बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा (BIT Mesra) के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) विभाग में “एआई और इसके आयाम” (AI and Its Dimension) विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन 21 और 22 अगस्त 2026 को किया गया। यह कार्यक्रम AICTE-VAANI के प्रायोजन के तहत आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं के उपयोग और क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से आधुनिक तकनीकी ज्ञान को बढ़ावा देना था। सेमिनार की खास बात यह रही कि इसका आयोजन उड़िया भाषा में किया गया, जिसमें शिक्षा जगत, उद्योग और छात्र समुदाय से जुड़े कुल 81 क्षेत्रीय प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब Artificial Intelligence शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, रक्षा, साइबर सुरक्षा और प्रशासन सहित लगभग हर क्षेत्र में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। सेमिनार के माध्यम से प्रतिभागियों को AI की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ इसके तकनीकी, व्यावहारिक, नैतिक और भविष्य से जुड़े पहलुओं को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम ने यह भी दिखाया कि AI की शिक्षा को केवल अंग्रेजी तक सीमित रखने के बजाय भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराना तकनीकी ज्ञान को अधिक व्यापक समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। “AI Seminar”
उद्घाटन में कंप्यूटिंग से AI तक की यात्रा
सेमिनार का उद्घाटन समारोह कई महत्वपूर्ण विचारों और चर्चाओं के साथ शुरू हुआ। कार्यक्रम में झारखंड पुलिस के पूर्व महानिदेशक और आईपीएस अधिकारी श्री विभूति भूषण प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एनआईटी राउरकेला के सीएसई विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पंकज कुमार सा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। बीआईटी मेसरा के सीएसई विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अभिजीत मुस्तफी भी उद्घाटन सत्र में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि श्री विभूति भूषण प्रधान ने कंप्यूटिंग तकनीक के विकास की चर्चा करते हुए शुरुआती दौर के सुपरकंप्यूटर से लेकर वर्तमान समय के AI आधारित हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम तक की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक लगातार बदल रही है और इस बदलाव के साथ निरंतर सीखना और खुद को अपडेट करना जरूरी है। उनके अनुसार, तकनीकी दुनिया में केवल वर्तमान ज्ञान के आधार पर लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहना संभव नहीं है। निरंतर नवाचार और बदलती तकनीक के अनुरूप खुद को विकसित करना आज की आवश्यकता है। “AI Seminar”
पंच कार्ड से स्मार्ट बायोमेट्रिक तक
एनआईटी राउरकेला के प्रो. पंकज कुमार सा ने तकनीक और सुरक्षा के बदलते स्वरूप को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने पुराने समय की पंच कार्ड प्रणालियों का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दौर की प्रणालियों में दुरुपयोग और छेड़छाड़ की संभावनाएं अधिक थीं। इसके मुकाबले आज Biometric Technology और बुद्धिमान सुरक्षा प्रणालियां कहीं अधिक उन्नत हो चुकी हैं।
आज AI और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से सुरक्षा प्रणालियां संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने, पैटर्न का विश्लेषण करने और तेजी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो रही हैं। हालांकि तकनीक के विकास के साथ नई सुरक्षा चुनौतियां भी सामने आती हैं। इसलिए AI के इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। “AI Seminar”
LLM और Generative AI पर चर्चा
बीआईटी मेसरा के सीएसई विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत मुस्तफी ने तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाली AICTE की VAANI योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि तकनीकी विषयों को भारतीय भाषाओं में समझाने से अधिक से अधिक विद्यार्थी आधुनिक तकनीक से जुड़ सकते हैं। विशेष रूप से द्विभाषी और क्षेत्रीय भाषा आधारित कार्यक्रम छात्रों के लिए जटिल तकनीकी विषयों को समझने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं।
उन्होंने AI के तेजी से बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए Large Language Models (LLMs), Generative AI और Agentic AI जैसी तकनीकों का उल्लेख किया। आज Generative AI टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो और वीडियो जैसी विभिन्न प्रकार की सामग्री तैयार करने में सक्षम हो रहा है, जबकि Agentic AI का विकास ऐसे सिस्टम की दिशा में हो रहा है जो किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई चरणों में काम कर सकें। ऐसे में इन तकनीकों को समझना तकनीकी शिक्षा और भविष्य के रोजगार दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। “AI Seminar”
भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा पर जोर
सेमिनार के संयोजक डॉ. शुभेंदु कानूनगो ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों को सामने रखा। उन्होंने तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देने, प्रतिभागियों को AI के वर्तमान विकास से परिचित कराने और मानव समाज पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल AI की तकनीकी जानकारी देना नहीं था, बल्कि इसके व्यावहारिक, नैतिक और भविष्य से जुड़े पहलुओं पर भी व्यापक चर्चा करना था। इसके साथ ही उभरते शोधकर्ताओं को अनुभवी विशेषज्ञों से जोड़ने की कोशिश की गई, ताकि विद्यार्थी और युवा शोधकर्ता अपने शोध कार्य के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें और भविष्य में नए सहयोग के अवसर विकसित हो सकें। “AI Seminar”
Explainable AI से Computer Vision तक
दो दिनों तक चले तकनीकी सत्रों में AI के कई महत्वपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। Explainable AI पर चर्चा के दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि AI सिस्टम किसी निर्णय तक कैसे पहुंचते हैं और उनके निर्णय को मनुष्य किस तरह समझ सकता है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वास्थ्य, बैंकिंग, प्रशासन और सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में AI के निर्णयों की पारदर्शिता आवश्यक हो जाती है।
सेमिनार में Computer Vision पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कंप्यूटर विजन AI का वह क्षेत्र है जिसमें मशीनों को तस्वीरों और वीडियो से जानकारी समझने और उसका विश्लेषण करने की क्षमता दी जाती है। इसके अलावा Transformer Architecture और रक्षा क्षेत्र में AI, Visual Surveillance और Cyber Physical Systems जैसे विषयों ने भी तकनीकी सत्रों में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। इन विषयों पर हुई चर्चा ने AI के वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल की व्यापक संभावनाओं को सामने रखा। “AI Seminar”
रक्षा और साइबर सुरक्षा में AI का बढ़ता इस्तेमाल
रक्षा क्षेत्र में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए Transformer Architecture and AI in Defence पर विशेष चर्चा की गई। AI आधारित प्रणालियां बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करने, पैटर्न पहचानने और निगरानी जैसी गतिविधियों में मदद कर सकती हैं। Visual Surveillance के क्षेत्र में भी AI आधारित तकनीकें तस्वीरों और वीडियो के बड़े डेटाबेस का तेजी से विश्लेषण करने में उपयोगी साबित हो रही हैं।
सेमिनार में Cyber and AI के संबंध पर भी चर्चा हुई। AI जहां साइबर हमलों की पहचान और सुरक्षा में मदद कर सकता है, वहीं AI आधारित नए साइबर खतरे भी सामने आ रहे हैं। इस कारण आने वाले समय में साइबर सुरक्षा और AI का संबंध और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है। Cyber Physical Systems पर चर्चा ने डिजिटल सिस्टम और भौतिक दुनिया के बीच बढ़ते तकनीकी संबंध को समझने का अवसर दिया।
स्टील उद्योग और कृषि में AI का उपयोग
AI के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में उपयोग को भी सेमिनार में प्रमुखता दी गई। AI Implementation in Steel Industry विषय के माध्यम से यह बताया गया कि किस तरह AI आधारित सिस्टम उत्पादन प्रक्रियाओं, डेटा विश्लेषण, गुणवत्ता नियंत्रण और औद्योगिक निर्णय लेने में उपयोगी हो सकते हैं। भारत जैसे बड़े औद्योगिक देश में AI का उद्योगों में प्रभावी इस्तेमाल उत्पादन क्षमता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसी तरह Bioinformatics in Sustainable Agriculture पर चर्चा ने AI, जैव सूचना विज्ञान और टिकाऊ कृषि के बीच संबंध को सामने रखा। कृषि क्षेत्र में डेटा आधारित तकनीकों के इस्तेमाल से फसल, मिट्टी, जैविक संसाधनों और उत्पादन से जुड़े कई पहलुओं का बेहतर विश्लेषण किया जा सकता है। इससे भविष्य में अधिक टिकाऊ और तकनीक आधारित कृषि व्यवस्था विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
देश के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ हुए शामिल
सेमिनार में देश के कई प्रतिष्ठित तकनीकी और शोध संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। DRDO, ISI Bengaluru, ICAR, NIT Rourkela, NIT Patna और NIT Jamshedpur से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों में AI के शोध और व्यावहारिक इस्तेमाल से संबंधित जानकारी साझा की। इसके साथ ही SAIL और PwC से जुड़े उद्योग विशेषज्ञों ने भी वास्तविक दुनिया में AI के अनुप्रयोग और उद्योगों के सामने मौजूद चुनौतियों पर अपने अनुभव साझा किए।
शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों की भागीदारी ने कार्यक्रम को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहने दिया। शोध, केस स्टडी और वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि AI को प्रयोगशाला से बाहर वास्तविक जीवन में किस प्रकार लागू किया जा सकता है।
सवाल-जवाब और नेटवर्किंग से बढ़ा संवाद
तकनीकी सत्रों के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर कार्यक्रमों ने प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का अवसर दिया। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने AI की तकनीक, उसके अनुप्रयोग, सुरक्षा, भविष्य और सामाजिक प्रभावों से जुड़े सवाल पूछे। प्रस्तुतियों के बाद हुए संवाद ने विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा को आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम में संरचित नेटवर्किंग की व्यवस्था ने शिक्षा, शोध और उद्योग से जुड़े प्रतिभागियों को एक-दूसरे के साथ विचार साझा करने का अवसर दिया। इससे भविष्य में शोध सहयोग, तकनीकी साझेदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान की संभावनाएं भी मजबूत हुईं। इस तरह सेमिनार ने AI के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ एक सहयोगी अकादमिक वातावरण तैयार करने का भी काम किया।
उड़िया भाषा में AI की नई पहल
इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका उड़िया भाषा में आयोजित होना रहा। AICTE-VAANI के माध्यम से क्षेत्रीय भाषा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल ने यह संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक का ज्ञान भारतीय भाषाओं में भी प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराया जा सकता है।
AI जैसी तेजी से विकसित होती तकनीक को क्षेत्रीय भाषाओं में समझाने से उन विद्यार्थियों और प्रतिभागियों तक तकनीकी ज्ञान पहुंचाने की संभावना बढ़ती है, जो अंग्रेजी माध्यम के तकनीकी संसाधनों के कारण कई बार कठिनाई महसूस करते हैं। इस दृष्टि से यह सेमिनार तकनीकी शिक्षा में भाषाई समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
AI के भविष्य पर संवाद के साथ समापन
सेमिनार के समापन अवसर पर डॉ. सेनापति ने AICTE-VAANI के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने AI के क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों के बीच निरंतर नवाचार, शोध और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेष रूप से उड़िया क्षेत्रीय भाषा के संदर्भ में उन्होंने AI और तकनीकी शिक्षा को अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाने के महत्व को रेखांकित किया।
दो दिनों तक चले इस सेमिनार ने प्रतिभागियों को Artificial Intelligence के बदलते परिदृश्य को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझने का अवसर दिया। Generative AI, LLM, Agentic AI, Explainable AI, Computer Vision, Cyber Security, Defence Technology, Agriculture और Industry जैसे क्षेत्रों पर हुई चर्चा ने यह स्पष्ट किया कि AI अब केवल कंप्यूटर साइंस तक सीमित विषय नहीं रह गया है। शिक्षा से लेकर उद्योग और कृषि से लेकर रक्षा तक, इसके प्रभाव लगातार बढ़ रहे हैं। बीआईटी मेसरा में आयोजित यह कार्यक्रम इसी बदलते तकनीकी परिदृश्य को समझने और भारतीय भाषाओं के माध्यम से AI शिक्षा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। “AI Seminar”






