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27/07/2026 3:49 am

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रांची में 276वीं अन्नपूर्णा सेवा ने रचा भक्ति और सेवा का अनुपम इतिहास

रांची के पुंदाग स्थित एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम मंदिर एवं श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में रविवार को आयोजित 276वीं श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह सनातन संस्कृति, सेवा, समर्पण और मानवता का जीवंत उत्सव बन गया। परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह से लेकर देर शाम तक हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि आज भी समाज में सेवा और भक्ति की परंपरा पूरी आस्था के साथ जीवित है। मंदिर परिसर में हर ओर “राधे-राधे” और “जय श्री राधे-कृष्ण” के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आध्यात्मिक संतोष और सेवा के प्रति श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

राधा-कृष्ण के दिव्य श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को किया मंत्रमुग्ध

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्री राधा-कृष्ण के विशेष श्रृंगार से हुई। मंदिर को रंग-बिरंगे पुष्पों, आकर्षक सजावट और मनोहारी प्रकाश व्यवस्था से सुसज्जित किया गया था। विशेष रूप से श्री राधारानी का श्रृंगार भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा। सुंदर आभूषणों, ताजे पुष्पों और पारंपरिक वस्त्रों से सुसज्जित राधारानी की अलौकिक छवि के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य स्वरूप भी भक्तों को अध्यात्म की गहराई तक ले जाता रहा। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही ऐसा अनुभव हो रहा था मानो वृंदावन की पावन भूमि का साक्षात दर्शन हो रहा हो। श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे और बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ पूजा-अर्चना में शामिल हुए।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान को अर्पित हुआ महाप्रसाद

दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान श्री राधा-कृष्ण को महाप्रसाद अर्पित किया। पूरे मंदिर में शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रों की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। पूजा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु मंत्रोच्चार में सहभागी बने और भगवान से सुख-समृद्धि, शांति और मानव कल्याण की कामना की। महाप्रसाद अर्पण के बाद भक्तों के बीच प्रसाद वितरण का क्रम शुरू हुआ, जो कई घंटों तक चलता रहा।

महाप्रसाद बना सेवा और समानता का संदेश

अन्नपूर्णा सेवा की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था। हर वर्ग, हर आयु और हर समुदाय के लोग एक साथ कतार में बैठकर महाप्रसाद ग्रहण करते दिखाई दिए। महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, ताजगी से भरपूर मैंगो शरबत और आलू चिप्स श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक परोसे गए। लगभग दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में बैठकर महाप्रसाद ग्रहण किया। यह दृश्य भारतीय संस्कृति के उस मूल भाव को साकार करता दिखाई दिया, जहां भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा, समानता और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को सौभाग्यशाली बताया।

भक्ति संगीत ने पूरे वातावरण को बना दिया वृंदावनमय

अन्नपूर्णा सेवा के दौरान आयोजित भजन संध्या कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। ट्रस्ट के सुप्रसिद्ध भजन गायक मनीष सोनी ने अपने मधुर कंठ से अनेक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। “राधे-राधे बोल मनवा, राधे-राधे बोल, राधा नाम अमृत है प्यारा…” जैसे भजनों ने पूरे वातावरण को भक्ति रस में डुबो दिया। श्रद्धालु तालियों की गूंज के साथ भजनों पर झूमते रहे और कई भक्त भाव-विभोर होकर भगवान की आराधना में लीन हो गए। संगीत और भक्ति का यह अद्भुत संगम पूरे आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और भी ऊंचाई प्रदान कर रहा था।

सामूहिक महाआरती बनी श्रद्धा का दिव्य दृश्य

भजन संध्या के बाद आयोजित सामूहिक महाआरती इस आयोजन का सबसे भावपूर्ण क्षण बन गई। सैकड़ों दीपों की रोशनी, घंटियों की मधुर ध्वनि और श्रद्धालुओं द्वारा एक स्वर में गाए जा रहे आरती के शब्दों ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय ऊर्जा से भर दिया। महाआरती में शामिल प्रत्येक श्रद्धालु के चेहरे पर संतोष और आध्यात्मिक आनंद साफ दिखाई दे रहा था। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया।

प्रतिदिन चल रही अन्नपूर्णा सेवा बनी मानवता की मिसाल

ट्रस्ट के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक अन्नपूर्णा सेवा के अंतर्गत वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह सेवा केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सेवा, करुणा, परोपकार और सनातन संस्कृति के मूल्यों को मजबूत करने का सतत अभियान है। उन्होंने बताया कि रविवार को सुबह से देर शाम तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

सनातन संस्कृति में अन्नपूर्णा सेवा का विशेष महत्व

भारतीय संस्कृति में अन्नदान को सर्वोच्च दान माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि भूखे को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य है। अन्नपूर्णा सेवा इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुकी है। पुंदाग स्थित यह सेवाधाम केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा, आध्यात्मिक जागरण और सांस्कृतिक संरक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। यहां आने वाले श्रद्धालु केवल भगवान के दर्शन ही नहीं करते, बल्कि सेवा, प्रेम और समर्पण का संदेश भी अपने साथ लेकर जाते हैं।

सेवा, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का प्रेरणादायी संदेश

276वीं अन्नपूर्णा सेवा का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि जब समाज सेवा और भक्ति एक साथ जुड़ती है तो उसका प्रभाव केवल मंदिर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह साबित किया कि सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी समाज में उतनी ही मजबूत हैं। अन्नपूर्णा सेवा केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि मानवता, समानता, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का महापर्व है। यही कारण है कि हर माह आयोजित होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता जा रहा है और भविष्य में भी सेवा और भक्ति की यह परंपरा समाज को नई दिशा देती रहेगी।

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