदर्भ देता है, लेकिन घर में हर व्यक्ति के पास तापमान नापने का उपकरण नहीं होता। नए अध्ययन में भी तापमान को मुख्यतः लोगों की बताई पसंद के आधार पर वर्गीकृत किया गया था, सीधे हर कप का तापमान मापकर नहीं।

इसलिए रोजमर्रा की जिंदगी में 65°C की सटीक सीमा के पीछे भागने के बजाय इतना समझना अधिक व्यावहारिक है कि जिस पेय को पीने के लिए मुंह या जीभ को संभालना पड़े, उसे तुरंत न पिएं।

जीभ जल रही है तो भोजन नली भी गर्मी झेल रही है

बहुत गर्म चाय की एक आसान पहचान है—पहला घूंट लेते ही जीभ या मुंह में जलन होना।

शरीर का यह संकेत हमें रुकने के लिए कहता है।

पेय को कुछ मिनट खुला छोड़ना, कप को धीरे-धीरे घुमाना या भोजन के साथ तुरंत न पीना तापमान कम करने में मदद कर सकता है। यह कोई चिकित्सकीय उपचार नहीं, बल्कि सामान्य सावधानी है।

भारत के दूसरे लोकप्रिय गर्म भोजन का क्या?

यह खबर केवल चाय और कॉफी तक सीमित समझना भी उचित नहीं होगा।

IARC से जुड़े शोध में बहुत गर्म भोजन और पेय के कुल तापीय संपर्क को भी इसोफेगल कैंसर के संदर्भ में अध्ययन किया गया है। अफ्रीका में किए गए एक अध्ययन ने बहुत गर्म भोजन और पेय के तापीय संपर्क तथा ESCC के बीच संबंध पाया और बहुत गर्म भोजन-पेय से बचने को संभावित रोकथाम उपाय माना।

इसका मतलब यह नहीं कि गरम रोटी, दाल, सूप, इडली या सब्जी अपने आप कैंसरकारी भोजन हैं। चिंता असामान्य रूप से ज्यादा तापमान पर बार-बार सेवन की है।

बहुत गर्म भोजन और पौष्टिक भोजन में फर्क

यह distinction भारतीय रसोई के लिए खास तौर पर जरूरी है।

दाल, सब्जियां, इडली, उपमा, खिचड़ी या सूप जैसे खाद्य पदार्थ अपने पोषण के कारण स्वस्थ भोजन का हिस्सा हो सकते हैं। इन्हें सिर्फ इसलिए अस्वास्थ्यकर कहना कि इन्हें गरम खाया जाता है, वैज्ञानिक रूप से गलत होगा।

सवाल यह है कि खाना इतना गर्म तो नहीं कि खाते समय मुंह और गले में जलन हो।

यानी भोजन की गुणवत्ता और तापमान दो अलग-अलग स्वास्थ्य प्रश्न हैं।

एक और 2026 अध्ययन ने गर्म पेय और पेट के कैंसर पर भी सवाल उठाया

जनवरी 2026 में Food & Function में प्रकाशित एक अलग UK Biobank अध्ययन ने 3,28,752 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया।

इसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना आठ से अधिक गर्म पेय लेने वालों में पेट के कैंसर का जोखिम अधिक था और बहुत गर्म पेय पसंद करने वाले अधिक सेवन करने वालों में जोखिम और बढ़ा दिखाई दिया।

लेकिन यह भी एक अवलोकन अध्ययन है। इसे गर्म चाय या कॉफी और पेट के कैंसर के बीच निश्चित कारण-परिणाम के प्रमाण के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।

यह दो अलग अध्ययनों का एक दिलचस्प संकेत है, लेकिन निर्णायक निष्कर्ष के लिए और शोध की जरूरत है।

कैंसर के दूसरे बड़े जोखिमों को भूलना नहीं चाहिए

बहुत गर्म पेय की खबर महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे कैंसर का सबसे बड़ा खतरा समझना गलत होगा।

IARC के अनुसार तंबाकू और शराब कई देशों में इसोफेगल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में हैं।

इसलिए कोई व्यक्ति रोजाना बहुत गर्म चाय पीता है और साथ में धूम्रपान भी करता है तो केवल चाय को थोड़ा ठंडा कर लेना पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं माना जा सकता।

कैंसर की रोकथाम में धूम्रपान से बचना, शराब को सीमित करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और चिकित्सकीय रूप से उचित जांच महत्वपूर्ण हैं।

तो क्या अब चाय बंद कर देनी चाहिए?

नहीं।

उपलब्ध प्रमाण चाय या कॉफी को सामान्य तापमान पर पीने से रोकने की सलाह नहीं देते। नई रिसर्च का व्यावहारिक संदेश यह है कि इन्हें बहुत गर्म अवस्था में पीने की आदत से बचना समझदारी हो सकती है।

अगर किसी व्यक्ति को चाय पसंद है तो चाय पी सकता है—बस कप से निकलते ही तुरंत निगलने की जरूरत नहीं।

एक छोटी आदत, जिसे अपनाना आसान है

चाय बनने के बाद उसे तुरंत पीने के बजाय कुछ मिनट इंतजार करना शायद इस पूरी कहानी का सबसे सरल व्यवहारिक संदेश है।

इसे किसी कठिन स्वास्थ्य नियम की तरह देखने की जरूरत नहीं।

कप को थोड़ा ठंडा होने देना, छोटे घूंट लेना और मुंह में जलन महसूस होने पर रुक जाना—ये साधारण सावधानियां हैं।

वैज्ञानिक प्रमाण की सबसे बड़ी सीमा

नई रिसर्च बहुत बड़ी जरूर है, लेकिन यह अवलोकनात्मक अध्ययन है। लोगों से उनके पसंदीदा पेय तापमान और सेवन की मात्रा के बारे में जानकारी ली गई थी। शोधकर्ताओं ने हर कप का तापमान प्रयोगशाला की तरह सीधे मापा नहीं था।

इसलिए इससे यह सिद्ध नहीं होता कि किसी व्यक्ति को बहुत गर्म चाय पीने से निश्चित रूप से कैंसर होगा।

दूसरी बात, जिन लोगों ने “बहुत गर्म” पेय पसंद करने की बात कही, उनकी दूसरी जीवनशैली आदतें भी अलग हो सकती हैं। शोध में कई संभावित कारकों के लिए समायोजन किया गया, फिर भी अवलोकनात्मक अध्ययन में सभी संभावित भ्रमकारी कारकों को पूरी तरह हटाना संभव नहीं होता।

“तीन गुना” सुनकर डरने के बजाय जोखिम को समझें

स्वास्थ्य पत्रकारिता में सापेक्ष जोखिम और वास्तविक जोखिम के बीच अंतर बताना बहुत जरूरी है।

“तीन गुना जोखिम” का अर्थ यह नहीं है कि तीन कप चाय पीने पर जोखिम तीन गुना हो गया या हर व्यक्ति को कैंसर होने की संभावना तीन गुना निश्चित रूप से बढ़ गई।

अध्ययन एक दुर्लभ बीमारी के एक विशिष्ट प्रकार के साथ सांख्यिकीय संबंध दिखाता है। इसलिए पाठक को डराने के बजाय इसे एक संभावित रोकथाम योग्य व्यवहार संकेत की तरह समझना बेहतर है।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए

चाय के तापमान को लेकर सावधानी बरतना एक बात है, लेकिन भोजन नली से जुड़े लगातार लक्षणों को नजरअंदाज करना दूसरी।

यदि किसी व्यक्ति को लगातार निगलने में परेशानी, भोजन अटकने का एहसास, निगलते समय दर्द, लगातार सीने या ऊपरी पेट में असामान्य परेशानी, बिना कारण वजन कम होना या लंबे समय तक रहने वाले अन्य चिंताजनक लक्षण हों, तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

इनमें से कोई भी लक्षण अपने आप कैंसर साबित नहीं करता, लेकिन लगातार बने रहने पर कारण पता करना जरूरी है।

चाय नहीं, तापमान पर नजर रखें

करीब 10 लाख लोगों के आंकड़ों से निकली सितंबर 2026 की यह रिसर्च हमारी रोजमर्रा की एक छोटी आदत पर गंभीर वैज्ञानिक सवाल उठाती है।

बहुत गर्म पेय पसंद करने वालों में इसोफेगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का जोखिम उन लोगों से करीब तीन गुना था जो पेय को गर्म के बजाय गुनगुना पसंद करते थे। रोजाना छह या उससे ज्यादा गर्म पेय लेने का भी अधिक जोखिम से संबंध पाया गया।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि चाय या कॉफी छोड़नी होगी।

असल संदेश कप में मौजूद चाय नहीं, उसकी गर्मी है।

अगली बार चाय का कप हाथ में आए और उससे भाप उठ रही हो, तो उसे तुरंत पीने के बजाय कुछ मिनट इंतजार करिए। स्वाद में शायद कोई बड़ा फर्क न आए, लेकिन यह छोटी आदत अनावश्यक तापीय चोट से बचने की दिशा में एक समझदारी भरा कदम हो सकती है।

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